संसद प्रश्न: बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण
संसद प्रश्न: बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण
भारत सरकार ने बायोफार्मास्युटिकल अर्थात जैव-औषधि क्षेत्र में उद्यमिता एवं स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहित करने और सहायता देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने 2012 में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) की स्थापना धारा 8 के एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में की थी। इसका उद्देश्य देश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह संगठन विशेष रूप से फार्मा और बायोफार्मा सहित स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए अनुसंधान, विकास और उद्योग सहयोग को नई गति प्रदान करता है।
बिग (बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट), स्पर्श (उत्पादों के लिए सामाजिक नवाचार कार्यक्रम) जैसी प्रमुख वित्त पोषण योजनाएं शुरू की गई: किफायती और सामाजिक रूप से प्रासंगिक स्वास्थ्य समाधानों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बीआईआरएसी ने सीड कोष (सतत उद्यमिता एवं उद्यम विकास) और लीप कोष (उद्यमी-संचालित किफायती उत्पादों का शुभारंभ) जैसी इक्विटी योजनाओं की शुरुआत की। ये योजनाएं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ विचार-मंथन और व्यावसायीकरण के बीच मौजूद वित्तपोषण अंतराल को दूर करते हुए निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को भी महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती हैं। बीआईआरएसी की इन गतिविधियों का व्यापक प्रभाव स्पष्ट है—बिग योजना से लगभग 1000 स्टार्टअप और उद्यमियों को लाभ मिला है, जबकि स्पर्श कार्यक्रम ने 150 से अधिक फैलोशिप प्रदान की हैं, जिनसे 100 से अधिक स्टार्टअप विकसित हुए तथा 65 से अधिक आईपी का सृजन संभव हुआ है।
बीआईआरएसी ने देशभर में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक व्यापक एवं सुदृढ़ इनक्यूबेशन नेटवर्क विकसित किया है। वर्तमान में 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 94 इनक्यूबेशन एवं प्री-इनक्यूबेशन केंद्र 3000 से अधिक इनक्यूबेटरों तथा फेलो को सहायता प्रदान कर रहे हैं। बायोनेस्ट (बायोइनक्यूबेटर नर्चरिंग एंटरप्रेन्योरशिप फॉर स्केलिंग टेक्नोलॉजीज) और ई-युवा (एम्पावरिंग यूथ फॉर अंडरटेकिंग वैल्यू-एडेड इनोवेशन एंड ट्रांसलेशनल रिसर्च) जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं, शोधकर्ताओं तथा स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक सुविधाएं, तकनीकी मार्गदर्शन व उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (एनबीएम) को सहयोग प्रदान कर रहा है, जो कैबिनेट द्वारा अनुमोदित एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य “बायोफार्मास्यूटिकल्स के प्रारंभिक विकास हेतु खोज अनुसंधान में तेजी लाने के लिए उद्योग–अकादमिक सहयोगात्मक मिशन— ‘भारत में नवाचार (आई3): जैव प्रौद्योगिकी उद्यमियों को सशक्त बनाना और समावेशी नवाचार में तेजी लाना’” को आगे बढ़ाना है। यह मिशन जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन भारत की नवाचार अनुसंधान क्षमता और उत्पाद विकास अवसंरचना को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। विशेष रूप से यह टीकों, जैविक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के विकास पर केंद्रित है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित चुनौतियों का प्रभावी समाधान तैयार किया जा सके।
एनबीएम की कुछ प्रमुख उपलब्धियों में निम्नलिखित शामिल हैं:
डीबीटी ने कैबिनेट की मंजूरी से वर्ष 2024 के दौरान देश में उच्च-प्रदर्शन जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बायोई3 नीति को लागू किया है, जिसका अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार पर प्रभाव पड़ेगा।
इस पहल के तहत, देशभर में बायोमैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम के सभी प्रमुख विषयगत क्षेत्रों में अत्याधुनिक बायोफाउंड्री और बायोमैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें “प्रेसिजन बायोथेरेप्यूटिक्स” भी शामिल है। इन हबों का मुख्य उद्देश्य मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, एमआरएनए-आधारित थेरेपी, सेल एवं जीन थेरेपी सहित अन्य उन्नत प्रेसिजन दवाओं के स्वदेशी उत्पादन को गति देना है। ये सभी कार्यक्रम सरकारी सहायता और सहयोग के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं।
औषधि विभाग देश के औषधि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेश और उत्पादन में वृद्धि को प्रोत्साहित करके भारत की विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना है और साथ ही उच्च मूल्य वाले उत्पादों के विविधीकरण के माध्यम से औषधि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सुनिश्चित करना है। इस योजना के अंतर्गत जैव-औषधीय उत्पादों को भी पात्र श्रेणी में शामिल किया गया है, जिन पर बिक्री में वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि के आधार पर 10% की प्रोत्साहन दर प्रदान की जाती है।
उपलब्धियां:
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पशु विज्ञान संस्थान उद्यमिता और स्वदेशी जैव-औषधीय विनिर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं। आईसीएआर-एनआईएचएसएडी (राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान) प्राथमिकता वाले टीके और निदान विकसित करता है। आरकेवीवाई-रफ्तार के तहत आईसीएआर-आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) पशु विज्ञान इनक्यूबेटर पशुधन बायोफार्मा स्टार्टअप्स को 5 लाख रुपये (नवोदय) और 25 लाख रुपये (समृद्धि) के अनुदान के माध्यम से समर्थन देता है, साथ ही अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना, मार्गदर्शन तथा नियामक/व्यावसायीकरण सहायता भी प्रदान करता है।
कुछ प्रमुख उपलब्धियां: