बजट सत्र के प्रारंभ में राष्ट्रपति के संबोधन में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने पर ज़ोर
बजट सत्र के प्रारंभ में राष्ट्रपति के संबोधन में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने पर ज़ोर
भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बजट सत्र के प्रारंभ में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए सरकार के “सबका साथ, सबका विकास” के व्यापक दृष्टिकोण की रूपरेखा पेश की और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत करने तथा सभी नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार लाने पर सरकार के निरंतर ध्यान को रेखांकित किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य और कल्याण, किसी भी देश के मानव पूंजी विकास और राष्ट्रीय प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने खास तौर पर समाज के गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों के लिए सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया।
राष्ट्रपति के संबोधन में स्वास्थ्य को समावेशी राष्ट्रीय विकास का एक प्रमुख स्तंभ बताया गया और इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रमुख स्वास्थ्य पहलों के तहत हुई महत्वपूर्ण प्रगति को भी रेखांकित किया गया। राष्ट्रपति ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत से अब तक 11 करोड़ से अधिक लोगों को निशुल्क चिकित्सा उपचार प्रदान किया गया है, जिससे माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का विस्तार हुआ है। पिछले वर्ष ही करीब 2.5 करोड़ गरीब और वंचित नागरिकों ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत निशुल्क चिकित्सा उपचार का लाभ उठाया।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए उठाए गए कदमों का ज़िक्र करते हुए, राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्षों में ही करीब 1 करोड़ आयुष्मान वय वंदना कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे लगभग 8 लाख वरिष्ठ और बुजुर्ग नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त करने में मदद मिली है।
राष्ट्रपति ने देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया, जिसके तहत वर्तमान में देशभर में 1.80 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं। ये केंद्र खास तौर पर ग्रामीण, दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में, व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं।
रोग निवारण और जन स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति सरकार की मिशन मोड में जारी योजनाओं का ज़िक्र करते हुए, संबोधन में बताया गया कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत, विशेष रूप से दूरस्थ, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में 6.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जिससे रोगों का शीघ्र पता लगाने और प्रभावी रोकथाम संभव हो पाई है। निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप विशेष रूप से दूरस्थ, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों समेत कई क्षेत्रों में जापानी एन्सेफलाइटिस और संबंधित बीमारियों पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया गया है।
इसके साथ ही, यह दशक पूर्वोत्तर में स्वास्थ्य और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक निर्णायक दौर रहा है। इटानगर में राज्य कैंसर संस्थान और असम के शिवसागर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से लाखों परिवारों के इलाज में काफी सहायता मिलेगी। इसी तरह, सिक्किम के सिचेय में मेडिकल कॉलेज और अगरतला में महिला एवं बाल अस्पताल के निर्माण से स्वास्थ्य सेवाओं में काफी लाभ होगा। ये पहल पूर्वोत्तर में एक मजबूत और व्यापक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दे रही हैं।
माननीय राष्ट्रपति ने न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति बल्कि पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित उनके समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला। सितंबर में चलाए गए ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार‘ अभियान के तहत लगभग 7 करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई, जिससे देशभर में महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी। सरकार की प्रगतिशील सोच और नीतियों के परिणामस्वरूप, महिलाओं ने देश के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
राष्ट्रपति ने गर्वपूर्वक उल्लेख करते हुए बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत को ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित किया है, जो देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह रोकथाम योग्य रोगों के उन्मूलन के लिए भारत के निरंतर प्रयासों की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है।
राष्ट्रपति का संबोधन, स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को और मजबूत करने, प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं की कवरेज का दायरा बढ़ाने और देश के लिए एक सशक्त, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के निर्माण के लिए, नागरिक-केंद्रित सुधारों को जारी रखने के सरकार के संकल्प की पुष्टि करता है।