Monday, January 19, 2026
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विद्युत मंत्रालय की वर्ष 2025 की वार्षिक समीक्षा

विद्युत मंत्रालय की वर्ष 2025 की वार्षिक समीक्षा

वर्ष 2025 ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण में ऐतिहासिक प्रगति के साथ देश के विद्युत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण वर्ष रहा। 242.49 गीगावॉट की बड़ी विद्युत मांग को पूरा करने से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की कमी को मात्र 0.03 प्रतिशत पर लाने तक विद्युत क्षेत्र ने सतत विकास के प्रति सुदृढ़ता और प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। ऊर्जा संरक्षण, उपभोक्ता सशक्तिकरण और अवसंरचना विकास में महत्वपूर्ण प्रगति सभी के लिए विश्वसनीय, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों को दर्शाती है। व्यापक विद्युतीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता में वृद्धि और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने जैसी अभूतपूर्व पहलों के साथ, भारत वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी बनने की राह पर मजबूती से अग्रसर है।

बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार:

1. रिकॉर्ड मांग पूरी हुई : भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, बिजली की 242.49 गीगावाट की अधिकतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया।

2. बिजली की कमी में भारी कमी: बिजली उत्पादन और पारेषण क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि के कारण, राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की कमी वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर महज 0.03 प्रतिशत रह गई है, जो वित्त वर्ष 2013-14 में 4.2 प्रतिशत थी। ऐसे में यह बड़ा सुधार है।

3. प्रति व्यक्ति बिजली खपत में वृद्धि: देश में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 2024-25 में बढ़कर 1460 किलोवाट-घंटे हो गई है, जो 2013-14 में 957 किलोवाट-घंटे से 52.6 प्रतिशत (503 किलोवाट-घंटे) की बढ़ोतरी दर्शाती है।

4. बिजली की उपलब्धता में सुधार : ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर 22.6 घंटे हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अब वर्ष 2014 के 22.1 घंटे की तुलना में 23.4 घंटे तक बिजली की आपूर्ति होती है। यह बिजली सेवाओं की विश्वसनीयता और पहुंच में पर्याप्त सुधार को दर्शाता है।

बिजली उत्पादन:

5. स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि: देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में 104.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 31 मार्च, 2014 तक 249 गीगावाट से बढ़कर 30 नवंबर, 2025 तक 509.743 गीगावाट हो गई है। जनवरी-नवंबर 2025 के दौरान बिजली उत्पादन क्षमता में 55.57 गीगावाट की वृद्धि हुई है।

6. नवीकरणीय ऊर्जा में व्यापक विस्तार: अप्रैल 2014 से, बड़े जलविद्युत संयंत्रों सहित 178 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। इसमें 130 गीगावाट सौर ऊर्जा, 33 गीगावाट पवन ऊर्जा, 3.4 गीगावाट बायोमास, 1.35 गीगावाट लघु जलविद्युत और लगभग 9.9 गीगावाट बड़े जलविद्युत उत्पादन क्षमता शामिल है, जो स्वच्छ ऊर्जा के प्रति देश की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

7. तापीय परियोजनाओं का आवंटन : देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की अनुमानित बिजली मांग को पूरा करने के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 (30.11.2025 तक) में 13.32 गीगावाट की नई कोयला आधारित तापीय क्षमता शुरू की गई है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2025-26 (30.11.2025 तक) में 7.21 गीगावाट क्षमता चालू की गई है। कोयला और लिग्नाइट आधारित तापीय संयंत्रों की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता अब 226.23 गीगावाट है। अतिरिक्त 40.35 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें से 7.03 गीगावाट वित्त वर्ष 2025-26 में चालू होने की उम्मीद है। इसके अलावा 24.02 गीगावाट क्षमता योजना, मंजूरी और बोली प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में है।

8. कोयले का भंडार : मार्च 2025 तक, घरेलू कोयला आधारित (डीसीबी) बिजली संयंत्रों के पास 55.48 मीट्रिक टन कोयले का भंडार था। 21 दिसंबर 2025 तक, इन संयंत्रों के पास 51.7 मीट्रिक टन कोयला था, जिसे मार्च 2026 तक बढ़ाकर 66 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी तिमाही में कोयले की निरंतर आपूर्ति ने जून 2025 में 242.49 गीगावाट की चरम मांग को पूरा करना सुनिश्चित किया। घरेलू कोयले की उपलब्धता में सुधार के साथ, विद्युत मंत्रालय ने 15 अक्टूबर 2024 के बाद आयातित कोयले के मिश्रण की एडवाइजरी बंद कर दिया।

