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केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना पर हितधारकों से परामर्श बैठक की

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना पर हितधारकों से परामर्श बैठक की

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आज  दुर्लभ पृथ्वी तत्वों से बनने वाले सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना’ पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक की। बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय सचिव; परमाणु ऊर्जा विभाग सचिव; इंडियन रेअर अर्थ्स लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक; राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के तकनीकी निदेशक, अलौह सामग्री प्रौद्योगिकी विकास केंद्र के निदेशक और भारत एवं विदेश के विभिन्न औद्योगिक हितधारकों ने भाग लिया।

श्री कुमारस्वामी ने अपने आरंभिक संबोधन में कहा कि यह योजना वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण अनुरूप, नवीकरणीय विकास परियोजनाओं के लिए आत्मनिर्भर, मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी परितंत्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री ने सभी पात्र घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से इस अवसर का लाभ उठाने और बोली प्रक्रिया में भाग लेकर भारत के दीर्घकालिक विकास में योगदान देने का आग्रह किया। श्री कुमारस्वामी ने बताया कि मंत्रालय प्रस्ताव अनुरोध को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने 15 दिसंबर, 2025 को अधिसूचित योजना की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी।

कुल 7,280 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय की इस योजना में बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन के रूप में 6,450 करोड़ रुपये और भारत में प्रति वर्ष 6,000 मिलियन टन रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट- आरईपीएम विनिर्माण क्षमता स्थापित करने पर 750 करोड़ रुपये की पूंजी सब्सिडी शामिल है। इससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और देश वैश्विक दुर्लभ मृदा चुंबकों बाजार में प्रमुख विनिर्माणकर्ता के रूप में स्थापित होगा। यह योजना आवंटन की तिथि से कुल 7 वर्षों की अवधि के लिए है, जिसमें एकीकृत आरईपीएम उत्पादन सुविधा स्‍थापित करने के लिए 2 वर्ष की आरंभिक अवधि और इसकी बिक्री पर प्रोत्साहन राशि के वितरण के लिए 5 वर्ष शामिल हैं।

बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने योजना में भाग लेने में रुचि व्यक्त करते हुए अपनी क्षमताओं का विवरण दिया।

यह परामर्श बैठक देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और दुर्लभ मृदा चुंबक के क्षेत्र में प्रमुख विनिर्माणकर्ता बनने की दिशा में उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता रेखांकित करती है।

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