ट्राई ने स्पैम और साइबर धोखाधड़ी के मुद्दों पर नियामकों की संयुक्त समिति की बैठक बुलाई
ट्राई ने स्पैम और साइबर धोखाधड़ी के मुद्दों पर नियामकों की संयुक्त समिति की बैठक बुलाई
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज नई दिल्ली में नियामकों की संयुक्त समिति (जेसीओआर) की बैठक आयोजित की, जिसका उद्देश्य स्पैम, धोखाधड़ी और दूरसंचार बुनियादी ढांचे के दुरुपयोग के खिलाफ समन्वित उपायों को आगे बढ़ाना था। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी, आईआरडीएआई, पीएफआरडीए और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ दूरसंचार विभाग (डीओटी), गृह मंत्रालय (एमएचए) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के अधिकारी भी शामिल हुए। फोरम ने विशेष रूप से बढ़ती डिजिटल भुगतान से जुड़ी धोखाधड़ी के आलोक में सहयोगी नियामक उपायों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया।
प्रमुख परिणाम:
नियामकों ने बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्रों में लेन-देन और सर्विस कॉल के लिए समर्पित 1600 नंबर श्रृंखला में माइग्रेशन के लिए समय-सीमा निर्धारित करने पर चर्चा की। संस्थाओं के संचालन के विभिन्न पैमानों को ध्यान में रखते हुए, यह सहमति हुई कि क्षेत्रीय नियामकों द्वारा ट्राई को प्रदान किए गए इनपुट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से माइग्रेशन किया जा सकता है।
वाणिज्यिक संचार के लिए अपुष्ट और ऑफलाइन सहमति को एक सुरक्षित डिजिटल सहमति ढाँचे के साथ बदलकर वाणिज्यिक संचार पर उपभोक्ता नियंत्रण बढ़ाने के लिए एक प्रमुख पायलट परियोजना चल रही है। नई व्यवस्था उपभोक्ताओं को एक सरल, एकीकृत और टैम्पर-प्रूफ इंटरफेस के माध्यम से डिजिटल रूप से पंजीकरण करने, समीक्षा करने और सहमति रद्द करने में सक्षम बनाएगी। ट्राई और आरबीआई द्वारा समन्वित इस पायलट परियोजना में दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) और एसबीआई, पीएनबी, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं। चार समर्पित कार्य समूह इस पायलट परियोजना के तकनीकी, परिचालन और जागरूकता निर्माण पहलुओं की देखरेख करेंगे।
जेसीओआर की बैठक से पहले, 21 जुलाई, 2025 को ट्राई और आरबीआई द्वारा संयुक्त रूप से डीसीए पायलट पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें 8 दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और 7 बैंकों एसबीआई, पीएनबी, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने भाग लिया। डिजिटल सहमति प्राप्ति से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया और सभी प्रतिभागियों ने आगे बढ़ने के लिए निरंतर रूप से मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
समिति ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी), दूरसंचार विभाग (डीओटी) के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म और एक्सेस प्रदाताओं द्वारा बनाए गए डीएलटी प्लेटफॉर्म के बीच स्पैम और साइबर धोखाधड़ी डेटा के स्वचालित आदान-प्रदान की आवश्यकता पर चर्चा की। इससे धोखेबाजों के दूरसंचार संसाधनों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव होगी जैसे कि नंबर डिस्कनेक्शन – ताकि उन्हें आगे धोखाधड़ी करने से रोका जा सके।
समिति ने बल्क स्पैम के लिए एसआईपी और पीआरआई दूरसंचार लाइनों के दुरुपयोग की ओर ध्यान दिलाया। विचाराधीन विकल्पों में इन लाइनों को निर्दिष्ट संख्या सीमा से जारी करना तथा जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करना शामिल है।
ट्राई ने अपने एसएमएस हेडर पोर्टल smsheader.trai.gov.in को नया रूप दिया है, ताकि ग्राहक किसी विशेष एसएमएस हेडर का उपयोग करके वाणिज्यिक संदेश भेजने वाली संस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
मोबाइल लेनदेन और यूपीआई प्लेटफॉर्म से जुड़ी वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए, एनपीसीआई को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने से जेसीओआर के कार्यक्षेत्र में भुगतान संबंधी एक महत्वपूर्ण आयाम जुड़ गया है।
ट्राई के चेयरमैन का संदेश
ट्राई के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार लाहोटी ने कहा, “तेजी से डिजिटल होते जा रहे विश्व में सेवाओं की समन्वित सक्षमता और उपभोक्ताओं को नुकसान से बचाने के लिए नियामकों के बीच अंतर-क्षेत्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है। डिजिटल फर्स्ट अर्थव्यवस्था में वित्तीय क्षेत्र के नियामकों, डिजिटल संचार नियामकों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग सर्वोपरि हो जाता है। ट्राई एक विश्वसनीय और सुरक्षित संचार वातावरण के निर्माण में जेसीओआर के माध्यम से तेजी से सहयोग की सराहना करता है।”
उन्होंने दूरसंचार विभाग द्वारा हाल ही में लांच किए गए वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई) की भी सराहना की, जो वित्तीय घोटालों से जुड़े आंकड़ों को दर्शाता है। ट्राई के चेयरमैन ने वैध व्यवसायों पर अनुचित बोझ डाले बिना स्पैम और धोखाधड़ी को रोकने के लिए व्यावहारिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को दोहराया। उन्होंने क्षेत्रीय नियामकों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यान्वयन में तेजी लाएँ और प्रगति की बारीकी से निगरानी करें।
- वाणिज्यिक कॉल के लिए 1600 नंबर सीरीज को अपनाने पर जोर