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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) का उद्घाटन किया।

लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला; केंद्रीय मंत्रीगण; राज्य सभा के उपसभापति, श्री हरिवंश; राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारी; सांसदगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति इस अवसर की शोभा बढ़ाई।

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The 28th Conference of Speakers and Presiding Officers of the Commonwealth (CSPOC) was inaugurated today at the iconic Central Hall of the historic Samvidhan Sadan by the Hon’ble Prime Minister of India, Shri Narendra Modi.

On this significant occasion, Shri Om Birla, Hon’ble… pic.twitter.com/CK5QveUmPG

स्वागत भाषण देते हुए लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने समाज और शासन को प्रभावित कर रहे तीव्र तकनीकी परिवर्तनों की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) तथा सोशल मीडिया ने लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता में वृद्धि की है। उन्होंने यह भी कहा कि इनके दुरुपयोग से दुष्प्रचार, साइबर अपराध और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुई और इन चुनौतियों से गंभीरता से निपटना और उपयुक्त समाधान निकालना विधायिकाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए नैतिक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस तथा विश्वसनीय, पारदर्शी और जवाबदेह सोशल मीडिया ढाँचों के बढ़ते महत्व पर बल दिया। करते उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन में इन महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर गहन विचारविमर्श होगा और ठोस, नीतिउन्मुख परिणामों प्राप्त होंगे, जिससे विधायिकाएँ प्रौद्योगिकी का आदर्श रूप से और जिम्मेदारी से उपयोग कर सकेंगी।

भारत के अनुभव को रेखांकित करते हुए श्री बिरला ने बताया कि भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विधायी संस्थाओं को उत्तरोत्तर पेपरलेस बनाया जा रहा है और उन्हें एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोड़ा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और सुलभता के नए मानक स्थापित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संसद और सरकार के साझे प्रयासों से भारत ने अनेक पुराने और अनावश्यक कानूनों को हटाया है, नए जनकल्याणकारी कानून बनाए हैं तथा जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप नीतियाँ तैयार की हैं। इन पहलों से भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

भारत की सात दशकों से अधिक की संसदीय यात्रा के बारे में बात करते हुए माननीय अध्यक्ष ने कहा कि भारत ने जनकेंद्रित नीतियों, कल्याणकारी कानूनों तथा निष्पक्ष और सुदृढ़ निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को निरंतर सुदृढ़ किया है। इन प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है और लोकतंत्र में जन विश्वास और गहरा हुआ है।

राष्ट्रमंडल के संसदीय मंच की भूमिका पर बल देते हुए अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे मंच विभिन्न देशों के पीठासीन अधिकारियों को वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचारविमर्श के लिए एक साथ लाने की विशिष्ट क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व के विधानमंडलों के समक्ष उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक विवेक और साझा जिम्मेदारी आवश्यक है।

अध्यक्ष महोदय ने अंतरसंसदीय संघ (IPU) की प्रेसिडेंट, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) के चेयरपर्सन, राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारियों, भारत सरकार के मंत्रियों, राज्य विधान सभाओं के पीठासीन अधिकारियों, सांसदों तथा सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य विशिष्ट प्रतिनिधियों और अतिथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि उद्घाटन समारोह में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति सभी प्रतिभागियों के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने इस बात का  उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और व्यापक सुधारों के तहत भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का नेतृत्व वैश्विक चुनौतियों के लिए निर्णायक समाधान प्रस्तुत कर रहा है और आज विश्व दिशा, स्थिरता और प्रेरणा के लिए भारत की ओर देख रहा है।

सम्मेलन के महत्व को रेखांकित करते हुए अध्यक्ष महोदय ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रजिसे लोकतंत्र की जननी कहा जाता हैमें यह आयोजन लोकतांत्रिक संवाद, सहयोग और साझा मूल्यों को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि CSPOC मंच राष्ट्रमंडल में संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने हेतु सर्वोत्तम प्रथाओं, नई पहलों और अनुभवों को साझा करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है।

सम्मेलन के एजेंडे का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने बताया कि भारत की संसद द्वारा आयोजित यह सम्मेलन, जिसमें राष्ट्रमंडल के पीठासीन अधिकारी और संसदीय नेता समकालीन चुनौतियों और संसदीय लोकतंत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचारविमर्श के लिए एकत्र हुए हैं, पीठासीन अधिकारियों की निष्पक्षता और न्यायसंगतता के सिद्धांतों के साथसाथ संसदों में जनविश्वास और विश्वसनीयता बढ़ाने पर चर्चा करेगा। उन्होंने कहा कि जनता की दृष्टि में संसदीय संस्थाओं की गरिमा, विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी लोकतंत्रों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अध्यक्ष महोदय ने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं और विचारविमर्श से विधायिकाओं के समक्ष चुनौतियों के सामूहिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी तथा  विचारों का यह आदानप्रदान संसदीय प्रक्रियाओं में सुधार लाने, संसदीय कार्यों में जनभागीदारी को बढ़ाने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में नागरिकों के विश्वास को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।

श्री बिरला ने सम्मेलन में सभी प्रतिनिधियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए अपने संबोधन का समापन किया और विश्वास व्यक्त किया कि 28वें सीएसपीओसी के परिणाम राष्ट्रमंडल में संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल के 53 संप्रभु देशों की राष्ट्रीय संसदों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों शामिल हैं । अन्य प्रतिनिधियों में 14 अर्धस्वायत्त संसदों के पीठासीन अधिकारी, सीपीए के महासचिव, महासचिव तथा उनके साथ आए अधिकारी शामिल हैं।

42 सीएसपीओसी सदस्य देशों और 4 अर्धस्वायत्त संसदों से कुल 61 पीठासीन अधिकारीजिनमें 45 स्पीकर और 16 डिप्टी स्पीकर शामिल हैं – 28वें सीएसपीओसी में भाग ले रहे हैं।

पूर्ण सत्रों के दौरान निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की जाएगी: संसद में आर्टिफिशल इंटेलिजेंसनवाचार, निगरानी और अनुकूलन के बीच संतुलन स्थापित करना; सोशल मीडिया और उसका सांसदों पर प्रभाव; संसद के प्रति जन सामान्य की समझ बढ़ाने और मतदान के बाद भी नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नवीन रणनीतियाँ; तथा संसद सदस्यों और संसदीय कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्या। और लोकतांत्रिक संस्थानों को सुदृढ़ बनाने में अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका।

कल लोक सभा अध्यक्ष के समापन भाषण के साथ सम्मेलन सम्पन्न होगा।

 

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