पुराने बांधों की स्थिति एवं सुरक्षा
पुराने बांधों की स्थिति एवं सुरक्षा
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा संकलित ‘निर्दिष्ट बांधों के राष्ट्रीय रजिस्टर‘ (एनआरएसडी) 2025 के अनुसार, 1,681 निर्दिष्ट बांध ऐसे हैं जो पचास वर्ष से अधिक पुराने हैं। निर्दिष्ट बांधों का व्यापक राज्य–वार विवरण, उनके चालू होने के वर्ष के साथ, इस लिंक के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है: https://dharma.cwc.gov.in/#/national-register-of-specified-dams-(nrsd)-2025
बांधों के संचालन और रखरखाव सहित उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से बांध स्वामियों की होती है। बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक निर्दिष्ट बांध के मालिक के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र के प्रत्येक निर्दिष्ट बांध का हर साल मानसून-पूर्व और मानसून-पश्चात निरीक्षण करे। इस अनुपालन के तहत, बांध मालिक एजेंसियों ने वर्ष 2025 के लिए क्रमशः लगभग 6524 और 6553 बांधों के मानसून-पूर्व और मानसून-पश्चात निरीक्षण की रिपोर्ट दी है।
मानसून-पूर्व और मानसून-पश्चात निरीक्षणों के परिणाम के रूप में, मरम्मत/रखरखाव की तात्कालिकता के आधार पर बांधों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा रहा है। श्रेणी-III में मामूली उपचारात्मक उपायों की आवश्यकता होती है जिन्हें वर्ष के दौरान ठीक किया जा सकता है। श्रेणी-II प्रमुख कमियों को दर्शाती है जिनमें तत्काल उपचारात्मक उपायों की आवश्यकता होती है और श्रेणी-I सबसे गंभीर कमियों को दर्शाती है, जिन्हें यदि अनसुना कर दिया जाए, तो बांध विफल हो सकते हैं।
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2025 की मानसून-पश्चात निरीक्षण रिपोर्ट दर्शाती है कि तीन निर्दिष्ट बांधों को श्रेणी-I) के तहत वर्गीकृत किया गया है। इनमें तेलंगाना का मेदिगड्डा बैराज, उत्तर प्रदेश का लोअर खजुरी बांध और झारखंड का बोकारो बैराज शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 216 बांधों को श्रेणी-II के तहत वर्गीकृत किया गया है। इनमें से 69 निर्दिष्ट बांध पचास वर्ष से अधिक पुराने हैं।
देश भर में चयनित मौजूदा बांधों की सुरक्षा और परिचालन प्रदर्शन में सुधार के साथ-साथ बांध सुरक्षा के लिए संस्थागत मजबूती हेतु, भारत सरकार ‘बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना’ (ड्रिप) के चरण-II और III को लागू कर रही है। यह योजना 10 वर्ष की अवधि (2021-2031) की है, जिसे बाहरी वित्त पोषण के साथ दो चरणों में लागू किया जा रहा है। प्रत्येक चरण 6 वर्ष की अवधि का है, जिसमें 2 वर्ष का ओवरलैप शामिल है। इस योजना के तहत 19 राज्यों और तीन केंद्रीय एजेंसियों में फैले 736 बांधों के पुनर्वास और सुरक्षा संवर्धन की परिकल्पना की गई है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय 10,211 करोड़ रुपये है। ड्रिप चरण-II 12 अक्टूबर 2021 से चालू हो गया है, और इसे विश्व बैंक और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) द्वारा सह-वित्तपोषित किया जा रहा है। चरण-II के लिए वित्तीय परिव्यय 5,107 करोड़ रुपये है, जबकि चरण-III के लिए 5,104 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
