मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने चेन्नई स्थित आईसीएआर-सीआईबीए का दौरा किया और झींगा पालकों से बातचीत की
मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने चेन्नई स्थित आईसीएआर-सीआईबीए का दौरा किया और झींगा पालकों से बातचीत की
केन्द्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज तमिलनाडु के चेन्नई स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- केंद्रीय खारे पानी के मत्स्य पालन संस्थान (आईसीएआर-सीआईबीए) और इसके मुट्टुकाडु प्रायोगिक केंद्र का दौरा किया।
डॉ. अभिलक्ष लिखी ने अपने इस क्षेत्रीय दौरे पर झींगा किसानों और उद्यमियों के साथ बातचीत की। इस अवसर पर उन्होंने सचिव के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के विभिन्न चरणों में अपनी सफलता की कहानियों, सर्वोत्तम तौर तरीकों और चुनौतियों को साझा किया।
डॉ. लिखी ने आईसीएआर-सीआईबीए द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत चलाए जा रहे पेनायस इंडिकस आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम स्थल का भी दौरा किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय सफेद झींगा ( पी. इंडिकस ) की आनुवंशिक रूप से उन्नत किस्मों के विकास के माध्यम से देश में वैज्ञानिक झींगा प्रजनन को मजबूत करना है।
डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आईसीएआर-सीआईबीए के वैज्ञानिकों से बातचीत की और मछली, क्रस्टेशियन(आर्थ्रोपोडा संघ के जलीय अकशेरुकी जीव होते हैं। इनमें केकड़े, झींगे, झींगा मछली, बार्नेकल, क्रेफ़िश और वुडलाइस जैसे विविध जीव शामिल हैं), एक्वेरियम में रख जाने वाली सजावटी मछली और केकड़ा इकाइयों के साथ-साथ चारा मिल सहित कई अनुसंधान सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरे पर उन्हें खारे पानी की मत्स्य पालन के क्षेत्र में चल रहे विविध अनुसंधान, विकास और नवाचार गतिविधियों को प्रत्यक्ष से अनुभव करने का अवसर प्राप्त हुआ।
झींगा भारत का प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यात उत्पाद है और इसलिए केंद्रीय मत्स्य सचिव की यह यात्रा झींगा उद्योग के लिए विशेष महत्व रखती है। लगभग 130 देशों को होने वाले कुल समुद्री खाद्य निर्यात का इसकी मात्रा लगभग 70 प्रतिशत है। किसानों और उद्यमियों के साथ सीधी बातचीत से प्राप्त जानकारियां विभाग को मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए उचित नीतिगत हस्तक्षेप और उपाय तैयार करने में सहायता करेंगी।
सरकार के मत्स्य विभाग ने झींगा बाजार को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं। अमरीका के 58 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बावजूद, इस क्षेत्र ने लचीलापन दिखाया है और अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत और निर्यात मात्रा में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
आईसीएआर-सीआईबीए झींगा पालन के लिए चारा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और वैज्ञानिक मत्स्यपालन को बढ़ावा देने और संसाधन उपयोग दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से पीएमएमएसवाई द्वारा वित्त पोषित दो प्रमुख परियोजनाओं को कार्यान्वित कर रहा है। पहली परियोजना, स्वदेशी झींगा मत्स्यपालन का विकास: पेनायस इंडिकस का आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम है। इसकी कुल लागत 25.04 करोड़ रूपये है। यह आनुवंशिक रूप से उन्नत स्वदेशी झींगा किस्मों के विकास पर केंद्रित है। दूसरी परियोजना भूमि, जल और चारे के सटीक उपयोग के लिए नई युग की झींगा प्रणाली है। इसे 2.21 करोड़ रूपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। इसका लक्ष्य जलवायु-अनुकूल और संसाधन-कुशल झींगा पालन मॉडल को बढ़ावा देना है। डॉ. लिखी ने अपनी यात्रा के दौरान दोनों पहलों की प्रगति की समीक्षा की।
डॉ. अभिलक्ष लिखी की उपस्थिति में देश के स्वदेशी और टिकाऊ झींगा चारा इको सिस्टम को और मजबूत करने के लिए दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
