Thursday, January 8, 2026
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सी एस आई आर – एन आई एस सी पी आर, आई आई टी इंदौर और आई आई टी जोधपुर ने संयुक्त रूप से तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया

सी एस आई आर – एन आई एस सी पी आर, आई आई टी इंदौर और आई आई टी जोधपुर ने संयुक्त रूप से तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया

तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठीअभ्युदय-3” का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आई आई टी) इंदौर में आयोजन किया गया। आज इस दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन हुआ। इस संगोष्ठी का आयोजन संयुक्त रूप से आई आई टी इंदौर, आई आई टी जोधपुर और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषदराष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सी एस आई आरएन आई एस सी पी आर) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इस संगोष्ठी का उद्देश्य तकनीकी हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और समाज के व्यापक वर्गों तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी की पहुँच को मजबूत करना है।

उद्घाटन सत्र में, संगोष्ठी स्मारिका और अन्य प्रकाशन जारी किए गए। आई आई टी इंदौर के निदेशक ने तकनीकी हिंदी के महत्व, प्रभावी विज्ञान संचार की भूमिका और अनुसंधान और नवाचार को आम जनता से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सी एस आई आरएन आई एस सी पी आर के मुख्य वैज्ञानिक श्री सी. बी. सिंह ने तकनीकी हिंदी के विकास, प्रभावी विज्ञान संचार के महत्व और अनुसंधान एवं नवाचार को समाज के बड़े तबकों तक ले जाने की आवश्यकता पर बाल दिया। उन्होंने हिंदी भाषा में वैज्ञानिक ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने में सी एस आई आरएन आई एस सी पी आर के योगदान और लगातार प्रयासों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें 1952 से लोकप्रिय हिंदी विज्ञान पत्रिकाविज्ञान प्रगतिका प्रकाशन भी शामिल है।

श्री सिंह ने कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के बीच एक सशक्त सेतु बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं, और वैज्ञानिक विचारों को आम लोगों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाने का एक प्रभावशाली माध्यम बनते हैं।

संगोष्ठी में विज्ञान, अभियांत्रिकी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा वक्तव्य दिए गए। दो सत्र, पत्र प्रस्तुति के भी हुए, जिसमें 25 प्रतिभागियों ने हिंदी भाषा में अपने अनुसंधान और विचार साझा किए।

संगोष्ठी के पहले दिन एक सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें पद्म श्री भेरू सिंह चौहान ने लोकगीत पेश किए। इसके बाद एक विज्ञान कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें देश के अलगअलग हिस्सों से आए विज्ञान कवियों ने कविता के माध्यम से विज्ञान, प्रद्योगिकी, नवाचार और सामाजिक चिंताओं जैसे विषयों को अभिव्यक्त किया। यह विज्ञान और समाज के बीच एक सार्थक सेतु का माध्यम बना। जानेमाने लेखक और विज्ञान संचार विशेषज्ञ श्री संतोष चौबे ने विज्ञान कवि सम्मेलन सत्र की अध्यक्षता की।

विज्ञान मनोवादी श्री हरीश यादव ने एक बहुत ही दिलचस्प और मनोरंजक विज्ञान मैजिक शो की प्रस्तुति दी। यह संगोष्ठी 6 जनवरी 2026 को आमंत्रित वक्तव्य और समापन सत्र के साथ समाप्त हुआ।

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