रायगढ़ मत्स्य सहकारी समितियों की एफएफपीओ में रूपांतरण की प्रगति
रायगढ़ मत्स्य सहकारी समितियों की एफएफपीओ में रूपांतरण की प्रगति
राष्ट्रीय सहकारिता नीति (NCP) 2025 में प्राथमिक मात्स्यिकी सहकारी समितियों के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है, मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) योजना के तहत राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के माध्यम से, वर्ष 2024-25 से 2028-29 के दौरान 6,000 नई मात्स्यिकी सहकारी समितियों (FCS) के गठन की सुविधा प्रदान कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य नवगठित मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्थापना, रखरखाव और सदस्यों के प्रशिक्षण के लिए तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करना है । रायगढ़ जिले में, वर्ष 2024-25 के दौरान, 18 नई मात्स्यिकी सहकारी समितियों का गठन किया गया है और प्रत्येक को तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) सभी तटीय राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में PMMSY के केंद्रीय क्षेत्रक घटक के अंतर्गत FFPOs के रूप में 1,000 प्राथमिक मात्स्यिकी सहकारी समितियों (PFCS) को सुदृढ़ करने के लिए एक कार्यान्वयन एजेंसी भी है। इस पहल के अंतर्गत, NCDC ने रायगढ़ जिले में FFPOs के रूप में 18 PFCS को सशक्त किया है।
नीली क्रांति के तहत NFDB ने मत्स्य पालन विभाग के समन्वय से वर्ष 2016 से 2020 तक एक कार्य योजना तैयार की थी – “मिशन ब्लू रिवोल्यूशन: एकीकृत राष्ट्रीय मत्स्य पालन”, जिसमें महाराष्ट्र को एकीकृत राष्ट्रीय मत्स्य कार्य योजना के अंतर्गत शामिल किया गया था:
योजना के कार्यान्वयन की समय-सीमा 5 वर्ष थी, और मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने कुल 8,853.00 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया था। PMMSY के अंतर्गत, महाराष्ट्र को कुल 345.00 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा आबंटित किया गया था।
इस बजट ने मछली उत्पादन और निर्यात को काफी बढ़ावा दिया था, मूल्य श्रृंखलाओं को सशक्त किया था और मछुआरों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ाया था, जिससे महाराष्ट्र राज्य में नीली अर्थव्यवस्था में परिवर्तन हुआ था । रायगढ़ से संबंधित ब्योरे संबंधित राज्य मत्स्य विभाग द्वारा रखे गए थे।
मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के माध्यम से, मात्स्यिकी पालन क्षेत्र को सशक्त करने और वास्तविक मछुआरा समुदायों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू कर रहा है ।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
- अन्तर्देशीय क्षेत्र में, मछली उत्पादन को 1.66 लाख मीट्रिक टन के तत्कालीन स्तर से बढ़ाकर सालाना 2.56 लाख मीट्रिक टन करने के लिए 0.72 लाख हेक्टेयर पर तालाब बनाए गए थे, जिसमें 48 कार्प हैचरीज़ की स्थापना की गई और 5,760 लाख फिंगरलिंग्स के उत्पादन के लिए 1,650 हेक्टेयर पालन क्षमता का निर्माण किया गया।
- समुद्री क्षेत्र में, संभावित मत्स्य संसाधनों, पारंपरिक फिशिंग की स्थिति, और यंत्रीकरण में विकासात्मक कार्यकलापों, फिशिंग हार्बर बंदरगाहों के निर्माण और अन्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
- स्थायी समुद्री मात्स्यिकी संसाधनों के लिए ट्रॉलरों/पुरानी फिशिंग नौकाओं के स्थान पर गहरे समुद्र फिशिंग वाले जहाजों का उपयोग किया गया है।
- खारा जलीय क्षेत्र, 10 झींगा-हैचरी, 01 सी-बास हैचरी और मड-क्रैब के लिए 100 हेक्टेयर ग्रो-आउट तालाबों का निर्माण किया गया था। इसके अतिरिक्त, 250 खुले समुद्री पिंजरे स्थापित किए गए थे।
- फिश हार्बर बंदरगाहों और मत्स्य लैंडिंग केंद्रों जैसी फसल पश्चात अवसंरचना सुविधाओं का निर्माण किया गया था।