सारस–2026 प्रदर्शनी का उद्घाटन 8 जनवरी 2026 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर में होगा
सारस–2026 प्रदर्शनी का उद्घाटन 8 जनवरी 2026 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर में होगा
ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने मीडिया को सारस मेला 2026 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश के गुंटूर में 6 से 18 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित सारस मेला आयोजित किया जाएगा जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने बताया कि इस मेले में देश के सभी राज्यों के महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) अपनी शिल्पकारी और उद्यमशीलता का प्रदर्शन करने के लिए एक साथ आएंगे।

मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि यह मेला आंध्र प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों के विकास (डीडब्ल्यूसीआरए) से जुड़ी महिलाओं का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए यह मेला राष्ट्रीय और वैश्विक मानकों को समझने, नए उत्पाद विकल्पों का पता लगाने और अपने व्यवसायों को बढ़ाने में मददगार आधुनिक विपणन रणनीतियों को सीखने का एक अनूठा अवसर है।
राष्ट्रीय स्तर की इस 13 दिवसीय प्रतिष्ठित सारस–2026 प्रदर्शनी का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के गुंटूर में 8 जनवरी 2026 की शाम 4:00 बजे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री करेंगे। इस अवसर पर संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी चंद्रशेखर उपस्थिति रहेंगे।

पहली बार गुंटूर में इतने बड़े पैमाने पर किसी आयोजन की मेजबानी की जा रही है, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका पहल को जिले में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 13 दिनों तक चलने वाले इस मेले में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए एक मंच प्रदान करके उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा।
सारस मेला एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य स्थायी आजीविका के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों का आर्थिक सशक्तिकरण करना है । इस मेले में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 300 महिला कारीगर और उद्यमी भाग लेंगी , जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी।

इस मेला में बांस से बने उत्पादों, पोचमपल्ली एवं गडवाल बुनाई जैसे हथकरघा और वस्त्रों, पारंपरिक आभूषणों, हस्तशिल्प, गृह सज्जा की वस्तुओं, जूट और पर्यावरण के अनुकूल अन्य उत्पादों सहित विभिन्न प्रकार के प्रामाणिक हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक और शिल्प विविधता प्रदर्शित की जाएगी। आगंतुक अखिल भारतीय स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) फूड कोर्ट में देश के समृद्ध खान-पान का भी आनंद ले सकेंगे। मेले में रायलसीमा व्यंजन, मदुगुला हलवा, भीमिली थंद्रा और अत्रेयपुरम पूथारेकुलु जैसे क्षेत्रीय व्यंजन परोसे जाएंगे।
मेले में हर शाम सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें बच्चों के लिए विशेष आकर्षण होंगे। इस कार्यक्रम में अंतर-राज्यीय, राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी ।
इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों के लिए प्रमुख आजीविका विषयों पर विशेषज्ञ संरचित क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। एक समर्पित लखपति दीदी पवेलियन में महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें जिलेवार भागीदारी और विविध आजीविका गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जाएगी।

सुरक्षा और मेले का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम स्थल पर 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से 24×7 निगरानी रखी जाएगी। इसके साथ ही तीन कार्यालय पालियों (शिफ्टों) में चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। कार्यक्रम की पूरी अवधि के दौरान, इसमें भाग लेने वाले स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों को निःशुल्क आवास, भोजन और परिवहन की सुविधा प्रदान की जाएगी।
सारस–2026 का आयोजन जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) और ग्रामीण गरीबी उन्मूलन समिति (एसईआरपी) के समन्वय से गुंटूर जिला समाख्या कर रहा है। मेले का आयोजन रेड्डी कॉलेज के सामने स्थित खुले मैदान, आदर्श नगर, नरसाराओपेट रोड, गुंटूर में होगा। सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश निःशुल्क है ।