9. शक्ति नीति का संशोधन: आर्थिक मामलों की केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने मई 2025 में विद्युत क्षेत्र को कोयले के पारदर्शी आवंटन हेतु संशोधित शक्ति (भारत में कोयले का दोहन और आवंटन करने की योजना) नीति को मंजूरी दी, जिससे विद्युत क्षेत्र के लिए कोयला उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया। संशोधित शक्ति नीति के लागू होने के साथ, व्यापार में सुगमता, कोयले की उपलब्धता बढ़ाने, परिचालन लचीलापन और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, कोयला आवंटन संबंधी शक्ति नीति के मौजूदा आठ अनुच्छेदों को केवल दो विंडो से जोड़ा गया है। इसेस तापीय क्षमता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है, सस्ती बिजली को बढ़ावा मिलता है, आयात पर निर्भरता कम होती है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलती है।

10. जलविद्युत परियोजनाएं: केंद्र सरकार ने अगस्त 2025 में अरुणाचल प्रदेश में तातो-II जलविद्युत परियोजना (700 मेगावाट) को मंजूरी दी है। यह परियोजना 72 महीनों में 8146.21 करोड़ रुपये की लागत से पूरी की जाएगी। इसके अलावा, एनएचपीसी ने 15.04.2025 को पार्वती-II जलविद्युत परियोजना (800 मेगावाट) को पूरी तरह से चालू कर दिया है।

11. पंप स्टोरेज परियोजनाएं (पीएसपी): भारत में लगभग 258 गीगावाट की पीएसपी क्षमता है, जिसमें से लगभग 7 गीगावाट (2.7 प्रतिशत) का विकास अब तक हो चुका है। सरकार ने 2031-32 तक 57 गीगावाट पीएसपी क्षमता जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें से 12 गीगावाट निर्माणाधीन है और शेष विकास के चरण में है।

12. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएस): बीईएसएस के विकास के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (वीजीएफ) योजनाओं के तहत, 43,220 मेगावाट घंटे की क्षमता को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

पारेषण:

13. राष्ट्रीय विद्युत योजना: भारत सरकार ने 2023 से 2032 तक केंद्रीय और राज्य पारेषण प्रणालियों के लिए राष्ट्रीय विद्युत योजना को अंतिम रूप दे दिया है, जिसका उद्देश्य 2032 तक 458 गीगावाट की चरम मांग को पूरा करना है। इस योजना की कुल लागत 9.16 लाख करोड़ रुपये है। पिछली योजना 2017-22 के तहत, लगभग 17,700 सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) लाइनें और 73 गीगावाट (जीवीएसी) रूपांतरण क्षमता प्रतिवर्ष जोड़ी गई थी। नई योजना के तहत, देश में पारेषण नेटवर्क का विस्तार नवंबर 2025 में 4.98 लाख सीकेएम से बढ़कर 2032 में 6.48 लाख सीकेएम हो जाएगा। इसी अवधि के दौरान रूपांतरण क्षमता 1,398 गीगा वोल्ट एम्पीयर (जीवीए) से बढ़कर 2,345 गीगावाट (जीवीए) हो जाएगी। अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण क्षमता 120 गीगावाट से बढ़कर 168 गीगावाट हो जाएगी। इस योजना में 220 केवी और उससे ऊपर के नेटवर्क शामिल है। यह योजना बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को सुगम बनाने और ग्रिड में हरित हाइड्रोजन लोड को शामिल करने में मदद करेगी।

14. 25.8 गीगावाट आईएसटीएस क्षमता स्वीकृत :  जनवरी 2025 से नवंबर 2025 तक, 38,849 करोड़ रुपये की लागत वाली 25.8 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी अंतरराज्यीय पारेषण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। 2030 तक 280 गीगावाट परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा (वीआरई) को अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) से जोड़ने के लिए लगभग 335 गीगावाट पारेषण नेटवर्क की आवश्यकता होगी। इसमें से 48 गीगावाट पहले ही पूर्ण हो चुका है, 172 गीगावाट निर्माणाधीन है और 18.5 गीगावाट के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। शेष 96.5 गीगावाट को उचित समय पर मंजूरी दी जाएगी।

15. पारेषण प्रणाली में सुधार : 2025 के दौरान, 6,511 सीकेएम पारेषण लाइनें (220 केवी और उससे ऊपर), 1,00,368 एमवीए रूपांतरण क्षमता (220 केवी और उससे ऊपर) और 1600 मेगावाट अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण क्षमता जोड़ी गई है।

16. राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) मुआवजा दिशानिर्देश : वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को रिक्त करने के लिए विद्युत पारेषण अवसंरचना के समयबद्ध विकास को सुनिश्चित करने हेतु विद्युत मंत्रालय ने जून 2024 में राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) दिशानिर्देशों को संशोधित किया, जिसमें मुआवजे को भूमि के बाजार मूल्य से जोड़ा गया। टावर बेस क्षेत्र के लिए मुआवजा भूमि मूल्य के 85 प्रतिशत से बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया गया है। आरओडब्ल्यू कॉरिडोर के लिए मुआवजा भूमि मूल्य के 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, विद्युत मंत्रालय ने 21.03.2025 को आरओडब्ल्यू के संबंध में मुआवजे के भुगतान के लिए पूरक दिशानिर्देश जारी किए। ये पूरक दिशानिर्देश आरओडब्ल्यू मुआवजे के भुगतान के लिए स्वतंत्र भूमि मूल्यांकनकर्ताओं के किए गए मूल्यांकन के आधार पर एक बाजार दर समिति (एमआरसी) द्वारा निर्धारित भूमि की बाजार दर के आकलन का प्रावधान करते हैं। आईएसटीएस लाइनों के लिए आरओडब्ल्यू कॉरिडोर के मुआवजे की राशि को संशोधित किया गया है, जिसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि मूल्य का 30 प्रतिशत, राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित नगर निगमों और महानगरीय क्षेत्रों में भूमि मूल्य का 60 प्रतिशत और नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सभी शहरी नियोजन क्षेत्रों में भूमि मूल्य का 45 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

बिजली वितरण:

17. पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस): आरडीएसएस का उद्देश्य वितरण कंपनियों की परिचालन दक्षता और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना है। इसके तहत, 19,79,30,131 प्रीपेड स्मार्ट मीटर, 52,52,692 डीटी मीटर और 2,05,475 फीडर मीटर 1,30,671 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किए गए हैं। 1,52,854 करोड़ रुपये के हानि न्यूनीकरण कार्यों को स्वीकृत किया गया है और आरडीएसएस के तहत 38,187 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। 31.12.2025 तक, आरडीएसएस के तहत 3.76 उपभोक्ता मीटर, 12.56 डीटी मीटर और 1.58 फीडर मीटर स्थापित किए गए हैं। योजना के तहत किए गए सुधार उपायों के परिणामस्वरूप, वर्ष 2025 में एटी एंड सी हानि घटकर 16.16 प्रतिशत (अस्थायी) और एसीएस-एआरआर अंतर घटकर 0.11 रुपये प्रति किलोवाट घंटा (अस्थायी) हो गया है जो वित्त वर्ष 2021 में क्रमश: 21.91 प्रतिशत और 0.69 रुपये प्रति किलोवाट था।

18. प्रधानमंत्री जनमन (प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान) के अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सभी चिन्हित परिवारों, डीए-जेजीयूए (धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान) के अंतर्गत जनजातीय परिवारों और प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेवाई) के अंतर्गत चिन्हित परिवारों को आरडीएसएस के तहत ग्रिड से बिजली कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं। अब तक, आरडीएसएस के अंतर्गत 13,65,139 परिवारों के विद्युतीकरण के लिए कुल 6,522 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें प्रधानमंत्री जनमन और डीए-जेजीयूए पहल के अंतर्गत चिन्हित सार्वजनिक स्थान भी शामिल हैं।

ऊर्जा संरक्षण और दक्षता:

19. भारतीय कार्बन बाजार: विद्युत मंत्रालय ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना अधिसूचित की है, जिससे उद्योगों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और कार्बन क्रेडिट अर्जित करने का अधिकार मिलता है। यह पहल परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों में निवेश को बढ़ावा देती है, जिससे भारत वैश्विक हरित वित्त में अग्रणी के रूप में स्थापित है। सीसीटीएस का व्यापक ढांचा दो तंत्रों से मिलकर बना है – क) अनुपालन और ख) ऑफसेट।

