जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल ने 17वीं ईटीएफ बैठक की अध्यक्षता की
जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल ने 17वीं ईटीएफ बैठक की अध्यक्षता की
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा गंगा नदी पुनरुद्धार के लिए एकीकृत और व्यापक ड्रेन मॉनिटरिंग डैशबोर्ड और स्मार्ट एसटीपी निगरानी तंत्र के माध्यम से नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी संचालित पहल की जा रही है
प्रौद्योगिकी आधारित नदी पुनरुद्धार कार्य को गति प्रदान करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आज अधिकार संपन्न कार्य समूह-ईटीएफ की 17वीं बैठक हुई। बैठक में नमामि गंगा कार्यक्रम के तहत आंकडों पर आधारित निर्णय लेने तथा निगरानी तंत्र और अनुपालन ढांचे मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें जल निकासी मानचित्रण और सीवेज उपचार ढांचे की बेहतर निगरानी पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी तथा विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इनमें जल संसाधन सचिव श्री वी एल कंथा राव, पेयजल एवं स्वच्छता सचिव श्री अशोक के के मीणा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन-एनएमसीजी महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल, जल संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार श्री गौरव मसालदन, एनएमसीजी के उप महानिदेशक श्री नलिन श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक श्री बृजेंद्र स्वरूप, तकनीकी कार्यकारी निदेशक श्री अनूप कुमार श्रीवास्तव; प्रशासनिक कार्यकारी निदेशक श्री एस पी वशिष्ठ, वित्त कार्यकारी निदेशक श्री भास्कर दासगुप्ता, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव श्री अनुराग श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक-उत्तर प्रदेश श्री जोगिंदर सिंह, शहरी विकास प्रधान सचिव बिहार श्री संदीप, पश्चिम बंगाल स्वच्छ गंगा राज्य मिशन की परियोजना निदेशक सुश्री नंदिनी घोष, झारखंड के परियोजना निदेशक श्री सूरज तथा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन तथा राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में केन्द्र सरकार के विद्युत मंत्रालय, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

जल शक्ति मंत्री ने प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए वर्तमान वर्ष में प्रदूषण नियंत्रण की 15 अवसंरचना परियोजनाएं पूरी होने की सराहना की और इसे गंगा पुनरुद्धार के निरंतर प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह बेहतर समन्वय, प्रभावी निगरानी और केन्द्रित कार्यान्वयन दर्शाता है, जिससे नदी के दीर्घकालिक पुनरुद्धार का मजबूत आधार तैयार हुआ है। इसमें उत्तर प्रदेश छह परियोजनाएं पूरी कर अग्रणी रहा, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल ने क्रमशः चार और तीन परियोजनाएं पूरी की। उत्तराखंड और दिल्ली ने भी एक–एक परियोजना पूर्ण की।

बैठक में उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल, पैलियो-चैनल आधारित एक्विफर मैपिंग जैसे नवीन और अनुसंधान-आधारित समाधान अपनाने, जैव उपचार और नवीन सीवरेज उपचार परियोजनाओं, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य संबंधित पहल पर जोर दिया गया। ये पहल संवहनीय और अनुकूल नदी प्रबंधन ढांचे के लिए आवश्यक हैं।
श्री पाटिल ने सभी राज्यों को राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप उपचारित जल के सुरक्षित दोबारा उपयोग नीति शीघ्रता से पूरी करने के निर्देश दिये। नीतिगत प्रावधानों, स्पष्ट निर्धारित लक्ष्यों और अनुकूल परिस्थिति निर्मित कर राज्यों में उपचारित जल के सुरक्षित दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
श्री पाटिल ने उत्तर प्रदेश में गंगा नदी की जल निकासी प्रणाली (प्राकृतिक और मानव निर्मित) मानचित्रण और विश्लेषण मॉड्यूल तथा जियोटैग्ड वीडियोग्राफी के साथ जीआईएस-आधारित विज़ुअलाइज़ेशन डैशबोर्ड विकसित करने हेतु हवाई सर्वेक्षण परियोजना के कार्यान्वयन प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नमामि गंगा परियोजना के अंतर्गत अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित समर्थन के लिए उन्नत भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के लिए इस पहल का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गंगा के मुख्य मार्ग पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन क्षमता के हवाई सर्वेक्षण पूरे हो गये हैं, जिससे सटीक भू-स्थानिक डेटासेट तैयार हुआ है। इन्हें 2डी और 3डी विज़ुअलाइज़ेशन क्षमता वाले लाइव जीआईएस-आधारित ड्रेन डैशबोर्ड में समेकित किया जा रहा है।

