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लिथियम-आयन बैटरी की मांग

लिथियम-आयन बैटरी की मांग

मई 2022 में प्रकाशित नीति आयोग की रिपोर्टभारत में उन्नत रसायन सेल बैटरी का पुन: उपयोग और पुनर्चक्रणके अनुसार, 2025 तक लिथियमआयन बैटरी की अनुमानित वार्षिक मांग 40 गीगावाट (GWh) है और 2030 तक इसके लगभग 210 गीगावाट (GWh) तक पहुंचने की उम्मीद है।

भारी उद्योग मंत्रालय, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) “उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रमका संचालन कर रहा है, जिसे मई 2021 में ₹18,100 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ 50 गीगावाट (GWh) की घरेलू उन्नत रसायन सेल उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए अनुमोदित किया गया था।

पीएलआई एसीसी योजना के तहत, सरकार 50 गीगावाट एसीसी क्षमता की स्थापना में सहयोग कर रही है। पीएलआई एसीसी योजना के आवेदकों के अलावा, कम से कम 10 निर्माताओं ने अगले पांच वर्षों में देश में लगभग 178 गीगावाट की संचयी क्षमता की घोषणा की है।

पीएलआई एसीसी योजना के तहत, लाभार्थियों की अनुमानित और वर्तमान सेल निर्माण क्षमताओं का विवरण निम्नलिखित है:

 

क्रमांक

पीएलआई एसीसी योजना के अंतर्गत लाभार्थी फर्म

अनुमानित उत्पादन क्षमता (in GWh)

वर्तमान उत्पादन क्षमता  (in GWh)

1.

ACC Energy Storage Pvt. Ltd.

5

0

2

Ola Cell Technologies Pvt. Ltd.

20

1

3

Reliance New Energy Battery Storage Ltd.

5

0

4

Reliance New Energy Battery Ltd.

10

0

 

TOTAL

40

1

 

 

खान मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, खान मंत्रालय ने घरेलू अन्वेषण और विदेशी खनिज समझौतों के माध्यम से लिथियम सहित महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

 

i केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जनवरी 2025 को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) की स्थापना को मंजूरी दी, जिसके लिए वित्त वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक ₹16,300 करोड़ का वित्तीय आवंटन किया गया है। एनसीएमएम का उद्देश्य भारत की महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना और खनिज अन्वेषण, खनन, संवर्धन, प्रसंस्करण और अपशिष्ट उत्पादों से पुनर्प्राप्ति सहित मूल्य श्रृंखला के सभी चरणों को मजबूत करना है।

 

ii भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण को तेज किया। जीएसआई ने 2024-25 में देश भर में 195 महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण परियोजनाएं और 2025-26 में 230 परियोजनाएं शुरू कीं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट (एनएमईडीटी) ने 2024-25 के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण के लिए 62 परियोजनाओं और 2025-26 के दौरान 36 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

 

 

iii. खान मंत्रालय ने महत्वपूर्ण खनिजों के 34 ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की है।

 

iv. खान मंत्रालय ने अन्वेषण लाइसेंस के 7 ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की है, जिनमें से तीन महत्वपूर्ण खनिजों के हैं।

 

v खानिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (केएबीएल), जो खान मंत्रालय के तत्वावधान में एक संयुक्त उद्यम कंपनी है, ने अन्वेषण और विकास के लिए अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत में लिथियम ब्राइन के पांच ब्लॉकों का अधिग्रहण किया है।

 

vi. खान मंत्रालय महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए खनिज सुरक्षा साझेदारी (एमएसपी), भारतअमेरिका रणनीतिक खनिज पुनर्प्राप्ति पहल, इंडोपैसिफिक आर्थिक ढांचा (आईपीईएफ) और भारतयूके प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल (टीएसआई) आदि जैसे विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय मंचों में संलग्न है।

 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की  ओर से दी दी गई जानकारी के अनुसार, मंत्रालय ने अपशिष्ट बैटरियों के पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए 24 अगस्त 2022 को बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम (बीडब्ल्यूएमआर), 2022 अधिसूचित किया है। ये नियम लिथियमआयन बैटरियों सहित सभी प्रकार की बैटरियों पर लागू होते हैं। नियमों के तहत, आयातकों सहित उत्पादकों को अपशिष्ट बैटरियों के संग्रह और पुनर्चक्रण या नवीनीकरण के लिए अनिवार्य विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) लक्ष्य दिए गए हैं।

 

उत्पादकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं/मरम्मतकर्ताओं के पंजीकरण के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन ईपीआर पोर्टल विकसित किया गया है, ताकि उत्पादकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं/मरम्मतकर्ताओं के बीच ईपीआर प्रमाणपत्रों का आदानप्रदान और उत्पादकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं/मरम्मतकर्ताओं द्वारा रिटर्न दाखिल करना सुगम हो सके। अब तक, 3,391 लिथियमआयन बैटरी उत्पादक और 43 लिथियमआयन बैटरी पुनर्चक्रणकर्ता पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 की अधिसूचना के बाद से अब तक लगभग 15,370 टन लिथियमआयन बैटरी अपशिष्ट का पुनर्चक्रण किया जा चुका है।

पीएलआई एसीसी योजना तकनीकी रूप से निष्पक्ष है, जो यह सुनिश्चित करती है कि उन्नत प्रौद्योगिकियों को अधिक प्रोत्साहन मिले। यह योजना पर्याप्त निवेश आकर्षित करने, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने और एसीसी के लिए आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बनाई गई है। इसके अलावा, योजना के तहत, लाभार्थी फर्मों द्वारा अनुसंधान और विकास पर किए गए व्यय को निवेश मानदंडों को पूरा करने की अनुमति है, जिससे वे अपनी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में नवीनतम तकनीक को एकीकृत कर सकें।

यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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