संतुलित उर्वरीकरण को समर्थन: रबी 2025-26 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरें
संतुलित उर्वरीकरण को समर्थन: रबी 2025-26 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरें
मुख्य अंश
भूमिका
मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने, फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा दीर्घकालिक कृषि स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए संतुलित उर्वरीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना को निरंतर प्राथमिकता देती रही है। यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप है, जिसके माध्यम से किसानों को प्रमुख पोषक तत्व वहनीय मूल्यों पर उपलब्ध कराकर उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित किया जाता है। रबी मौसम 2025–26 के लिए संशोधित एनबीएस दरों की घोषणा पोषक तत्व प्रबंधन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ किसानों की आदान (इनपुट) लागत को नियंत्रण में रखने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारत सरकार ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना पेश की, जो 1 अप्रैल 2010 से प्रभाव में आई। यह योजना उर्वरक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नीतिगत परिवर्तन का प्रतीक थी, जिसका उद्देश्य किसानों को सब्सिडीयुक्त, वहनीय तथा न्यायसंगत मूल्यों पर उर्वरक उपलब्ध कराना और साथ ही, उनके संतुलित एवं सक्षम उपयोग को प्रोत्साहित करना था।
एनबीएस ढांचे के अंतर्गत उर्वरकों पर सब्सिडी का निर्धारण उनके पोषक तत्वों की मात्रा के आधार पर किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से एनपीकेएस—नाइट्रोजन (एन), फॉस्फोरस (पी), पोटाश (के) तथा सल्फर (एस)—शामिल हैं। यह दृष्टिकोण न केवल पोषक तत्वों के संतुलित प्रयोग को प्रोत्साहित करता है, बल्कि किसानों को अपनी मृदा एवं फसलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप पूरी जानकारी के साथ निर्णय लेने में भी सक्षम बनाता है। द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देकर यह योजना उर्वरकों के असंतुलित उपयोग के कारण होने वाले मृदा क्षरण तथा पोषक तत्व असंतुलन जैसी समस्याओं के समाधान में भी सहायक सिद्ध होती है।
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के परिणाम एवं नीतिगत प्राथमिकताएँ
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना का उद्देश्य नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना है, जिससे किसान किसी एक उर्वरक पर अत्यधिक निर्भरता से बच सकें, मृदा स्वास्थ्य बनाए रख सकें तथा उत्पादकता में वृद्धि हो। यह योजना यह भी सुनिश्चित करती है कि उर्वरक किसानों को समय पर तथा वहनीय, सब्सिडीयुक्त मूल्यों पर उपलब्ध हों, जो सुचारु फसल योजना के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह योजना उर्वरक कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देती है, जिससे उर्वरक बाजार में गुणवत्ता, नवाचार और दक्षता में सुधार होता है। उन्नत एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त नए और नवोन्मेषी उर्वरकों की शुरुआत को समर्थन देकर एनबीएस योजना कृषि पद्धतियों के आधुनिकीकरण में सहायक सिद्ध होती है। इसके अतिरिक्त, यह उर्वरकों एवं कच्चे माल के वैश्विक मूल्य रुझानों के अनुरूप सब्सिडी के तर्कसंगत निर्धारण पर भी केंद्रित है, जिससे किसानों को सहायता प्रदान करने के साथ-साथ राजकोषीय उत्तरदायित्व भी सुनिश्चित किया जा सके।

एनबीएस योजना के प्रमुख प्रावधान एवं मुख्य विशेषताएँ
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के अंतर्गत सरकार फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों, जिनमें डीएपी भी शामिल है, पर एक निश्चित सब्सिडी प्रदान करती है, जिसे वार्षिक या अर्धवार्षिक आधार पर संशोधित किया जाता है। सब्सिडी की राशि प्रत्येक उर्वरक ग्रेड में निहित पोषक तत्वों की संरचना से संबद्ध होती है।
