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संसद प्रश्न: मौसम और जलवायु सेवाएं

संसद प्रश्न: मौसम और जलवायु सेवाएं

मौसम विभाग (आईएमडी) ने समयसमय पर खराब मौसम की घटनाओं का पता लगाने, निगरानी करने और समय पर पूर्व चेतावनी जारी करने के लिए नई तकनीकों और प्रौद्योगिकियों को अपनाया है। मौसम विभाग ने देश में अवलोकन, डेटा आदानप्रदान, निगरानी एवं विश्लेषण, पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं के लिए अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है। मंत्रालय मौसम पूर्वानुमान में अधिक सटीकता प्राप्त करने के लिए अवलोकन क्षमताओं और अनुसंधान एवं विकास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मौसम विभाग लगातार जनता और सम्‍बंधित हितधारकों के लिए समय पर चेतावनी और पूर्वानुमान जारी करता है। संभावित रूप से प्रभावित होने वाली आबादी तक चेतावनियों का प्रभावी प्रसार सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं।

सरकार द्वारा शुरू की गई प्रमुख नई पहलमिशन मौसमका हिस्‍सा है। इस मिशन के तहत कुछ डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) स्थापित किए जा चुके हैं। वर्तमान में, भारत भर में 47 रडार कार्यरत हैं, इनके तहत देश के कुल क्षेत्रफल का 87 प्रतिशत भाग रडार कवरेज के अंतर्गत आता है। आने वाले वर्षों में, देश के शेष क्षेत्रों को कवर करने, अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने और डीडब्ल्यूआर नेटवर्क में पुराने रडारों को बदलने के लिए आवश्यकतानुसार डीडब्ल्यूआर स्थापित किए जाएंगे। यह कार्य मौसम मंत्रालय केमिशन मौसमके अंतर्गत किया जा रहा है। उन्नत मौसम पूर्वानुमान मॉडलभारत पूर्वानुमान प्रणाली (भारतएफएस)विकसित किया गया है और यह 6 किमी के उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन पर कार्यरत है। इसमें 10 दिनों तक की वर्षा की घटनाओं का पूर्वानुमान प्रदान करने की क्षमता है, जिसमें अल्प और मध्यम अवधि के पूर्वानुमान शामिल हैं। अपने उच्च रिज़ॉल्यूशन और बेहतर कार्यप्रणाली के कारण, यह पंचायत या पंचायतों के समूह स्तर पर मौसम पूर्वानुमान उत्पन्न करता है। मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता में सुधार के लिए उन्नत अवलोकन नेटवर्क, संख्यात्मक मॉडल के अनुसंधान और विकास के लिए कुशल मानव संसाधन और इन मॉडलों को आवश्यक रिज़ॉल्यूशन पर चलाने के लिए उच्चप्रदर्शन कंप्यूटिंग सिस्टम जैसे मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।

वर्तमान में मौसम विभाग एक निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) पर आधारित वास्तविक समय बहुखतरा प्रभाव आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (ईडब्ल्यूएस) से लैस है। यह सभी प्रकार के वास्तविक समय और ऐतिहासिक डेटा, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान उत्पादों आदि को एकीकृत करती है। यह प्रणाली भारी वर्षा, सूखा आदि जैसी सभी प्रकार की चरम मौसम घटनाओं की प्रभावी ढंग से निगरानी, ​​​​पता लगाने और समय पर पूर्वानुमान प्रदान करने के साथसाथ जिलों और शहरों/स्टेशनों के स्तर तक सुझाए गए कार्यों के साथ प्रभावआधारित चेतावनी प्रदान करती है। प्रत्येक राज्य में मौसम विभाग के मौसम केंद्र (एमसी) हैं और प्रत्येक प्रभावित राज्य के लिए चक्रवात चेतावनी केंद्र जैसे विशेष केंद्र भी उपलब्ध हैं, जो चक्रवात और भारी वर्षा के मौसम में चौबीसों घंटे सेवाएं प्रदान करते हैं। इन नई पहलों के परिणामस्वरूप, पिछले 10 वर्षों में इन गंभीर मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान की समग्र क्षमता में 30-40 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

मौसम विभाग, वेबसाइट, ईमेल, मोबाइल ऐप, एसएमएस और यूट्यूब, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूर्वानुमान और चेतावनियां प्रसारित करता है। एनडीएमए द्वारा विकसित कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल (सीएपी) को भी मौसम विभाग की चेतावनियों के प्रसार के लिए लागू किया जा रहा है।

मौसम विभाग ने मौसम सम्बंधी चेतावनियों के प्रसार के लिए विभिन्न मोबाइल ऐप विकसित किए हैं, जैसे

जलवायु परिवर्तन से जुड़ी मौसम घटनाओं के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए मौसम विभाग  अपने निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत और आधुनिक बना रहा है। इस सम्बंध में किए गए ये नए प्रयास, प्रगति और उपलब्धियां पहले ही उत्तर () से () में सूचीबद्ध हैं।

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