केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गांधीनगर में गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर की BSL-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी का शिलान्यास किया
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गांधीनगर में गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर की BSL-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी का शिलान्यास किया
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात की राजधानी गांधीनगर में गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर की BSL-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी का शिलान्यास किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल और उप-मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज गुजरात की धरती से हम भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा, बायो सेफ्टी और बायोटेक विकास के एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में BSL-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी के शिलान्यास से आगामी दिनों में समग्र भारत के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र का एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री मोदी जी के इस विजन पर आधारित है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केवल रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास का आधार स्तंभ बने।
श्री अमित शाह ने कहा कि पुणे की वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के बाद यह भारत की दूसरी उच्च स्तरीय लैब होगी। परन्तु किसी राज्य सरकार द्वारा बनाई जा रही यह पहली लैब है, जिसका श्रेय गुजरात को जाता है। एक विशाल कॉम्प्लेक्स में 362 करोड़ रुपये की लागत से 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में देश की जैविक सुरक्षा का एक मजबूत किला बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में हो रहे अत्याधुनिक रिसर्च से कई साल तक पिछड़े हुए थे, लेकिन BSL-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी से बायो-टेक्नॉलजी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को नए मौके मिलेंगे और भारत इस क्षेत्र में आगे निकल पाएगा। यह सुविधा वैज्ञानिकों को अत्यंत संक्रामक और घातक वायरस पर एक सुरक्षित वातावरण में शोध करने का प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगी।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि दुनिया भर की बीएसएल लैब्स का अध्ययन करके BSL-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी तैयार की जा रही है। यहाँ पशुओं से होकर मानव तक पहुंचने वाले रोगों का भी अध्ययन करने की विश्वस्तरीय व्यवस्था होगी। श्री शाह ने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत बीमारियां पशुओं से होकर इंसान तक पहुंचती हैं, इसलिए भारत ने वन हेल्थ मिशन के माध्यम से मानव और पशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि अब हमारे वैज्ञानिकों को खतरनाक वायरस के सैंपल जांचने के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। विदेश पर निर्भरता खत्म होने से जांच में तेजी आएगी और हम आत्मनिर्भर बनेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएल-4 सभी सुविधाओं की पूर्ति करेगी। हमें रिसर्च-बेस्ड परमानेंट सुरक्षा की दरकार है और यह लैब हमारी सभी जरूरतों को पूरा करेगी।
श्री अमित शाह ने कहा कि बीते 11 साल में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। बायो क्षेत्र में हमें काफी सफलता मिली है और इस क्षेत्र में काफी पोटेंशियल है। उन्होंने कहा कि 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी 10 बिलियन डॉलर की थी और 2024 का वित्त वर्ष समाप्त होने पर यह 166 बिलियन डॉलर तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि 10 साल के अंदर 17 गुना विकास यह बताता है कि भारत के युवा और उद्योगपति बायो इकोनॉमी के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं, बस उन्हें शासन के समर्थन और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 2014 में बायोटेक क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या 500 से कम थी, जो 2025 में बढ़कर 10 हजार से अधिक हो चुकी है। बायो इंक्यूबेटर्स वर्ष 2014 में 6 थे, जो 2025 में 95 हो चुके हैं। हमारे पास इंक्यूबेशन स्पेस 60 हजार वर्ग फुट था, जो 15 गुना बढ़कर आज 9 लाख वर्ग फुट हो गया है। बाजार में केवल यो उत्पाद थे, अब 800 से ज्यादा प्रोडक्ट्स बाजार में लॉन्च किया जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का फ्यूचर, देश में पोटेंशियल और देश के युवाओं की उसमें रुचि देखनी हो तो पेटेंट फाइलिंग इसका अच्छा पैमाना है। उन्होंने कहा कि 2014 में इस क्षेत्र में भारत के 125 पेटेंट फाइल हुए थे और 2025 में हम 1300 तक पहुंच चुके हैं। प्राइवेट फंडिंग पहले 10 करोड़ रुपए थी, अब इस क्षेत्र में 7 हजार करोड़ का निवेश हो चुका है। श्री शाह ने कहा कि बायोटेक के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है। इस क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं ने दिखाया है कि हमारा युवा जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर है।