रबी 2023–24 तक एनबीएस योजना के अंतर्गत डीएपी, एमओपी तथा एसएसपी जैसे 25 पी एंड के उर्वरक ग्रेड शामिल थे। खरीफ 2024 से तीन अतिरिक्त उर्वरक ग्रेडों को भी इस योजना में सम्मिलित किया गया है:
नए ग्रेडों के जुड़ने के साथ, सरकार अब किसानों को अधिकृत निर्माताओं और आयातकों के माध्यम से 28 प्रकार के पी एंड के उर्वरक सब्सिडीयुक्त दरों पर उपलब्ध करा रही है। अपने किसान-केंद्रित दृष्टिकोण के अनुरूप, सरकार इन उर्वरकों की वहनीय उपलब्धता को प्रतिस्पर्धी मूल्यों पर सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देती रहती है।
एनबीएस योजना के अंतर्गत, पी एंड के उर्वरक क्षेत्र एक असंयंत्रित प्रणाली के तहत कार्य करता है, जिससे कंपनियां उचित स्तर पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित कर पाती हैं, बशर्ते कि सरकार इसकी निगरानी करे। परिणामस्वरूप, किसान इन उर्वरकों की खरीद पर प्रत्यक्ष सब्सिडी का लाभ प्राप्त करते हैं।
रबी 2025–26 के लिए एनबीएस दरें
उर्वरक तथा आदानों के अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू बाजार के हाल के रुझानों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने रबी 2025–26 के लिए एनबीएस दरों को मंजूरी दी है, जो 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगी। यह दरें फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों, जिनमें डीएपी और एनपीकेएस ग्रेड शामिल हैं, पर लागू होंगी। उर्वरक कंपनियों को अधिसूचित दरों पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि उर्वरक किसानों को वहनीय मूल्य पर उपलब्ध हों। रबी सीज़न 2025–26 के लिए अनुमानित बजटीय आवश्यकता लगभग ₹37,952.29 करोड़ है, जो खरीफ सीज़न 2025 की आवश्यकता से लगभग ₹736 करोड़ अधिक है।
रबी 2025–26 के लिए पी एंड के उर्वरकों में नाइट्रोजन (एन), फॉस्फेट (पी), पोटाश (के) और सल्फर (एस) नामक पोषक तत्वों पर प्रति किलोग्राम सब्सिडी निम्नानुसार है:
क्रमांक
पोषक तत्व
एनबीएस (₹ प्रति किलोग्राम पोषक तत्व)
1
एन
43.02
2
पी
47.96
3
के
2.38
4
एस
2.87
रबी 2025–26 के लिए 28 ग्रेड के पी एंड के उर्वरकों पर उत्पादवार सब्सिडी निम्नानुसार है:
क्रमांक
उर्वरक का नाम
एनबीएस दर (₹/टन)
1
डीएपी 18-46-0-0
29,805
2
एमओपी 0-0-60-0
1,428
3
एसएसपी 0-16-0-11
7,408
4
एनपीएस 20-20-0-13
18,569
5
एनपीके 10-26-26-0
17,390
6
एनपी 20-20-0-0
18,196
7
एनपीके 15-15-15
14,004
8
एनपी 24-24-0-0
21,835
9
एएस 20.5-0-0-23
9,479
10
एनपी 28-28-0-0
25,474
11
एनपीके 17-17-17
15,871
12
एनपीके 19-19-19
17,738
13
एनपीके 16-16-16-0
14,938
14
एनपीएस 16-20-0-13
16,848
15
एनपीके 14-35-14
23,142
16
एमएपी 11-52-0-0
29,671
17
टीएसपी 0-46-0-0
22,062
18
एनपीके 12-32-16
20,890
19
एनपीके 14-28-14
19,785
20
एनपीकेएस 15-15-15-09
14,262
21
एनपी 14-28-0-0
19,452
22
पीडीएम 0-0-14.5-0
345
23
यूरिया-एसएसपी कॉम्प्लैक्स (5-15-0-10)
9,088
24
एनपीएस 24-24-0-8
21,835
25
एनपीके 8-21-21
14,013
26
एनपीके 9-24-24
15,953
27
एनपीके 11-30-14
19,453
28
एसएसपी 0-16-0-11
7,408
क्रम संख्या
सुदृढ़ीकरण हेतु पोषक तत्व
उपर्युक्त तालिका में दर्शाई गई दरों के अलावा सुदृढ़ीकृत/लेपित उर्वरकों पर अतिरिक्त सब्सिडी (₹/एमटी)
1
बोरॉन (B)
300
2
जि़ंक (Zn)
500
रबी 2025–26 के लिए डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) पर सब्सिडी को बढ़ाकर ₹29,805 प्रति मीट्रिक टन कर दिया गया है, जो रबी 2024–25 में रही ₹21,911 प्रति मीट्रिक टन के मुकाबले काफी अधिक है। रबी 2025–26 के लिए अमोनियम सल्फेट (घरेलू और आयातित दोनों) को भी एनबीएस योजना में शामिल किया गया है।
एनबीएस योजना के अंतर्गत आने वाला कोई भी पी एंड के उर्वरक, जो बोरॉन या जिंक से सुदृढ़ किया गया या लेपित हो (जैसा कि उर्वरक नियंत्रण आदेश में निर्दिष्ट है), उसे सब्सिडी मिलती रहेगी। इसके अतिरिक्त, इन सुदृढ़ किए गए या लेपित उर्वरकों को मुख्य पोषक तत्वों के साथ उनके उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति मीट्रिक टन अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।
