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विद्युत वाहन चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार

विद्युत वाहन चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय विद्युत वाहन (ईवी) बैटरी मानकों को अधिसूचित और इन मानकों को समय-समय पर अपडेट करता है, जो इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ट्रैक्शन बैटरियों के लिए तकनीकी आवश्यकताओं को निर्धारित करने हेतु एल-श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एआईएस -156 और एम तथा एन-श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एआईएस-038  में संशोधन किया है। ये मानक दिसंबर, 2022 से लागू हैं। ईवी प्रोटोटाइप और घटकों का परीक्षण ओवर-चार्ज/डिस्चार्ज सुरक्षा, ओवर-करंट/शॉर्ट-सर्किट सुरक्षा, ओवर-तापमान सुरक्षा, वोल्टेज कट-ऑफ, बैटरी प्रबंधन प्रणाली के लिए किया जा रहा है। 

भारतीय मानक ब्यूरो ने लिथियम-आयन बैटरियों के लिए सुरक्षा मानकों को प्रकाशित किया है, जो सुरक्षा आवश्यकताओं और परीक्षण प्रोटोकॉल को निम्नलिखित रूप में निर्धारित करते हैं:

इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से प्राप्त इनपुट के अनुसार, मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहन उप-प्रणाली विकास कार्यक्रम के तहत, इलेक्ट्रिक वाहनों के विभिन्न खंडों को लक्षित करते हुए मोटर/कंट्रोलर/कनवर्टर/चार्जर/बैटरी प्रबंधन प्रणाली  जैसी विद्युत वाहन उप-प्रणालियों के स्वदेशी विकास के लिए अनुसंधान एवं विकास के लिए पहल की है। इस कार्यक्रम के तहत, विद्युत वाहनों के लिए बैटरी प्रबंधन प्रणाली  और एसी/डीसी चार्जर के विकास के लिए अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएँ भी शुरू की गई हैं।

फेम-II योजना के तहत, विद्युत वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 912.50 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा, पूरे देश के लिए ईवी चार्जिंग अवसंरचना की तैनाती के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 2,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

विद्युत मंत्रालय ने एक संयोजित और अंतःप्रचालनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम को गति देने के लिए जनवरी, 2025 में दिशानिर्देश जारी किए हैं।

बीएचईएल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश में स्थापित कुल ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या 29,151 है, जिनमें से 12,033 तेजी से चार्ज करने वाले चार्जर स्थापित किए गए हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय की पीएलआई एसीसी योजना के तहत, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल  के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 18,100 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य 7 वर्षों की अवधि में भारत में 50 गीगावाट घंटा की एसीसी विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है।

भारी उद्योग राज्यमंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

  1. आईएस 18237: 2023: परिवहन के दौरान प्राथमिक और द्वितीयक लिथियम सेल और बैटरियों की सुरक्षा।
  2. आईएस 16893 (भाग 2):2018: विद्युत सड़क वाहनों के संचालक शक्ति के लिए द्वितीयक लिथियम-आयन सेल: भाग 2 विश्वसनीयता और दुरुपयोग परीक्षण।
  3. आईएस 16893 2018 (भाग 3): विद्युत सड़क वाहनों के संचालक शक्ति के लिए द्वितीयक लिथियम-आयन सेल: भाग 3 सुरक्षा आवश्यकताएँ।
  4. आईएस 16805: 2018: क्षारीय या अन्य गैर-अम्लीय इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त द्वितीयक सेल और बैटरियाँ – औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोग के लिए द्वितीयक लिथियम सेल और बैटरियों के लिए सुरक्षा आवश्यकताएँ।
  5. आईएस 16046 (भाग  2):2018: क्षारीय या अन्य गैर-अम्लीय इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त द्वितीयक सेल और बैटरियाँ – पोर्टेबल अनुप्रयोगों में उपयोग के लिए पोर्टेबल सीलबंद द्वितीयक सेल और उनसे बनी बैटरियों के लिए सुरक्षा आवश्यकताएँ भाग 2 लिथियम सिस्टम।

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