Tuesday, January 13, 2026
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राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 की अधिसूचना

राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 की अधिसूचना

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के तहत राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।

इन नियमों में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शामिल करने, महासभा और कार्यकारी समिति की संरचना, चुनाव प्रक्रिया और राष्ट्रीय खेल निकायों तथा क्षेत्रीय खेल संघों के सदस्यों के लिए अयोग्यता मानदंडों  के लिए ढांचा प्रदान किए गए हैं।

नियमों में राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल के लिए प्रावधानों की रूपरेखा भी दी गई है और राष्ट्रीय खेल बोर्ड के साथ संबद्ध इकाइयों के पंजीकरण और आवधिक अद्यतन के लिए प्रक्रियाओं को भी निर्दिष्ट किया गया है।

इन नियमों के प्रमुख प्रावधानों में से एक यह है कि राष्ट्रीय खेल निकायों की महासभाओं में कम से कम चार उत्कृष्ट खिलाड़ियों (एसओएम) को शामिल किया जाना चाहिए। महासभा में महिला एसओएम के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए, नियमों में विशेष रूप से महासभा में पचास प्रतिशत महिला एसओएम का प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रीय खेल निकायों की कार्यकारी समिति में कम से कम चार महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए नियमों में यह प्रावधान है कि प्रत्येक राष्ट्रीय खेल निकाय अपने उपनियमों के माध्यम से कार्यकारी समिति में महिलाओं के लिए विशिष्ट पद आरक्षित कर सकता है, जैसा कि राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 में अनिवार्य किया गया है।

नियमों में राष्ट्रीय खेल निकायों की महासभा और कार्यकारी समिति में एसओएम के प्रतिनिधित्व के लिए सामान्य पात्रता मानदंड और स्तरित मानदंड भी निर्धारित किए गए हैं।

एसओएम के रूप में नामित होने के लिए आवेदन करने वाले खिलाड़ियों की आयु पच्चीस वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए और उन्हें सक्रिय खेलों से सेवानिवृत्त होना चाहिए तथा आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पहले तक किसी भी ऐसी खेल प्रतियोगिता में भाग नहीं लेना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप किसी जिले, राज्य या भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयन होता हो।

नियमों में खेलों की प्रकृति और विभिन्न खेल विधाओं में भारतीय खिलाड़ियों की खेल उपलब्धियों के स्तर को ध्यान में रखते हुए, एक स्तरीय मानदंड भी निर्धारित किया गया है।

स्तरीय मानदंडों में, 10 स्तर निर्धारित किए गए हैं, जो ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों, पैरालंपिक खेलों या शीतकालीन ओलंपिक खेलों में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों से लेकर राष्ट्रीय खेलों या राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों तक हैं।

विभिन्न खेल विधाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्तरीय मानदंडों को पर्याप्त रूप से व्यापक रखा गया है।

इन नियमों में कार्यकारी समिति के चुनाव की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिसमें चुनाव के प्रत्येक चरण के लिए समयसीमा भी शामिल है, जो कि एसओएम बनने के लिए आवेदन जमा करने से लेकर चुनाव कराने, अंतिम मतदाता सूची जारी करने और नामांकन आमंत्रित करने तक की प्रक्रिया को दर्शाती है।

नियमों में राष्ट्रीय खेल निकाय की महासभा या किसी भी समिति के सदस्य होने के लिए अयोग्यताएं भी बताई गई हैं और उन्हें कार्यकारी समिति या एथलीट समिति के चुनाव में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।

नियमों में निर्धारित अयोग्यताओं में से एक यह है कि किसी अपराध के लिए न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए और कारावास की सजा पाए व्यक्ति कार्यकारी समिति या एथलीट समिति के चुनाव में भाग लेने या किसी राष्ट्रीय खेल निकाय की महासभा या किसी भी समिति के सदस्य बनने से वंचित होंगे।

नियमों में यह प्रावधान है कि राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल की सूची में हर समय कम से कम बीस सदस्य होंगे जो राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के तहत निर्दिष्ट योग्यताओं को पूरा करते हों।

चुनाव समिति से चयनित निर्वाचन अधिकारी का शुल्क राष्ट्रीय खेल निकाय द्वारा निर्वाचन अधिकारी के साथ आपसी सहमति के आधार पर तय किया जाएगा, जो अधिकतम 5 लाख रुपये तक हो सकता है, साथ ही यदि कोई उनका सहायक हो तो उसके लिए आपसी सहमति से तय की गई राशि का शुल्क भी शामिल होगा।

नियमों में यह भी प्रावधान है कि प्रत्येक राष्ट्रीय खेल निकाय अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप छह महीने की अवधि के भीतर अपने उपनियमों में संशोधन कर सकेंगे।

नियमों में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय खेल निकाय से आवेदन प्राप्त होने पर, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर बारह महीने की अवधि के लिए नियमों के प्रावधानों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।

राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियमों की अधिसूचना राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के अधिनियमन के बाद वैधानिक खेल प्रशासन ढांचे में सुचारू बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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