योजना के तहत पुनर्वास और सुधार कार्यों का उद्देश्य संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों के माध्यम से बांध की सुरक्षा और बाढ़-प्रबंधन क्षमता को बढ़ाना है। इनमें मुंडेर की दीवारों को ऊँचा करना, स्पिलवे में सुधार, क्यू एंड एम नियमावली और आपातकालीन कार्य योजनाएं तैयार करना, गेटों एवं हाइड्रो-मैकेनिकल घटकों की मरम्मत या उन्हें बदलना, ग्राउटिंग और रिसाव नियंत्रण के माध्यम से बांध की संरचनाओं को मजबूत करना, तथा पहुंच मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, कैटवॉक और डीजी सेट जैसी सुरक्षा सुविधाओं का उन्नयन शामिल है।
वर्तमान में जारी ड्रिप-II योजना के तहत, 4,744 करोड़ रुपये की लागत वाले 173 बांधों के पुनर्वास प्रस्तावों (जिन्हें प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग टेम्पलेट, PST कहा जाता है) को मंजूरी दी गई है। विभिन्न कार्यान्वयन राज्यों/एजेंसियों द्वारा 2816 करोड़ रुपये के अनुबंध आवंटित किए गए हैं। ड्रिप-II योजना के तहत 31 दिसंबर 2025 तक कुल व्यय 2029 करोड़ रुपये है। 35 बांधों पर प्रमुख भौतिक पुनर्वास कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
ड्रिप-II योजना के तहत आवंटित धन और किए गए व्यय का राज्य/एजेंसी-वार विवरण संलग्नक में दिया गया है।
2025 की मानसून-पश्चात निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर, तीन बांधों को श्रेणी-I के तहत वर्गीकृत किया गया है। यह गंभीर सुरक्षा चिंताओं और कमियों को दर्शाता है जो महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करते हैं और उनके निरंतर सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हैं। इन तीन श्रेणी-I बांधों में से दो, उत्तर प्रदेश का लोअर खजुरी बांध और दामोदर घाटी निगम का बोकारो बैराज, पुनर्वास और सुरक्षा संवर्धन के लिए ड्रिप-II योजना के तहत शामिल किए गए हैं।
तीसरे श्रेणी-I बांध, लक्ष्मी (मेदिगड्डा) बैराज के संबंध में, राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह संरचना की अखंडता और मजबूती की रक्षा के लिए राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा अनुशंसित विभिन्न निवारक और उपचारात्मक उपायों को लागू करे।
यह जानकारी आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी द्वारा दी गई।
(Lok Sabha USQ 143)
संलग्नक
ड्रिप चरण–II के तहत राज्य/एजेंसी–वार निधि आवंटन और व्यय
(दिसंबर 31, 2025 तक)
क्रम सं..
राज्य/एजेंसी
ड्रिप-II के तहत धनराशि का अद्यतन आवंटन
किया गया व्यय
(करोड़ रूपये में)
(करोड़ रूपये में)
1
भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड
70
0.04
2
छत्तीसगढ़ डब्लूआरडी
170
53.34
3
दामोदर वैली कारपोरेशन
44
1.17
4
गोवा डब्लूआरडी
58
0
5
गुजरात डब्लूआरडी
350
245.86
6
कर्नाटक डब्लूआरडी
699
284.02
7
केरल एसईबीएल
90
59.44
8
केरल डब्लूआरडी
130
45.77
9
महाराष्ट्र डब्लूआरडी
379
72.72
10
मणिपुर डब्लूआरडी
98
59.72
11
मेघालय पीजीसीएल
150
67.81
12
मध्य प्रदेश डब्लूआरडी
186
33.19
13
ओडिशा डब्लूआरडी
100
37.52
14
पंजाब डब्लूआरडी
71
0.36
15
राजस्थान डब्लूआरडी
503
166.17
16
तमिलनाडु जीईसीएल
260
153.32
17
तमिलनाडु डब्लूआरडी
510
280.68
18
तेलंगाना डब्लूआरडी
100
0
19
उत्तराखंड जेवीएनएल
300
214.89
20
उत्तर प्रदेश आई एंड डब्लू आर डी
354
31.03
21
पश्चिम बंगाल आई एंड डब्लूडी
200
53.99
22
सीडब्लूसी
285
168.49
कुल
5107
2029.53