आईसीएआर-सीआईबीए ने सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव की उपस्थिति में ड्रोन प्रदर्शन का आयोजन किया, इसमें चारा छिड़काव और परिवहन का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। मत्स्य पालन क्षेत्र में ड्रोन के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है, इसके लिए मत्स्य विभाग ने आईसीएआर-सीआईएफआरआई, बैरकपुर, कोलकाता को 1.16 करोड़ रूपये की परियोजना लागत के साथ पायलट परियोजना सौंपी है।
1. स्वदेशी झींगा चारा उत्पादन को बढ़ावा देना
झींगा लार्वा के लिए उच्च लागत पर आयातित फ़ीड लंबे समय से हैचरी(अंडा सेने का स्थान या चूजा घर) के लिए एक बड़ी समस्या रही है। केंद्रीय खारे पानी के मत्स्य पालन संस्थान के लार्वा फ़ीड फॉर्मूलेशन पर केंद्रित अनुसंधान ने व्यवहार्य स्वदेशी विकल्प का विकास किया है। केंद्रीय खारे पानी के मत्स्य पालन संस्थान में निर्मित प्रायोगिक स्तर के फ़ीड का तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की पचास से अधिक हैचरी में लगभग एक वर्ष तक सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इसमें इनक्यूबेट (किसी चीज को सुरक्षित और गर्म जगह पर रखना ताकि वह विकसित हो सके, उसे’ इनक्यूबेट’ करना कहते हैं) साझेदारों के माध्यम से इनकी प्रभावकारिता और बाजार क्षमता का प्रदर्शन किया गया है। इन परिणामों से उत्साहित होकर, मेसर्स सेल्ले हैचरी टेक अब केंद्रीय खारे पानी के मत्स्य पालन संस्थान की तकनीक का उपयोग करते हुए पीएमएमएसवाई योजना के तहत एक बड़े पैमाने पर उत्पादन सुविधा स्थापित करेगी, जो लार्वा फ़ीड उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2. झींगा आहार में प्रोटीन स्रोत के रूप में चावल आधारित डीडीजीएस का उपयोग करके महंगे आयात पर निर्भरता कम करें।
आईसीएआर सीआईबीए और ओडिशा स्थित मेसर्स बीआरसी मरीन प्रोडक्ट्स के बीच हस्ताक्षरित दूसरे समझौता ज्ञापन में पेनेयस वन्नामेई झींगा के आहार में किफायती और टिकाऊ प्रोटीन स्रोत के रूप में चावल आधारित राइस डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (डीडीजीएस) के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। चावल आधारित इथेनॉल उत्पादन का उप-उत्पाद डीडीजीएस, आईसीएआर सीआईबीए द्वारा सोयाबीन मील जैसे महंगे पारंपरिक प्रोटीन अवयवों के संभावित विकल्प के रूप में मूल्यांकित किया गया है। प्रयोगशाला अध्ययनों से पता चला है कि डीडीजीएस को झींगा के आहार में 7.5 से 10 प्रतिशत तक शामिल किया जा सकता है। इससे उनकी वृद्धि या स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। आशाजनक शोध परिणामों को देखते हुए, बीआरसी मरीन प्रोडक्ट्स ने बड़े पैमाने पर फील्ड परीक्षण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण गतिविधियों के लिए केंद्रीय खारे पानी के मत्स्य पालन संस्थान (सीआईबीए) से तकनीकी सहायता का अनुरोध किया है। इस पहल से आहार लागत में 5 से 6 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है, साथ ही महंगे आयातित प्रोटीन स्रोतों के बजाय स्थानीय रूप से उपलब्ध, किफायती अवयवों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. लिखी ने इस यात्रा के दौरान, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की अध्यक्षता भी की। अपने संबोधन में, उन्होंने राष्ट्रीय मत्स्यपालन विकास में आईसीएआर-सीआईबीए के योगदान की सराहना की और किसानों तक नवाचारों के समय पर और प्रभावी हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान संस्थानों, उद्योग भागीदारों और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयासों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास, जलवायु-अनुकूल मत्स्यपालन और कुशल संसाधन उपयोग पर सरकार के विशेष ध्यान देने के बारें में भी जानकारी दी।
सरकार के मत्स्य विभाग के संयुक्त सचिव (अंतर्देशीय) श्री सागर मेहरा; आईसीएआर-सीआईबीए के निदेशक डॉ. के.के. विजयन; और आईसीएआर के उप महानिदेशक (मत्स्य पालन) डॉ. जे.के. जेना ने सत्र के दौरान विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बी.के. बेहरा के वर्चुअल माध्यम से दिए गए स्वागत भाषण से औपचारिक कार्यवाही का शुभारंभ हुआ।