एनबीएस का परिचालन प्रबंधन और अनुपालन निगरानी
रबी 2025–26 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्यायसंगत मूल्य सुनिश्चित करने के लिए उर्वरक कंपनियों को निम्नलिखित नियामक एवं परिचालन उपायों का पालन करना आवश्यक है:
उर्वरक कंपनियों के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार ऑडिट किया गया लागत डेटा जमा करना अनिवार्य है, जिससे पी एंड के उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की न्यायसंगतता निर्धारित की जा सके। इससे उर्वरक विभाग यह मूल्यांकन कर सकेगा कि घोषित एमआरपी उचित हैं या नहीं। कंपनियों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे सभी पी एंड के उर्वरक ग्रेडों के एमआरपी नियमित रूप से उर्वरक विभाग को रिपोर्ट करें और सुनिश्चित करें कि ये मूल्य अधिसूचित सब्सिडी दरों के अनुरूप हों, और यह गारंटी दें कि कंपनियां उर्वरकों को न्यायसंगत एमआरपी पर बेचें।
लाभ मार्जिन का नियमन
मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, निर्धारित सीमा से अधिक किसी भी लाभ को अनुचित माना जाएगा और संबंधित कंपनी से वसूला जाएगा। (अंतिम पी एंड के उत्पाद की उत्पादन लागत पर आयातकों के लिए 8%, निर्माताओं के लिए 10% और एकीकृत निर्माताओं के लिए 12% तक का लाभ मार्जिन न्यायसंगत माना जाता है।)
छपे हुए एमआरपी से अधिक मूल्य वसूलना अपराध माना जाएगा और यह आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंडनीय है।
ऑनलाइन, वेब-आधारित इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मॉनिटरिंग सिस्टम (आईएफएमएस) उर्वरक वितरण, परिवहन और आयात के साथ-साथ घरेलू निर्माण इकाइयों की उत्पादन गतिविधियों की भी सतत् निगरानी की सुविधा प्रदान करता है।
पी एंड के उर्वरकों के सभी निर्माता, विक्रेता और आयातकों, जिसमें सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) निर्माता भी शामिल हैं, के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि उर्वरक खुदरा स्थल तक फ्रीट ऑन रोड (एफ.ओ.आर.) डिलीवरी आधार पर ट्रांस्पोर्ट किए जाएँ।
मूल्यांकन की गई आवश्यकताओं के अनुसार, उर्वरक विभाग मासिक आपूर्ति योजना के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में उर्वरक आवंटित करता है और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धता की निरंतर निगरानी करता है। सभी प्रमुख सब्सिडीयुक्त उर्वरकों की गति को ऑनलाइन, वेब-आधारित इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से ट्रैक किया जाता है। इसके अतिरिक्त, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और उर्वरक विभाग, राज्य कृषि अधिकारियों के साथ साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित करते हैं, जिससे प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी आपूर्ति संबंधी समस्या का समाधान किया जा सके।
इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) – एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो उर्वरक वितरण और प्रबंधन से संबंधित कई ऑनलाइन सेवाएँ प्रदान करता है। इसमें डीलर पंजीकरण, स्टॉक उपलब्धता की ट्रैकिंग, डीलर खोजना, तथा प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) रिपोर्टों तक पहुँच शामिल है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दक्षता बढ़ाने और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में रिअल टाइम ट्रैकिंग के समर्थन के माध्यम से, आईएफएमएस यह सुनिश्चित करता है कि किसान और अन्य हितधारक उच्च-गुणवत्ता वाले उर्वरकों तक समय से पहुँच प्राप्त कर सकें।
प्रमुख कीर्तिमान और उपलब्धियों पर एक नज़र
पी एंड के उर्वरकों के उत्पादन में वृद्धि
