Wednesday, January 28, 2026
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विद्युत मंत्रालय का दो दिवसीय चिंतन शिविर-2026 संपन्न

विद्युत मंत्रालय का दो दिवसीय चिंतन शिविर-2026 संपन्न

विद्युत मंत्रालय का 22 और 23 जनवरी 2026 को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित परवाणू में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आज संपन्‍न हो गया। देश के विद्युत क्षेत्र की भविष्य दिशा तय करने के लिए विचार-विमर्श, चिंतन और सामूहिक योजना बनाने हेतु शिविर का आयोजन किया गया।

केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल, केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक, विद्युत सचिव, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों, राज्य अधिकारियों, राज्य विद्युत नियामक आयोगों के अधिकारियों, औद्योगिक नेताओं/शिक्षाविद सहित विशेषज्ञों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

श्री मनोहर लाल ने 22 जनवरी को कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए भारत के विद्युत क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्‍लेख किया और विद्युत क्षेत्र के मौजूदा और निरंतर उत्‍पन्‍न मुद्दों और चुनौतियों का सामना और उनसे उबरने के उपाय तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि भारत के दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टिकोण ‘विकसित भारत @ 2047’ के लिए एक सुदृढ़ और संवहनीय विद्युत क्षेत्र की आवश्यकता है जो विश्वसनीय, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करे।

दो दिवसीय चर्चा और विचार-विमर्श मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहे :

चिंतन शिविर में प्रतिभागियों ने प्रमुख सुधारों पर खुली और समग्र चर्चा तथा विचार-विमर्श में भाग लिया, जिनका उद्देश्य इस क्षेत्र में वित्तीय सक्षमता बहाल करना, कार्य सुगमता को बढ़ावा देना, अनावश्यक मुकदमेबाजी कम करना, नियामक दायित्‍व सुदृढ़ करना और उपभोक्ता को बिजली पारिस्थितिकी तंत्र के केंद्र में रखने हुए हितकर उपाय करना रहा। इसमें विभिन्‍न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने संगठनात्‍मक व्यावहारिक ज्ञान साझा किए और यथार्थवादी सुधार के समाधान सुझाए।

22 जनवरी को चिंतन शिविर के पहले दिन प्रतिभागियों ने विद्युत संशोधन विधेयक, 2026 के मसौदे में आवश्यक परिवर्तनों पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य वितरण लाइसेंसधारियों की वित्तीय व्यवहार्यता और विद्युत उद्योग की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में संरचनात्मक अक्षमताओं और चुनौतियों का समाधान करना रहा, जिसका लक्ष्य वैधानिक ढांचे का आधुनिकीकरण, सुगम ऊर्जा संक्रमण, कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना और नियामक उत्‍तरदायित्‍व बढ़ाते हुए उपभोक्ता हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

आयोजन में पहले दिन राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2026 के मसौदे पर भी चर्चा हुई। इस नीति का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति विद्युत खपत दो हजार किलोवाट-घंटे और 2047 तक इसे चार हजार किलोवाट-घंटे से अधिक पहुंचाना, 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कमी लाना और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है, जिसके लिए कम कार्बन उत्‍सर्जन ऊर्जा की ओर पारितंत्र में बदलाव की आवश्यकता है। यह नीति प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी एकीकृत कर ग्रिड की मजबूती सुनिश्चित करने और मांग-पक्ष हस्तक्षेपों के साथ उपभोक्ता-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने का प्रयास है। प्रतिभागियों ने देश में परमाणु क्षमता जल्‍द स्‍थापित करने की चुनौतियों से निपटने के उपायों पर भी केंद्रित और सार्थक चर्चा की।

चिंतन शिविर के दूसरे दिन 23 जनवरी को प्रतिभागियों ने संरचनात्मक सुधारों द्वारा बिजली वितरण कंपनियां-डिस्‍कॉम की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और उसे बनाए रखने के उपायों पर विमर्श किया, जिनमें आवश्यक परिचालन, वित्तीय और नियामक उपाय शामिल रहे। प्रमुख केन्द्रित क्षेत्रों में औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और रोजगार सृजन की गति तेज करने विशेष रूप से विनिर्माण, रेलवे और मेट्रो प्रणालियों में अंतर-सब्सिडी युक्तिसंगत बनाने पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने पारेषण लागत कम करने, वितरित ऊर्जा संसाधनों को प्रोत्साहित करने और 2030 तक 300 गीगावाट भंडारण क्षमता लक्ष्य हासिल करने के लिए पारेषण, वितरित ऊर्जा संसाधनों और भंडारण को अनुकूलित करने की चुनौतियों और भविष्‍य के उपायों पर केंद्रित  सत्र में भी भाग लिया।

