“सस्टेनिंग इनोवेशन: एम्बेडिंग आरएंडडी इन स्टेट इंस्टीट्यूशंस” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला 8-9 जनवरी 2026 को अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर में आयोजित की गई
“सस्टेनिंग इनोवेशन: एम्बेडिंग आरएंडडी इन स्टेट इंस्टीट्यूशंस” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला 8-9 जनवरी 2026 को अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर में आयोजित की गई
नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी की अध्यक्षता में 8 और 9 जनवरी 2026 को “सस्टेनिंग इनोवेशन: एम्बेडिंग आरएंडडी इन स्टेट इंस्टीट्यूशंस” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की मेजबानी अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर द्वारा तमिलनाडु राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से की गई। इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रमुखों, राज्य विभागों के योजना सचिवों, उद्योग जगत के प्रमुखों और राज्य परिषदों के सचिवों ने भाग लिया। इन सभी विशेषज्ञों ने भारत के स्टेट इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए गहन विचार-विमर्श किया। नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने अपने विशेष संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में राज्य संस्थानों को अब और अधिक बड़ी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने विशेष रूप से राज्यों में अनुसंधान, विकास और नवाचार क्लस्टर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
अमृता विश्व विद्यापीठम की प्रोफेसर-वाइस चांसलर डॉ. मनीषा विनोदिनी ने स्वागत भाषण देते हुए राज्य में नवाचार नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की भूमिका पर बल दिया। नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक प्रोफेसर विवेक कुमार सिंह ने कार्यशाला का विषय निर्धारित करते हुए उल्लेख किया कि यद्यपि भारत ने शोध पत्रों के प्रकाशन और पेटेंट के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब इस ज्ञान को उपयोगी उत्पादों और सामाजिक-आर्थिक वस्तुओं में बदलने के लिए संरचनाएँ बनाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार इकोसिस्टम के विस्तार और भारत की नवाचार क्षमता को निरंतर बनाए रखने के लिए राज्यों की भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह कार्यशाला अति-महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नवाचार के क्षेत्र के सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स को एक साथ लाने का काम करती है।
इस बैठक में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल और मिजोरम के ग्रामीण विकास मंत्री प्रोफेसर लालनिलावमा भी मौजूद रहे। डॉ. पॉल ने इस बात पर जोर दिया कि यह कार्यशाला राज्यों और स्टेकहोल्डर्स के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहाँ वे सामूहिक रूप से अनुसंधान एवं विकास को अलग-अलग गतिविधियों के बजाय गवर्नेंस के एक निरंतर कार्य के रूप में स्थापित करने के मार्ग खोज सकें। उन्होंने कहा कि भारत की नवाचार यात्रा का अगला चरण इस बात पर निर्भर करता है कि राज्य केवल कार्यान्वयनकर्ता की भूमिका से आगे बढ़कर एक मजबूत और वितरित राष्ट्रीय नवाचार प्रणाली के सह-निर्माता के रूप में विकसित हों। प्रोफेसर लालनिलावमा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जमीनी स्तर के नवाचार समाज में गहराई से रचे-बसे हैं। हालाँकि, उनका पैमाना, पहचान और प्रभाव अभी भी सीमित है। उन्होंने सरकारी योजनाओं में लाभार्थी-आधारित दृष्टिकोण से हटकर साझेदारी-आधारित मॉडल की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि जमीनी स्तर के नवाचार को उच्च और अधिक टिकाऊ स्तरों तक ले जाने के लिए समुदायों को सक्रिय सहयोगियों के रूप में सशक्त बनाना अनिवार्य है।
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (एनएएसआई) के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार सिंह और नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के पूर्व मिशन निदेशक डॉ. श्री आर. रामानन ने भारतीय विज्ञान अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम के भविष्य पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। उन्होंने उन नवाचार मार्गों पर नए सिरे से ध्यान देने का आह्वान किया, जो अनुसंधान संस्थानों को उद्योग समूहों, स्टार्टअप्स और सार्वजनिक क्षेत्र के एप्लीकेशन से जोड़ते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ज्ञान सृजन से लेकर उसके क्रियान्वयन तक की मूल्य श्रृंखला निर्बाध और कुशल होनी चाहिए ताकि शोध का वास्तविक लाभ समाज तक पहुँच सके।
विभिन्न तकनीकी सत्रों के दौरान, प्रतिभागियों ने इनोवेशन इकोसिस्टम में सामंजस्य, राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषदों को मजबूत करने, नीतिगत विजन को राज्य-आधारित नवाचार कार्यों में बदलने और जमीनी स्तर के नवाचार को राज्य की नीतियों से जोड़ने जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया। इसके अलावा, इनोवेशन गवर्नेंस और प्रदर्शन बेंचमार्किंग पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इन चर्चाओं में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, सीएसआईआर, आईसीएमआर के प्रख्यात नेताओं और उद्योग भागीदारों के वरिष्ठ नेतृत्व ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यशाला का समापन एक सशक्त संदेश के साथ हुआ: भारत की सुदृढ़ नवाचार संस्कृति और राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मिशनों व पहलों के माध्यम से प्राप्त उपलब्धियों को आधार बनाते हुए, इस कार्यशाला ने यह पुष्टि की कि भारत की नवाचार यात्रा का अगला चरण मजबूत राज्य-स्तरीय अनुसंधान एवं विकास इकोसिस्टम द्वारा संचालित होना चाहिए। चर्चाओं में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि अब हमें नीति से अभ्यास की ओर निर्णायक रूप से बढ़ने की आवश्यकता है। इसके लिए राज्य मिशनों के भीतर आरएंडडी को संस्थागत बनाने, राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषदों को सशक्त बनाने, जमीनी स्तर के नवाचारों को नीतियों से जोड़ने और इनोवेशन गवर्नेंस को मजबूत करने की जरूरत है। सतत और समावेशी नवाचार-आधारित विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य राष्ट्रीय इनोवेशन इकोसिस्टम के मुख्य सह-निर्माता के रूप में उभरें और स्थानीय ज्ञान व साझेदारियों को व्यापक सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव में बदलें।