यह डैशबोर्ड बेसिन में प्रदूषण निगरानी, प्रदूषण के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान और निकासी के सुधार उपायों को प्राथमिकता देने में सहायक है। इस विशिष्ट पहल में लेज़र प्रकाश के उपयोग से वस्तुओं की दूरी और पर्यावरण का सटीक 3डी मानचित्र बनाने वाली एक रिमोट सेंसिंग तकनीक -लिडार प्रणाली आधारित वैज्ञानिक डेटा को ड्रोन सर्वेक्षण से प्राप्त दृश्य डेटा के साथ जोड़ा गया है। श्री पाटिल ने जिला गंगा समितियों द्वारा समय पर जमीनी स्तर पर सत्यापन, राज्यों और विभागों में बेहतर तालमेल और भागीदारी पर जोर दिया ताकि लक्षित कार्यों द्वारा निकासी आधारित प्रदूषण प्रबंधन बेहतर बनाया जा सके। यह पहल विशेष रूप से प्राथमिक नाले (प्रमुख नदियों, मुख्य सीवर लाइनों या बड़े शहरी तूफानी जल नालों से पानी एकत्र करना और उसे बाहर निकालने वाली), द्वितीयक (आवासीय क्षेत्रों, छोटे औद्योगिक पार्कों या मध्यम आकार के कृषि क्षेत्रों से जल निकासी) और तृतीयक नालों (व्यक्तिगत घरों के गटर, खेतों की सिंचाई नालियां, या सड़कों के किनारे की नालियां) और उनमें निहित प्रदूषण भार की पहचान के साथ व्यापक और सटीक डीपीआर तैयार करने में सहायक होगी।

अधिकार संपन्न कार्य समूह ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के वार्षिक लेखा-खातों को स्वीकृति दी और वित्तीय अनुशासन पर संतोष व्यक्त किया। जल शक्ति मंत्री ने लंबित उपयोग प्रमाणपत्र में कमी की भी सराहना की।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) की निगरानी और अनुपालन ढांचे को बेहतर बनाने के लिए, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) सीसीटीवी आधारित रीयल-टाइम निगरानी प्रणाली शुरू कर रहा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता-युक्त फीचर एक्सट्रैक्शन सिस्टम और केंद्रीकृत डैशबोर्ड शामिल होगा। ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएमएस) द्वारा एसटीपी की व्यापक निगरानी पहले से ही की जा रही है। यह जल नमूनों में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग-बीओडी, रासायनिक ऑक्सीजन मांग -सीओडी, घुलित ऑक्सीजन -डीओ, पानी की अम्लता या क्षारीयता – पीएच और कुल घुलित ठोस –टीएसएस जैसे प्रमुख जल गुणवत्ता मापदंडों का मापन करता है और सार्वजनिक गंगा पल्स डैशबोर्ड से एकीकृत है। यह पहल एसटीपी के प्रभावी संचालन के लिए भौतिक और दृश्य निगरानी में महत्वपूर्ण परत जोड़ती है।

श्री पाटिल ने 25 सितंबर 2025 को स्वच्छता ही सेवा के अंतर्गत राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” के शुभारंभ के बाद से एनएमसीजी द्वारा प्रति सप्ताह चलाए जा रहे नियमित स्वच्छता अभियानों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने गंगा पल्स पोर्टल द्वारा जल निकासी प्रणाली प्रदर्शन की सार्वजनिक जानकारी देने पर भी संतोष जताया। श्री पाटिल को नदी-संबंधित शहरी विकास पर केंद्रित रिवर सिटी एलायंस की गतिविधियों से अवगत कराया गया। उन्हें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, रिवर सिटीज़ अलायंस और यूएन हैबिटेट द्वारा संयुक्त रूप से एक कार्यशाला आयोजित किए जाने के बारे में भी बताया गया, जिसका उद्देश्य भारतीय शहरों को बाढ़ से निपटने, प्रकृति-आधारित समाधान अपनाने और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के लिए तैयार बनाने में मदद करना रहा।
जल शक्ति मंत्री ने बैठक का समापन करते हुए सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस तरह के समन्वित और प्रौद्योगिकी-आधारित पहल गंगा पुनरुद्धार में सहायक रहेंगी।