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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और कोंकण रेलवे ने एकीकृत अवसंरचना विकास को मज़बूत करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और कोंकण रेलवे ने एकीकृत अवसंरचना विकास को मज़बूत करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

एकीकृत अवसंरचना विकास को मज़बूत करने के लिए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और रेल मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) ने आज एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता रिसोर्स ऑप्टिमाइज़ेशन और आपसी लाभ के अवसरों की तलाश के लिए सहयोग का बड़ा फ्रेमवर्क बनाने के लिए किया गया है। इस समझौते पर नई दिल्ली में केआरसीएल मुख्यालय में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर एनएचएआई के चेयरमैन श्री संतोष कुमार यादव और एनएचएआई और केआरसीएल के वरिष्ठ अधिकारी  उपस्थित रहे। इस समझौते का उद्देश्य भारत के अवसंरचना विकास को समर्थन करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए दोनों संगठनों की पूरक शक्तियों और तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाना है।

इस अंब्रेला समझौते के तहत, एनएचएआई और केआरसीएल आपसी हितों के क्षेत्रों की पहचान करने, योजना बनाने और उन पर काम करने के लिए सहयोग करेंगे। यह साझेदारी खासकर मुश्किल और चुनौतीपूर्ण इलाकों में सड़क और रेल अवसंरचना प्लानिंग में बेहतर तालमेल बनाने में मदद करेगी, जहां एकीकृत समाधान ज़्यादा दक्षता, सुरक्षा और आर्थिक मूल्य दे सकते हैं।

सहयोग के मुख्य क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल अवसंरचना के एकीकृत विकास की योजना बनाना शामिल है, जैसे रेल-कम-रोड पुल और सुरंगें, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, इंटर-मोडल हब, और उन जगहों पर ग्रेड सेपरेटर जहां राष्ट्रीय राजमार्ग रेलवे लाइनों से होकर गुजरते हैं या उनके साथ-साथ चलते हैं। समझौते में जहां भी संभव हो, कॉमन यूटिलिटी गलियारों के विकास की भी कल्पना की गई है।

यह सहयोग एनएचएआई को मुश्किल क्षेत्रों में परियोजनाओं को पूरा करने में केआरसीएल के बड़े अनुभव का फायदा उठाने में भी मदद करेगा, जिसमें जटिल पुल और सुरंग परियोजनाएं और ढलान स्थिरीकरण में डिज़ाइन, ड्राइंग और सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा/प्रूफ चेक के लिए विशेष सहायता शामिल है। समझौते में मौजूदा सुरंगों और ढलान सुरक्षा कार्यों का सुरक्षा और गुणवत्ता ऑडिट प्रदान करना, साथ ही केआरसीएल के प्रशिक्षण संस्थान में एनएचएआई अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना भी शामिल है।

इसके अलावा, समझौते में परियोजना प्रबंधन, इंजीनियरिंग डिज़ाइन, निर्माण पद्धतियों, भूवैज्ञानिक चुनौतियों से निपटने और पर्यावरण प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं सहित तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने का प्रावधान है। समझौते के अंतर्गत नवीन निर्माण सामग्री और तकनीकों में सहयोगी अनुसंधान और विकास, साथ ही परियोजना-विशिष्ट परामर्श सेवाएं प्रदान करने का प्रावधान भी परिकल्पित है।

दोनों संगठन राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और कोंकण रेलवे कॉरिडोर के साथ वाणिज्यिक विकास, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अधिशेष या कम उपयोग वाली भूमि पार्सल की संयुक्त पहचान और उपयोग के अवसरों का पता लगाएंगे। यह सहयोग माल और यात्री आवाजाही के लिए कुशल फर्स्ट-माइल और लास्ट-माइल समाधानों की योजना बनाकर, सड़क और रेल नेटवर्क को एकीकृत करेगा। इसके साथ ही यह माल की आवाजाही की दक्षता बढ़ाने के लिए समर्पित माल गलियारों या लिंकेज स्थापित करने की दिशा में समाधान प्रदान करके लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

इसके अलावा, एनएचएआई और केआरसीएल परियोजना निगरानी, यातायात और परिसंपत्ति प्रबंधन और स्मार्ट बुनियादी ढांचा समाधानों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और डिजिटल समाधानों को अपनाने के साथ-साथ योजना और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए डेटा साझा करने पर सहयोग करेंगे।

प्रभावी कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए, दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलकर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) का गठन किया जाएगा। जेडब्ल्यूजी, सहयोग के लिए विशिष्ट परियोजनाओं की पहचान करने, प्रारंभिक मूल्यांकन और व्यवहार्यता अध्ययन करने, विस्तृत परियोजना प्रस्ताव विकसित करने, प्रगति की निगरानी करने और परिचालन मुद्दों को हल करने के लिए जिम्मेदार होगा। यह समझौता शुरू में पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध रहेगा।

यह रणनीतिक सहयोग एकीकृत योजना, सार्वजनिक संसाधनों के कुशल उपयोग और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो देश के समग्र विकास और प्रगति में योगदान देगा।

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