Wednesday, January 28, 2026
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सांस्कृतिक धरोहर और संग्रहालयों का डिजिटलीकरण

सांस्कृतिक धरोहर और संग्रहालयों का डिजिटलीकरण

सरकार सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संग्रहालयों के डिजिटलीकरण और सांस्कृतिक प्रसार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संवर्धित वास्तविकता और अन्य उन्नत तकनीकों के उपयोग को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। इनसे संबंधित विभिन्न पहलों में राष्ट्रीय संस्मारक एवं पुरावशेष मिशन (एनएमएमए), संग्रहालय डिजिटलीकरण पहल, वर्चुअल रियलिटी (वीआर) और संवर्धित वास्तविकता (एआर) आदि का उपयोग करके इमर्सिव विज़िटर एक्सपीरियंस शामिल हैं। पर्यटकों के देखने के अनुभव को बेहतर बनाने और इसे बढ़ाने के लिए संस्कृति मंत्रालय के तहत विभिन्न संग्रहालयों में एआर-वीआर, प्रोजेक्शन, डिजिटल कियोस्क आदि जैसी आधुनिक डिजिटल तकनीकों को अपनाया गया है। संस्कृति मंत्रालय अपने संग्रहालयों में प्रदर्शित विभिन्न कलाकृतियों के डिजिटलीकरण के लिए ‘’जतन’’ नामक एक सॉफ्टवेयर का भी उपयोग कर रहा है।

अब तक राष्ट्रीय स्तर के 8 प्रसिद्ध संग्रहालयों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 2 संग्रहालयों को जतन सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल किया गया है। अब तक डिजिटाइज की गई कलाकृतियों को निम्नलिखित लिंक: https:// www.museumsofindia.gov.in/repository पर देखा जा सकता है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग का उद्देश्य “ट्यूलिप” के माध्यम से वंचित कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने एवं विक्रय के लिए उन्हें ई-मार्केटिंग के माध्यम से एक वैश्विक मंच प्रदान करना है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण वर्तमान में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में अवस्थित खजुराहो में विंध्य क्षेत्र में एक पुरातत्व संग्रहालय का अनुरक्षण करता है। संग्रहालय को हाल ही में वर्ष 2023 में नई प्रदर्शन दीर्घाओं को जोड़ने और जनता के देखने के लिए और अधिक पुरावशेषों को शामिल करने के साथ उन्नत किया गया है।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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