एनबीएस योजना के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उठाए गए नीतिगत कदमों के परिणामस्वरूप पी एंड के (डीएपी और एनपीकेएस) उर्वरक उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है।
डीएपी और एनपीकेएस उर्वरकों का घरेलू उत्पादन 2014 में 112.19 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2025 में (30 दिसंबर 2025 तक) 168.55 लाख मीट्रिक टन हो गया है । इस महत्वपूर्ण वृद्धि से यह स्पष्ट होता है कि एनबीएस योजना स्वदेशी निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने, आवश्यक पौष्टिक तत्वों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हेतु सरकार की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने में प्रभावी रही है।

मृदा स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता में सुधार
एनबीएस के क्रियान्वयन ने यह दिखाया है कि फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों का प्रयोग खेतों की उत्पादकता बढ़ाता है और मृदा में बहु-पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद करता है। योजना के प्रारंभ से ही प्रमुख फसलों का उत्पादन उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। खाद्य अनाज की उपज 2010–11 में 1,930 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024–25 में 2,578 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

एनबीएस के तहत वित्तीय समर्थन
साल 2022–23 से 2024–25 के बीच, भारत सरकार ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत स्वदेशी और आयातित फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों के लिए 2.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी आवंटित की। यह निरंतर वित्तीय सहायता सरकार की उर्वरकों की वहनीयता, उपलब्धता और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
निष्कर्ष
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना भारत की उर्वरक नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरी है, जो संतुलित उर्वरीकरण, मृदा स्वास्थ्य और सतत कृषि को प्रोत्साहित करती है। सामूहिक नीतिगत उपायों के माध्यम से सरकार ने घरेलू उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ किया, उर्वरक ग्रेडों की संख्या 25 से बढ़ाकर 28 की, और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) पर फ्रेट सब्सिडी तथा मोलेस से प्राप्त पोटाश (पीडीएम) को शामिल करने जैसी पहलें शुरू की। इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) के माध्यम से निगरानी का डिजिटलीकरण और राज्यों के साथ नियमित समन्वय ने विभिन्न क्षेत्रों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर आपूर्ति को बढ़ाया है।
2022–23 से 2024–25 के बीच 2.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लगातार वित्तीय सहायता किसानों के लिए उर्वरकों की वहनीयता और उपलब्धता सुनिश्चित करने में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। एनबीएस योजना ने न केवल घरेलू पी एंड के उत्पादन (डीएपी और एनपीकेएस) में वृद्धि को बढ़ावा दिया — साल 2014 में 112.19 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर साल 2025 में 168.55 लाख मीट्रिक टन तक (30.12.2025 तक) — बल्कि खाद्य अनाज की उच्च उपज, मृदा में पोषक तत्व संतुलन में सुधार और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ किया है। इन सभी परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि यह योजना उत्पादकता, स्थिरता और किसान कल्याण को समन्वित करने में सफल रही है।
संदर्भ:
भारत सरकार
लोक सभा
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
पीआईबी प्रेस विज्ञप्तियाँ
पीआईबी पृष्ठभूमि दस्तावेज
***
- एनपीके (11:30:14) जिसे मैग्नीशियम, जिंक, बोरॉन और सल्फर से सुदृढ़ (फॉर्टिफाई) किया गया है
- यूरिया-एसएसपी (5:15:0:10)
- एसएसपी (0:16:0:11) जिसे मैग्नीशियम, जिंक और बोरॉन से सुदृढ़ किया गया है