भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के विज्ञान विभाग ने निशानेबाजी और तीरंदाजी में अपने प्रशिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के विज्ञान विभाग ने निशानेबाजी और तीरंदाजी में अपने प्रशिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के (तीरंदाजी और निशानेबाजी) के प्रशिक्षकों के लिए चार दिवसीय खेल विज्ञान कार्यशाला सोमवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी खेल परिसर स्थित साई खेल विज्ञान प्रभाग में शुरू हुई।
साई के सचिव (खेल) और महानिदेशक श्री हरि रंजन राव भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उद्घाटन भाषण देते हुए उन्होंने दैनिक प्रशिक्षण परिवेश में खेल विज्ञान के एकीकरण को गहरा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री हरि रंजन राव ने कहा, “मंत्रालय और सरकार खेल विज्ञान से जुड़ी पहलों को हर संभव तरीके से पूरा समर्थन देंगे, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम सोच-समझकर निवेश करें और परिणाम प्राप्त करने के लिए खेल विज्ञान का सटीक उपयोग करें। खेल विज्ञान का प्रभावी ढंग से उपयोग खिलाड़ियों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए, विशेष रूप से उन खेलों में जहां मामूली सुधार भी भागीदारी को पोडियम सफलता में बदल सकता है।”
इन खेलों में साई प्रशिक्षकों के लिए कार्यशाला, प्रशिक्षकों के लिए आयोजित जागरुकता बढ़ाने वाली कार्यशालाओं की श्रृंखला का हिस्सा है। इसकी शुरुआत पिछले वर्ष दिसंबर में हुई थी। इसी तरह की कार्यशालाएं साई खेल विज्ञान विभाग में हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, जूडो, एथलेटिक्स और अब निशानेबाजी और तीरंदाजी जैसे विभिन्न खेलों में आयोजित की जा चुकी हैं।
श्री राव ने आगे कहा, “कुशल प्रशिक्षण, चोटों की रोकथाम और खिलाड़ियों का लम्बा करियर सुनिश्चित करने में खेल विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे अंततः खिलाड़ियों और उनके परिवारों पर वित्तीय बोझ कम होता है। हम केंद्रों की संख्या बढ़ाकर और राष्ट्रीय शिविरों और उत्कृष्टता केंद्रों में खिलाड़ी सहायता प्रणालियों को मजबूत करके देश भर में खेल विज्ञान सम्बंधी सहायता को बढ़ाएंगे।”
इस कार्यशाला में पारंपरिक प्रशिक्षण ज्ञान प्रणाली को साक्ष्य-आधारित तौर-तरीकों के साथ जोड़ने के लिए प्रशिक्षकों, खेल वैज्ञानिकों, चिकित्सा विशेषज्ञों और प्रदर्शन विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया है। यह पहल युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा लड़ने के कौशल, सहनशक्ति, टीम और इन खेलों में प्रशिक्षकों के लिए नियमित क्षमता-निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल की परवाह किए बिना एकसमान, विश्व स्तरीय सहायता दिया जाना सुनिश्चित करना है।
इन सिद्धांतों को दैनिक प्रशिक्षण में लागू करने के लिए माननीय केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और खेल सचिव ने खेल विज्ञान में प्रशिक्षकों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर लगातार बल दिया है। साई के खेल विज्ञान विभाग के निदेशक-सह-प्रमुख ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने कहा। “खेल वैज्ञानिकों के सहयोग से प्रशिक्षकों के साथ इस तरह के कार्यक्रमों से भारत की पदक जीतने की संभावनाओं में सकारात्मक योगदान मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा दृष्टिकोण खिलाड़ी-केंद्रित, प्रशिक्षक-नेतृत्व वाला और खेल विज्ञान द्वारा समर्थित है।
इन खेलों पर केंद्रित खेल विज्ञान कार्यशाला का निशानेबाजी और तीरंदाजी जैसे खेलों के लिए प्रदर्शन-उन्मुख दृष्टिकोण है। इन खेलों में मामूली सुधार ही पदक जीतना तय करते हैं। यह कार्यक्रम इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे बायोमैकेनिक्स, माहौल के अनुसार स्वयं को ढालना और स्थिरता प्रशिक्षण से शारीरिक मुद्रा नियंत्रण, निरंतरता और चोट से बचाव में सुधार किया जा सकता है। प्रशिक्षकों को गति विश्लेषण और कोर-स्थिरता पर मुख्य रूप से माहौल के अनुसार स्वयं को ढालना के व्यावहारिक अनुप्रयोगों से अवगत कराया जाता है।
इन सत्रों का उद्देश्य प्रशिक्षकों को वैज्ञानिक सिद्धांतों को सीधे दैनिक प्रशिक्षण परिवेश में लागू करने में मदद करना है। साथ ही विशिष्ट एथलीटों में तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करना और चोट का जोखिम भी कम करना है।
इस कार्यशाला में शरीर क्रिया विज्ञान, पुनर्प्राप्ति विज्ञान, खेल मनोविज्ञान और खेल चिकित्सा जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है, जो एथलीटों की तैयारी के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है। कोच पोषण, जलयोजन, चोट से बचाव, योग आधारित स्वास्थ्य और दीर्घकालिक एथलीट स्वास्थ्य से सम्बंधित मॉड्यूल में भाग ले रहे हैं, साथ ही एकाग्रता, दबाव प्रबंधन और भावनात्मक नियंत्रण जैसे विषयों पर व्यावहारिक खेल मनोविज्ञान सत्रों में भी शामिल हो रहे हैं।
गैर-आक्रामक चिकित्सा पद्धति और मस्तिष्क प्रशिक्षण तकनीक (न्यूरोफीडबैक), दृश्य ध्यान (विज़ुअलाइज़ेशन), अपनाए जाने योग्य तकनीक, डेटा ट्रैकिंग और एआई-आधारित प्रदर्शन फीडबैक पर आधारित उन्नत प्रैक्टिकल सत्रों का उद्देश्य प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए आधुनिक निगरानी उपकरणों से लैस करना है। ये सत्र, भारतीय खेल प्राधिकरण के इको-सिस्टम के साथ-साथ सम्बद्ध विभिन्न विभागों के प्रमुख विशेषज्ञों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इनमें आईजीएससी नई दिल्ली, एनएसएससी बेंगलुरु, सोनीपत, कोलकाता, गांधीनगर और एनएसएनआईएस पटियाला के विशेषज्ञ और साथ ही एनआरएआई और संबद्ध संस्थानों के क्षेत्र विशेषज्ञ शामिल हैं।



