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150-परियोजना समुद्री स्प्रिंट की समय सीमा

150-परियोजना समुद्री स्प्रिंट की समय सीमा

मंत्रालय  सुनिश्चित करता है कि जहाज निर्माण, अंतर्देशीय जलमार्ग, जहाजरानी पर्यटन और डिजिटल परिवर्तन जैसी परियोजनाएँ   के साथ, समुद्री भारत दृष्टिकोण 2030 और अमृत काल दृष्टिकोण 2047 के माध्यम से संतुलित विकास है। सागरमाला और समर्पित निगरानी प्रकोष्ठ तथा समुद्री राज्य विकास परिषद, प्रमुख और राज्य-संचालित बंदरगाहों के साथ-साथ अंतर्देशीय जलमार्गों में समान वितरण का कार्य कर रहे हैं।

चिंतन शिविर की रूपरेखा एक परामर्शदात्री और रणनीतिक मंच के रूप में तैयार की गई है जहाँ विभाग की प्राथमिकताएँ निर्धारित करने और प्रगति की समीक्षा करने के लिए विचार-विमर्श किया जाता है। सरकार के पास पारदर्शिता और परियोजनाओं तथा क्षेत्रों के लिए संसाधनों के समान आवंटन सुनिश्चित करने के लिए कई  तरीके हैं।

जहाज निर्माण और समुद्री परियोजनाओं से संबंधित जोखिमों को कम करने के लिए मंत्रालय ने एक स्तरित वित्तीय सहायता रूपरेखा तैयार की है। समुद्री निवेश कोष (एमआईएफ) जोखिम कम करने के लिए परियोजनाओं को न्यायसंगत सहायता प्रदान करता है, जबकि ब्याज प्रोत्साहन कोष (आईआईएफ) जहाजों के मरम्मत करने की जगह (शिपयार्ड )के लिए उधार लेने की लागत कम करता है। इसके अलावा, जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस) हरित और विशिष्ट जहाजों के लिए उच्च प्रोत्साहन प्रदान करती है, जो उनकी उच्च अग्रिम लागतों की सीधे भरपाई करती है।

यह जानकारी केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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