“पुस्तकें मस्तिष्क को आलोकित करती हैं, समाज की अंतरात्मा को आकार देती हैं एवं बौद्धिक रूप से एक प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण करती हैं,” असम पुस्तक मेले में सर्बानंद सोनोवाल
“पुस्तकें मस्तिष्क को आलोकित करती हैं, समाज की अंतरात्मा को आकार देती हैं एवं बौद्धिक रूप से एक प्रगतिशील राष्ट्र
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