श्री अमित शाह ने कहा कि भारत एक प्रकार से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश है। विश्व की 60 प्रतिशत वैक्सीन हमारे यहां बनती हैं। सर्वाइकल कैंसर की पहली स्वदेशी वैक्सीन सर्वावैक (Cervavac) और कोरोना की विश्व की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन भारत में बनी हैं। ये इस बात के सूचक हैं कि इस क्षेत्र में भारत को बहुत आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने BioE-3 नीति (इकोनॉमी, एनवायरनमेंट और एम्प्लॉयमेंट) लागू करके बायोटेक को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। यह नीति हमें बहुत आगे तक ले जाएगी। श्री शाह ने कहा कि जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट में 10 हजार से ज्यादा व्यक्तियों के जीनोम सीक्वेंसिंग को हमने स्टोर कर लिया है और हमारे लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि दो दशक पहले मोदी जी की परिकल्पना से गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन की स्थापना हुई थी। तब काफी लोगों को लगता था कि यह एक सपना है, लेकिन मोदी जी ने दूरदर्शिता के साथ एशिया की पहली डेडिकेटेड बायोटेक यूनिवर्सिटी बनाई और गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी ने इस देश में एक नई शुरुआत की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वयं 2018 में गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि गुजरात बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आज देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। जब बीएसएल-4 फैसिलिटी शुरू हो जाएगी, तब गुजरात इसमें पहले स्थान पर होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि हमने बायोटेक पॉलिसी के तहत 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 1 लाख रोजगार का लक्ष्य रखा है। मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष सहायता भी घोषित की है। उन्होंने कहा कि गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भारत सरकार के Deep Ocean Mission में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले कोरोना ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया था। उस समय हमारा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित देशों जितना मजबूत नहीं था। उन्होंने कहा कि दुनियभर में कोरोना का सबसे अच्छा मुकाबला भारत ने किया। भारत ने 140 करोड़ की आबादी को दो बार वैक्सीन दी और सभी को मोबाइल पर मोदी जी के हंसते हुए चेहरे के साथ तुरंत ही सर्टिफिकेट दिए गए। यह तकनीक का कमाल था। श्री शाह ने कहा कि जब दुनिया क्षुब्ध पड़ी थी, भारत में कोरोना के 300 मरीज भी नहीं थे, हमारी टेस्टिंग फैसिलिटी भी विकसित नहीं हुई थी, फिर भी मोदी जी ने वैक्सीन बनाने के लिए टीम का गठन कर दिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत में दो वैक्सीन बनीं, 140 करोड़ की पूरी आबादी को वैक्सीन लगाई गई और हमने दुनिया के 70 देशों में भी टीका पहुंचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि पहले दुनिया में बनी हुई वैक्सीन भी भारत में 11-12 साल बाद आती थी और लोगों को वैक्सीन लगाना तो दूर की कौड़ी थी। गृह मंत्री ने कहा कि हमने सबसे पहले वैक्सीन बनाई, सबसे पहले लगाई और दुनिया के कई देशों को कोरोना से बचाने का काम भी किया।
श्री अमित शाह ने बीएसएल-4 की देश में बन रही दूसरी फ़ैसिलिटी अब हमें और आगे ले जाएगी। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी में अब तक देश में केवल एक ही बीएसएल-4 लैब पुणे में थी, जिसकी वजह से सैकड़ों किलोमीटर दूर सैंपल भेजना पड़ता था। लेकिन नई बन रही लैब से हमें बड़ा फायदा होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति विकसित हो रही प्रतिरोधकता (Resistance) हमारी सोसाइटी और पूरी मानवजाति के सामने बहुत बड़ा खतरा है। यह एक ‘साइलेंट डिजास्टर’ की तरह है। उन्होंने कहा कि Antimicrobial Resistance (AMR) पूरे समाज के लिए बहुत बड़ा संकट है। एएमआर का खतरा आने वाले दिनों में और आने वाली पीढ़ियों के लिए फर्टाइल ट्रांसमिशन का कारण भी बनता है। उन्होंने कहा कि AMR से निपटने के लिए स्पष्ट रोडमैप, सही समय पर उपचार व अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता पहुँचाना जरूरी है। हमारा लक्ष्य संक्रमण को रोकना और एंटीबायोटिक्स को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाना होना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि विकास और विज्ञान विरासत के खिलाफ नहीं हैं, दोनों देश की जनता की जरूरतें हैं, दोनों एक साथ चल सकते हैं।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कल सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया और सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष की शुरुआत की। 16 बार तोड़ा गया यह चिरपुरातन शिवालय हर बार नया बनकर खड़ा हुआ है। तोड़ने वाले आज दुनिया के नक्शे पर नहीं हैं, उनका नामोनिशान नहीं है, लेकिन वह शिवालय आज भी गगनचुंबी ध्वजा लेकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का भव्य मंदिर सिर्फ एक ज्योतिर्लिंग और शिवालय नहीं है, बल्कि समग्र भारतीय समाज के गौरव का मानबिंदु है। सोमनाथ का शिवालय सनातन का सम्मान और भारत की जनता के जीवन-तत्व व जीवंतता दोनों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दुनिया में शायद ही कोई जगह होगी जो 16 बार टूटकर भी सम्मान के साथ गगनचुंबी ध्वजा के साथ आज विद्यमान है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने हमारी इस विरासत का परिचय पूरी दुनिया को कराया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विज्ञान के नाम पर विरासत को भुलाना चाहते थे, लेकिन मोदी सरकार के 11 वर्षों ने साबित कर दिया कि विज्ञान और विरासत एक साथ चल सकते हैं। कल मोदी जी द्वारा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’, और आज इस BSL-4 लैब का शिलान्यास, यह बताता है कि विरासत और विज्ञान भारत में एक दूसरे के पूरक हैं।