Monday, January 19, 2026
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कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा पुणे में उद्योग जगत से परामर्श के साथ पीएम-सेतु  को सफलतापूर्वक लागू करने को गति मिली

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा पुणे में उद्योग जगत से परामर्श के साथ पीएम-सेतु  को सफलतापूर्वक लागू करने को गति मिली

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने आज पीएम-सेतु (प्रधान मंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs) योजना को लागू करने के हिस्से के रूप में पुणे में उद्योग जगत से बड़ा परामर्श आयोजित किया। यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी (वाईएएसएचएडीए) में आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व भारत सरकार के एमएसडीई की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी और महाराष्ट्र सरकार के कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग की अपार मुख्य सचिव सुश्री मनीषा वर्मा ने किया।

ऑटोमोटिव, निर्माण, वस्त्र, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल और गैस, और नवीकरणीय ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों की 40 से ज़्यादा कंपनियों ने इस परामर्श में भाग लिया। महिंद्रा, टाटा ग्रुप, टाटा मोटर्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, गोदरेज और फिएट जैसे प्रमुख उद्योग साझेदार मौजूद थे। चर्चा हब-एंड-स्पोक आईटीआई मॉडल, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाले शासन, पाठ्यक्रम नवाचार, ट्रेनर अपस्किलिंग और रोजगार परिणामों को मजबूत करने पर केंद्रित थी।

इस अवसर पर  कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने पीएम-सेतु के तहत उद्योग के आगे आने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना आईटीआई को न केवल बेहतर अवसंरचना के माध्यम से, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रशिक्षक के प्रदर्शन, आधुनिक शिक्षण पद्धति और मापने योग्य प्लेसमेंट परिणामों पर अधिक ध्यान केंद्रित करके, उद्योग के लिए अधिक प्रासंगिक, महत्वाकांक्षी और परिणाम-उन्मुख बनाने के लक्ष्य पर आधारित है।

सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने यह भी बताया कि यह योजना स्थायी साझेदारी बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जहाँ उद्योग शासन, करिकुलम अलाइनमेंट और ट्रेनर अपस्किलिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाता कि प्रशिक्षण बदलती प्रौद्योगिकी और वास्तविक शॉपफ्लोर आवश्यकताओं के साथ संरेखित रहे। उन्होंने उद्योग के लिए प्रमुख लाभों पर भी जोर दिया, जिसमें नौकरी के लिए तैयार प्रशिक्षुओं की विश्वसनीय पाइपलाइन, भर्ती और ऑनबोर्डिंग लागत में कमी और आधुनिक लैब और उन्नत उपकरणों तक बेहतर पहुंच शामिल है।

राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, महाराष्ट्र सरकार की अपर मुख्य सचिव, सुश्री मनीषा वर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र इस योजना के तहत उद्योग को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र संबंधित पक्षों के साथ घनिष्ठ समन्वय, सहायक राज्य-स्तरीय व्यवस्थाओं और उद्योग भागीदारों के साथ सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाएगा ताकि राज्य में आईटीआई मजबूत उद्योग संबंधों और बेहतर रोजगार परिणामों के साथ उच्च गुणवत्ता वाले कौशल संस्थानों के रूप में उभर सकें।

पीएम-सेतु पर उद्योग की प्रतिक्रिया ने योजना के तहत परिकल्पित सहयोगी ढांचे में गहरी रुचि दिखाई, जिसमें कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में उद्योग की बढ़ी हुई भागीदारी के मूल्य पर जोर दिया गया। ऑटोमोटिव और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से मिले सुझाव से पता चला कि यह पहल भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा पूल विकसित करने के लिए संयुक्त प्रयासों को सक्षम बनाती है। इसके साथ ही यह पहल आईटीआई को उत्पादन से जुड़े प्रशिक्षण और नवाचार के केंद्रों में विकसित होने में भी सहायता करती है।

चर्चाओं में उद्योग के लिए रणनीतिक लाभ भी सामने आए, जिसमें शासन संरचनाओं में अधिक भागीदारी, पाठ्यक्रम विकास और प्रशिक्षण वितरण में योगदान करने का दायरा, मजबूत नियोक्ता दृश्यता और सीएसआर और ईएसजी उद्देश्यों के साथ घनिष्ठ तालमेल शामिल है। इससे कौशल विकास बदलती कार्यबल आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी बना रहता है।

इस कार्यक्रम में आईटीआई औंध पुणे, आईटीआई गर्ल्स पुणे, आईटीआई पिंपरी चिंचवाड़ और फ्रोनियस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, भोसरी का फील्ड दौरा भी शामिल था। इससे प्रतिभागियों को संस्थागत बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र और उद्योग-एकीकृत कौशल मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव मिला।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अक्टूबर 2025 में पांच वर्षों में ₹60,000 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई पीएम-सेतु का लक्ष्य आईटीआई को सरकारी स्वामित्व वाले लेकिन उद्योग-प्रबंधित संस्थानों में बदलना है। बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करके, नए पाठ्यक्रम शुरू करके, और उद्योग-नेतृत्व वाले शासन को शामिल करके, यह योजना भारत के विकास क्षेत्रों और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप कुशल और रोजगार योग्य युवा कार्यबल बनाने का प्रयास करती है।

 

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