विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, भारत-कनाडा सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत निरंतर स्वास्थ्य निगरानी प्रौद्योगिकी के विकास में सहयोग दे रहा है
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, भारत-कनाडा सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत निरंतर स्वास्थ्य निगरानी प्रौद्योगिकी के विकास में सहयोग दे रहा है
भारत सरकार की निवारक स्वास्थ्य देखभाल क्षमता सुदृढ करने, स्वदेशी रूप से विकसित चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और अनुसंधान के व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों में इस्तेमाल की प्रतिबद्धता के अनुरूप विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास परियोजना के लिए महाराष्ट्र स्थित डी आर स्टोर हेल्थकेयर सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है।
इस पहल के तहत, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने मधुमेह की निगरानी के साथ ही हृदय संबंधी स्थितियों का जल्द पता लगाने के लिए कार्डियोवैस्कुलर बायोमार्कर युक्त मल्टीवाइटल कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस निर्माण परियोजना के लिए अनुदान सहायता को स्वीकृति दी है। यह परियोजना भारत-कनाडा सहयोगात्मक औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के अंतर्गत समर्थित है ।

यह कार्यक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और कनाडा की राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद और ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के बीच द्विपक्षीय ढांचा है, जिसका उद्देश्य उद्योग-संचालित, बाजार-उन्मुख अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को समर्थन देना है, जिनसे सामाजिक महत्व की व्यावसायिक तौर पर उपयोगी प्रौद्योगिकी विकसित की जा सके। भारत की यह परियोजना कनाडा की नैनोस्पीड डायग्नोस्टिक्स आईएनसी के सहयोग से चलाई जा रही है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बी-टाइप नेट्रीयूरेटिक पेप्टाइड (बीएनपी), ट्रोपोनिन-आई और उच्च-संवेदनशीलता वाले सी-रिएक्टिव प्रोटीन सहित उन्नत कार्डियो-मेटाबोलिक बायोमार्करों को निरंतर ग्लूकोज निगरानी प्रणालियों में एकीकृत करना है। अंतर्गर्भाशयी द्रव के विश्लेषण की मौजूदा सीजीएम प्रणाली द्वारा यह तकनीक ग्लूकोज के स्तर और हृदय संबंधी आरंभिक जोखिम संकेतकों की एक साथ और निरंतर निगरानी सक्षम बनाने के लक्ष्य को आगे बढा रही है ताकि मधुमेह से जुड़ी गंभीर सह-रुग्णताओं का इलाज हो सके।
इस तकनीक से हृदय संबंधी बीमारियों का शीघ्र पता लगाने, दूरस्थ निगरानी और निवारक प्रबंधन में सहायता मिलेगी। इससे विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों को लाभ होगा। साथ ही साथ बार-बार होने वाले निदान और अस्पताल-केंद्रित देखभाल पर निर्भरता कम होगी और किफायती स्वास्थ्य सेवा पहुंच बढेगी। यह डिजिटल स्वास्थ्य सेवा अपनाने और उन्नत चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी विकास की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
वर्ष 2015 में स्थापित डी आर स्टोर हेल्थकेयर सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, निवारक और दूरस्थ स्वास्थ्य निगरानी समाधान विकसित करने में लगी है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सहयोग वाली इस परियोजना का उद्देश्य प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक उपयोग से जोडना और भारतीय स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकता उपयुक्त एकीकृत, बहु-महत्वपूर्ण स्वास्थ्य निगरानी प्लेटफॉर्म के वाणिज्यिक उपयोग का मार्ग प्रशस्त करना है।
परियोजना के अपेक्षित प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हैं:
• घर पर और शल्य चिकित्सा उपरांत देखभाल के लिए ग्लूकोज और हृदय संबंधी बायोमार्करों की वास्तविक समय में दूरस्थ निगरानी
• मधुमेह और उच्च जोखिम वाले रोगियों में हृदय संबंधी स्थितियों का शीघ्र पता लगाना और निवारक प्रबंधन
• मधुमेह, हृदय रोग और श्वसन संबंधी स्थितियों जैसे सह-रोगों के प्रबंधन के लिए स्मार्ट स्वास्थ्य उपकरणों के एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि लंबे समय की बीमारियों के बोझ कम करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित निवारक स्वास्थ्य देखभाल समाधान आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि भारत-कनाडा कार्यक्रम जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक ढांचों के तहत समर्थित परियोजनाएं भारतीय उद्योग को वैश्विक ज्ञान प्रदान करने के साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के लिए स्वदेशी, विस्तार योग्य समाधान विकसित करने में सहायक हैं।
यह पहल प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के दायित्व को दर्शाती है जिसके तहत उद्योग-संचालित नवाचार, अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी सहयोग और स्वदेशी स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देकर स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाना और भारत के चिकित्सा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढीकरण करना है।