सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने अपना 5वां स्थापना दिवस मनाया; भारत के पारंपरिक ज्ञान के बहुभाषी प्रसार के लिए स्वस्तिक पोर्टल का शुभारम्भ
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने अपना 5वां स्थापना दिवस मनाया; भारत के पारंपरिक ज्ञान के बहुभाषी प्रसार के लिए स्वस्तिक पोर्टल का शुभारम्भ
नई दिल्ली, 14 जनवरी 2026 : सीएसआईआर – राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) ने अपना 5वां स्थापना दिवस मनाया। इस आयोजन में क्षेत्रीय भाषाओं में संचार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग करने और वैश्विक स्तर पर देश के विज्ञान नीति अनुसंधान को आगे बढ़ाने के प्रति एनआईएससीपीआर की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया।

सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने अपने स्वागत भाषण में इस संस्थान की विज्ञान संचार की मजबूत विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमें वैश्विक संस्थानों के साथ जुड़ने की जरूरत है। हम क्षेत्रीय भाषाओं में संचार के लिए एआई का उपयोग करने के तरीकों पर काम कर रहे हैं।”
सीएसआईआर-पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (टीकेडीएल) इकाई की प्रमुख डॉ. विश्वजननी जे. सत्तिगेरी ने टीकेडीएल की वैश्विक मान्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “पारंपरिक ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है, और हम एकमात्र ऐसी प्रयोगशाला हैं जो पारंपरिक ज्ञान का प्रमाणीकरण करती है। एनआईएससीपीआर में नीति अनुसंधान की अपार संभावनाएं हैं—पहले, हमारे नीति दस्तावेज का विमोचन पूर्व राष्ट्रपति ने किया था। टीकेडीएल अब पूरी तरह से डिजिटल है, इसलिए हम अधिक प्रासंगिक उपकरणों पर शोध कर सकते हैं।”
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते एएनआरएफ के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन
इस कार्यक्रम में भारत सरकार के अनुसंधान राष्ट्रीय शोध संस्थान (एएनआरएफ) के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने मुख्य अतिथि के रूप में एक विशिष्ट व्याख्यान भी दिया। उन्होंने देश को अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में विकसित करने के एएनआरएफ के दृष्टिकोण के साथ एनआईएससीपीआर के तालमेल की सराहना की। उन्होंने कहा, ” वैश्विक स्तर पर एनआईएससीपीआर के विस्तार करने के विचार की मैं प्रशंसा करता हूं—हमें वैश्विक स्तर पर सोचना होगा। एनआईएससीपीआर सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए नीतियों का उपयोग करता है, हमें विश्व स्तरीय बनना होगा और संस्थान में ऐसा करने की क्षमता है। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को एआई विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और हम नए प्रारूपों को विकसित करने में एनआईएससीपीआर के साथ साझेदारी कर सकते हैं।”
डॉ. कल्याणरमन ने एनआईएससीपीआर को एएनआरएफ के सरल एआई टूल का उपयोग करने का सुझाव भी दिया ताकि शोध को सरल बनाया जा सके और सोशल मीडिया के माध्यम से इसके प्रभाव को बढ़ाया जा सके।
इस अवसर पर अतिथि डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन, सीईओ, एएनआरएफ ने स्वास्तिक वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। स्वास्तिक (वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित सामाजिक पारंपरिक ज्ञान) प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा कार्यान्वित एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पारंपरिक ज्ञान को समाज तक पहुंचाना है। इसका प्रसार स्वास्तिक चैनलों के माध्यम से अंग्रेजी और 19 भारतीय भाषाओं के साथ-साथ 5 विदेशी भाषाओं में किया जा रहा है।
यह वेब पोर्टल न केवल सभी स्वास्तिक सामग्री को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा, बल्कि देश के वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पारंपरिक ज्ञान के साथ विभिन्न हितधारकों की पहुंच, सुगमता और निरंतर जुड़ाव को भी मजबूत करेगा।
पोस्टर प्रस्तुति सत्र के दौरान अपने अध्ययन की व्याख्या करते एनआईएससीपीआर के पीएचडी छात्र और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परियोजना के कर्मचारी
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर फाउंडेशन दिवस कार्यक्रम की अध्यक्ष और वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कनिका मलिक ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पीएचडी छात्रों और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परियोजना के कर्मचारियों की पोस्टर प्रस्तुति भी शामिल है।
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर विज्ञान संचार, नीति अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान सत्यापन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जिससे भारत वैश्विक नवाचार में एक अग्रणी देश के रूप में उभर रहा है।