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केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री ने गोवा में दो दिवसीय क्षेत्रीय स्तर के सम्मेलन का 7 जनवरी को उद्घाटन किया

केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री ने गोवा में दो दिवसीय क्षेत्रीय स्तर के सम्मेलन का 7 जनवरी को उद्घाटन किया

केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री, डॉ. मनसुख मांडविया ने 7 जनवरी 2026 को गोवा में दो दिवसीय क्षेत्रीय स्तर के सम्मेलन का वर्चुअल मध्य से उद्घाटन किया। यह सम्मेलन श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा देश भर में अलग-अलग जगहों पर आयोजित किए जाने वाले छह क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला था, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा प्रमुख हितधारकों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य चार श्रम संहिताओं को सुचारू रूप से लागू करना और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ई एस आई सी), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ई पी एफ ओ) और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना (पी एम वी बी आर वाई) से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करना है।

Hon’ble Union Minister Dr. @mansukhmandviya inaugurated the two-day Regional Conference of Labour & Employment and Industry Secretaries of States/UTs via video conferencing. #LabourWelfare #MoLE pic.twitter.com/E2jK2oRfT9

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केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री ने इस सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने श्रम संहिताओं के लागू होने से पहले राज्यों द्वारा अपने मौजूदा श्रम कानूनों में संशोधन कर उन्हें नई संहिता के प्रावधानों के अनुरूप करने का काम उत्साह से करने के लिए प्रशंसा की। राज्यों का यह कदम श्रम सुधारों और कल्याण के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। श्रम से जुड़े मुद्दों की बेहतर समझ और श्रमिकों के हित पर नए सिरे से ध्यान देने के साथ, नए नियम 21 नवंबर 2025 से लागू किए गए हैं। सभी संबंधित पक्षों ने सरकार के इस फैसले का व्यापक रूप से स्वागत किया है। नए प्रावधानों में वार्षिक स्वास्थ्य जांच, जोखिमपूर्ण गतिविधियों में लगे श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज (यहां तक ​​कि एक कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों में भी), नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य करना, और ग्रेच्युटी के लिए पात्रता अवधि को पहले के पांच साल से घटाकर एक साल करने जैसे प्रमुख प्रगतिशील प्रावधानों पर ध्यान दिया गया है। इस बदलाव के बाद अब केंद्र और राज्य नए नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे, जिससे श्रमिकों के कल्याण और लाभ में निष्पक्षता और समानता को बढ़ावा मिले। इस ऐतिहासिक श्रम सुधार को ग्लोबल टाइम्स और द इकोनॉमिस्ट सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। राज्यों से यह भी आग्रह किया गया है कि आगामी चर्चा सत्रों में वे उभरती चिंताओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए भाग लें, जिससे समय पर विचार-विमर्श और श्रम नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन संभव हो सके।

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केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्रालय की सचिव सुश्री वंदना गुरनानी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि 29 मौजूदा श्रम कानूनों को तर्कसंगत बनाकर चार श्रम संहिताएं लागू की गई हैं, जिनका उद्देश्य अनुपालन को सरल बनाना और श्रमिक कल्याण को मजबूत करना है। इसमें वेब-आधारित निरीक्षण प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा दायरे के सार्वभौमिकरण जैसे कई प्रगतिशील उपाय शामिल हैं। केंद्र सरकार ने नियमों का मसौदा पहले ही 30 दिसंबर 2025 को प्रकाशित कर दिया है, जबकि जिन प्रावधानों के लिए नियमों की आवश्यकता नहीं है, उन्हें 21 नवंबर 2025 से लागू कर दिया गया है। उन्होंने राज्यों से अपने कानून विभाग से सलाह लेने के बाद जल्द से जल्द अपने संबंधित नियमों को अधिसूचित करने का आग्रह किया। कार्यान्वयन सुचारू रूप से हो सके इसके लिए मंत्रालय ने प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों की एक हैंडबुक जारी की है। वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान के माध्यम से क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है। साथ ही राज्यों के साथ साझा करने के लिए एक मसौदा निरीक्षण योजना तैयार की गई है। श्रम सुविधा और समाधान पोर्टल के माध्यम से प्रमुख डिजिटल हस्तक्षेप किए गए हैं, जिसके लिए निर्बाध API एकीकरण की आवश्यकता है। राज्यों को आगे की चर्चाओं के माध्यम से पी एम वी बी आर वाई के अंतर्गत आउटरीच में भाग लेने, दुकानों और प्रतिष्ठान अधिनियमों के साथ टकराव का समाधान करने और संहिता के तहत विस्तारित ई एस आई सी कवरेज के लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। ई एस आई सी कवरेज में किए गए बदलाव में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए भी प्रावधान शामिल हैं। ई एस आई सी में अनुबंध और आउटसोर्स श्रमिकों को भी शामिल करने की संभावना तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि मॉडल नियोक्ता का उदाहरण स्थापित किया जा सके।

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यह सम्मेलन नियमों और विनियमों पर चर्चा करने, व्यवस्थाओं में त्रुटियों और मतभेदों की पहचान करने, वैधानिक नोटिफिकेशन जारी करने में तेज़ी लाने, और बोर्ड, फंड और संबंधित संस्थागत तंत्रों के गठन पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा। चार श्रम संहिता के अंतर्गत बनाई जाने वाली योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया, साथ ही प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आई टी सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी चर्चा हुई। यह सम्मेलन क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों की क्षमता निर्माण और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों एवं अन्य संबंधित पक्षों के बीच श्रम संहिता के उद्देश्यों और कार्यान्वयन ढांचे के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

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इस सम्मेलन में केन्द्रीय श्रम मंत्रालय और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। 

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