अंतिम सत्र में प्रतिभागियों ने मुकदमेबाजी कम करने के उपायों पर चर्चा की। यह पाया गया कि बिजली क्षेत्र में अधिकतर विवाद अस्पष्टता, असंगत व्याख्या और प्रक्रियात्मक देरी की वजह से होते हैं। शुल्‍क निर्धारण, वैधानिक बदलाव के दावों, ग्रिड कनेक्टिविटी या विवाद समाधान तंत्र में मौजूद प्रणालीगत बाधाओं की पहचान कर मानकीकरण, डिजिटलीकरण और त्वरित निर्णय लेने की दिशा में बढ़ा जा सकता है। कम विवादों से बिजली कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए लागत में कमी आएगी और बेहतर निवेश का वातावरण निर्मित होगा।

श्री मनोहर लाल ने “2035-36 तक 100 गीगावाट जल-पंप भंडारण परियोजनाओं (पीएसपी) का रोडमैप” शीर्षक से सीईए रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत की बढ़ती ऊर्जा भंडारण आवश्यकताएं पूरी करने की रूपरेखा है। यह योजना गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में 2030 तक 500 गीगावाट और 2035 तक 701 गीगावाट की वृद्धि लक्ष्‍य से प्रेरित है। रिपोर्ट में 2029-30 तक 62 गीगावाट और 2034-35 तक 161 गीगावाट की भंडारण आवश्यकताओं का अनुमान व्‍यक्‍त किया गया है, जिसमें 2030 के बाद दीर्घकालिक भंडारण महत्वपूर्ण होगा और इसी के चलते वर्ष 2035-36 तक 100 गीगावाट पीएसपी आरंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। पीएसपी को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के उपयोग द्वारा परखा हुआ, स्वच्छ, व्‍यापक और दीर्घकालीन भंडारण समाधान बताते हुए रिपोर्ट में उसके मौजूदा विकास स्थिति का आकलन] राज्यवार क्षमता पहचान और चरणबद्ध क्षमता वृद्धि योजना का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही ग्रिड अनुकूलन और देश में स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए नीतिगत, नियामक और कार्यान्वयन उपायों की सिफारिश की गई है। इसमें विशेष रूप से ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप परियोजनाओं को बढ़ावा देने की बात शामिल है। ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण की कुशल तकनीक वाली ऐसी जलविद्युत प्रणालियां हैं जो प्राकृतिक नदियों से दूर निर्मित दो जलाशयों (ऊपरी और निचली) का उपयोग करती हैं।  

चिंतन शिविर में आज 23 जनवरी को बिजली वितरण कंपनियों की 14 वीं एकीकृत रेटिंग और रैंकिंग रिपोर्ट (श्रेणी निर्धारण) भी जारी की गई। इस वर्ष की रेटिंग प्रक्रिया में 65 विद्युत वितरण कंपनियों को शामिल किया गया, जिनमें से 31 कंपनियों को A+ या A श्रेणी दी गई।  वित्त वर्ष 2024-25 के लिए टॉरेंट पावर अहमदाबाद और टॉरेंट पावर सूरत शीर्ष स्थान पर रहे प्राप्त किया है। राज्यों के स्वामित्व वाली वितरण कंपनियों में, उत्तर गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (यूजीवीसीएल) ने सर्वश्रेष्ठ रेटिंग मिली।

श्री मनोहर लाल ने हितधारकों से सुधारों को समयबद्ध रूप से लागू करने के लिए निकट समन्वय के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को विद्युत क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए केंद्र, राज्यों, विद्युत क्षेत्र उद्योग, बिजली कंपनियों और संस्थानों के बीच निरंतर सहयोग महत्वपूर्ण है।

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