संसद प्रश्न: उद्योगों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
संसद प्रश्न: उद्योगों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
इसरो भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कई आवश्यक अनुसंधान एवं विकास गतिविधियाँ करने के अलावा बहुत सारी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण कर रहा है। इनमें शामिल हैं: स्टेज रिकवरी और पुन: उपयोग, एलओएक्स–मीथेन इंजन, एयर ब्रीदिंग/हाइब्रिड प्रणोदन, उन्नत सामग्री और निर्माण, उन्नत जड़त्वीय प्रणालियाँ, कम लागत वाले उपग्रह, उपग्रह नेटवर्क का इंटर–लिंकिंग, ऑन–ऑर्बिट सर्विसिंग, डॉकिंग, चंद्र नमूना वापसी, क्वांटम संचार, इलेक्ट्रिक प्रणोदन, उन्नत वैज्ञानिक उपकरण, अंतरिक्ष आधारित निगरानी, परमाणु घड़ी, संचार उपकरणों के लिए ट्रैवलिंग वेव ट्यूब एम्पलीफायर, निरंतर मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रौद्योगिकी जैसे पुनर्योज्य जीवन सहायता प्रणाली, रेंज़देवस और डॉकिंग, फुलाया जाने वाला आवास, मानव कारक और इंजीनियरिंग अध्ययन आदि।
इसरो, एनएसआईएल और आई इन –एसपीएसी इ के साथ मिलकर भारतीय उद्योगों के विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक नवीन प्रौद्योगिकियों के अधिकतम हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए कई सक्रिय उपाय कर रहा है। इसमें तकनीकी आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय विकास को बल मिलेगा। इस संदर्भ में, इन–स्पेस और एनएसआईएल ने पहल की है कि वे अपने वेब पोर्टल(s) पर ऐसी सभी इसरो प्रौद्योगिकियों की सूची प्रकाशित करें जो भारतीय उद्योगों (स्टार्टअप सहित) को हस्तांतरित की जा सकती हैं। इसके साथ ही, इन–स्पेस की विभेदित मूल्य निर्धारण नीति के तहत सभी प्रकार के उद्योगों जैसे स्टार्टअप, एमएसएमई, शैक्षणिक संस्थान आदि को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शुल्क में 30% की छूट भी दी जा रही है।विभाग ने नई प्रौद्योगिकी हस्तांतरण दिशानिर्देश तैयार किए हैं और उसे सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के लिए भेजा गया है।