Tuesday, January 20, 2026
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उपराष्ट्रपति ने राम जन्मभूमि आंदोलन पर लिखी गयी पुस्तक का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति ने राम जन्मभूमि आंदोलन पर लिखी गयी पुस्तक का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एनक्लेव में पूर्व सचिव श्री सुरेंद्र कुमार पचौरी द्वारा लिखित पुस्तक “अमृत का प्याला: राम जन्मभूमि – चुनौती और प्रतिक्रिया” का विमोचन किया।

Vice President Shri C. P. Radhakrishnan today launched the book “Chalice of Ambrosia: Ram Janmabhoomi – Challenge and Response” by Shri Surendra Kumar Pachauri, former Secretary to Govt. of India, at the Vice President’s Enclave, New Delhi.

He said the Shri Ram Mandir at Ayodhya… pic.twitter.com/TgnbUKDAiC

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक भगवान श्री राम के जन्मस्थान को पुनः प्राप्त करने के सदियों पुराने संघर्ष का वर्णन करती है और ऐतिहासिक कथा को संतुलन, सहानुभूति और शैक्षिक संयम के साथ प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक निर्णायक क्षण का प्रतीक है, जहाँ आस्था, इतिहास, कानून और लोकतंत्र का गरिमा के साथ समन्वय हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही हजारों मंदिर कहीं और बने हों, लेकिन किसी अन्य का महत्व भगवान राम के जन्मस्थान पर बने मंदिर के बराबर नहीं हो सकता।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भगवान राम राष्ट्र और भारत के धर्म की आत्मा हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म कभी पराजित नहीं हो सकता और सत्य हमेशा विजयी होता है। महात्मा गांधी के राम राज्य के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए न्याय, समानता और गरिमा का प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भगवान राम के जन्मस्थान को स्थापित करने की लंबी प्रक्रिया को देखना पीड़ादायक था और ऐसी स्थिति अधिकांश अन्य देशों में असंभव होती। उन्होंने उल्लेख किया कि यह स्वयं भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है, क्योंकि पूरे राष्ट्र के विश्वास के बावजूद भूमि केवल उचित कानूनी प्रक्रिया और प्रमाण के बाद ही आवंटित की गई। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भारत को सही अर्थ में लोकतंत्र की जननी कहा जाता है।

2019 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि न्यायालय का यह निर्णय लाखों भारतीयों के लंबे समय के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करता है और यह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण ने भारतीयों के आत्म-सम्मान को पुनर्स्थापित किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इतिहास लेखन, साहित्यिक कार्य की सबसे कठिन विधाओं में से एक है, क्योंकि इसके लिए भावनात्मक संतुलन और सच्चाई के प्रति निष्ठा की आवश्यकता होती है। लेखक की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि श्री पचौरी ने बिना किसी सनसनीखेज या तोड़-मरोड़ के राम जन्मभूमि आंदोलन के सार को सफलतापूर्वक सामने रखा है।

उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों में अंतर के कारण न्याय की लड़ाई लंबी चली। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि यह पुस्तक इस ऐतिहासिक आंदोलन के आधुनिक चरण का वर्णन करती है साथ ही यह भी सुनिश्चित करती है कि आने वाली पीढ़ियां राष्ट्रीय आत्म सम्मान को पुनर्स्थापित करने के लिए किए गए बलिदान और संघर्षों से अवगत रहें। पुस्तक में उद्धृत एएसआई निष्कर्षों का उद्धरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने पहले से मौजूद संरचना के प्रमाण की ओर इशारा किया और रेखांकित किया कि न्यायिक निर्णय के पीछे यह पुरातात्विक आधार था।

उपराष्ट्रपति ने फैसला आने के बाद सार्वजनिक प्रतिक्रिया को असाधारण बताया, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा संचालित वित्तीय जनसहयोग अभियान को याद किया, जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए विश्वभर के भक्तों से ₹3,000 करोड़ से अधिक जुटाए। उन्होंने 1990 के दशक में शिला पूजन में अपनी माता की भागीदारी की व्यक्तिगत स्मृति को भी साझा किया।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने सुनिश्चित किया कि पवित्र स्थल का पुनरुद्धार भारत के परिपक्व लोकतंत्र और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आए। उपराष्ट्रपति ने 25 नवंबर 2025 को श्री राम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह को याद किया, जो पूरे राष्ट्र के लिए एक गहरा भावपूर्ण क्षण था।

भगवान श्री राम की सार्वभौमिक अपील को प्रतिबिंबित करते हुए श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि श्री राम में श्रद्धा भौगोलिक सीमाओं से परे है, जो केवल अयोध्या और रामेश्वरम में ही नहीं, बल्कि फिजी और कंबोडिया के अंगकोर वाट जैसे स्थानों में भी प्रकट होती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भगवान श्री राम का जीवन और आदर्श मानवता को यह सिखाते हैं कि सच्ची महानता राज्यों पर शासन करने के बजाय सद्गुण में और लोगों के दिल जीतने में निहित है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में इन शाश्वत आदर्शों का पालन करने का प्रयास करें।

अपने संबोधन का समापन करते हुए श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने श्री सुरेंद्र कुमार पचौरी को उनकी पुस्तक के लिए बधाई दी और आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचेगी।

इस कार्यक्रम में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के संग्रहालय और पुस्तकालय के कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष श्री नृपेन्द्र मिश्र; भारत के पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक श्री विनोद राय; यूपीएससी के पूर्व अध्यक्ष श्री दीपक गुप्ता;, भारत के उपराष्ट्रपति के सचिव श्री अमित खरे; हर्ष आनंद पब्लिकेशन्स प्रा. लि के श्री आशीष गोसाईं और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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