ए. अनुपालन तंत्र के तहत, केंद्र सरकार के निर्धारित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (जीईआई) लक्ष्यों का अनुपालन बाध्य संस्थाओं को करना होगा। इसके अलावा, जो बाध्य संस्थाएं अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता को निर्धारित मानदंडों से नीचे लाती हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र (सीसीसी) जारी किए जाएंगे, और जो संस्थाएं अपने लक्षित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता को पूरा नहीं कर पाती हैं, वे भारतीय कार्बन बाजार से सीसीसी खरीदकर अपनी कमी को पूरा कर सकती हैं। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में एल्युमीनियम, सीमेंट, क्लोर-अल्कली और पल्प एंड पेपर – चार क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (जीईआई) लक्ष्य अधिसूचित कर दी थी, जिसमें 282 बाध्य संस्थाएं शामिल हैं।

बी. ऑफसेट तंत्र स्वैच्छिक परियोजना-आधारित आधारभूत और ऋण तंत्र है। इसके अंतर्गत, गैर-बाध्य संस्थाएं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, निष्कासन या बचाव के लिए अपनी परियोजनाओं को पंजीकृत कराकर कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकती हैं। यह तंत्र देश को अनुपालन तंत्र के अंतर्गत न आने वाले क्षेत्रों से भी शमन प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा और ऐसे क्षेत्रों में कार्यों को प्रोत्साहित करेगा। ऑफसेट तंत्र के अंतर्गत 9 कार्यप्रणालियां और विस्तृत प्रक्रियाएं प्रकाशित की गई हैं।

20. मानक एवं लेबलिंग कार्यक्रम : घरेलू उपकरण क्षेत्र में, बीईई का मानक एवं लेबलिंग (एस एंड एल) कार्यक्रम ऊर्जा खपत करने वाले उपकरणों और यंत्रों के बारे में उपभोक्ताओं को सूचित विकल्प प्रदान करने में बहुत सफल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में ईवी चार्जर और इवेपोरेटिव एयर कूलर के लिए स्वैच्छिक स्टार लेबलिंग कार्यक्रम शुरू किया गया है। इन अतिरिक्त उपकरणों के साथ, इस कार्यक्रम में अब 41 उपकरण शामिल किए गए हैं, जिनमें से 18 उपकरण अनिवार्य चरण में हैं जबकि शेष 23 उपकरण स्वैच्छिक चरण में हैं।

21. लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में ऊर्जा दक्षता को सुदृढ़ करने के लिए, जुलाई 2025 में 1,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एडीईईटीआईई (उद्योगों और प्रतिष्ठानों में ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकी के परिनियोजन में सहायता) परियोजना शुरू की गई। यह परियोजना निवेश-योग्य लेखापरीक्षा सहायता, मार्गदर्शन और ब्याज सब्सिडी (सूक्ष्म/लघु उद्यमों के लिए 5 प्रतिशत; मध्यम उद्यमों के लिए 3 प्रतिशत) प्रदान करती है। इसमें 14 क्षेत्रों में फैले 60 समूह शामिल किए गए हैं, जिससे ऊर्जा दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलता है।

सुधार और पहल

22. विलंबित भुगतान अधिभार नियम, 2022 : उत्पादन कंपनियों और अन्य संस्थाओं के बढ़ते बिजली बकाया राशि के कारण लंबे समय से चिंता का विषय रहे विद्युत क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला में भुगतान अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 3 जून 2022 को विद्युत (विलंबित भुगतान अधिभार और संबंधित मामले) नियम, 2022 अधिसूचित किए। इनके लागू होने के बाद से महत्वपूर्ण प्रगति हुई है – 3 जून 2022 तक 1,39,947 करोड़ रुपये के पुराने बकाया के मुकाबले, 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने 39 ईएमआई, पूर्व भुगतान और समायोजन के माध्यम से 1,31,942 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। परिणामस्वरूप, बकाया राशि घटकर 8,005 करोड़ रुपये रह गई है, और बिजली वितरण कंपनियां अब अपने वर्तमान बकाया का भुगतान समय पर कर रही हैं, जो क्षेत्रीय वित्तीय अनुशासन में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है।

विद्युत मंत्रालय ने 2 मई 2025 को विद्युत (विलंबित भुगतान अधिभार और संबंधित मामले) नियमों में संशोधन अधिसूचित किया, जिसके तहत अंतरराज्यीय पारेषण लाइसेंसधारियों को नियमों में निर्धारित भुगतान सुरक्षा तंत्र के दायरे में लाया गया है। इस संशोधन से अंतरराज्यीय पारेषण लाइसेंसधारियों के लिए समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और भुगतान सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे अंतरराज्यीय पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित होगा। यह नियोजित नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता विस्तार से प्राप्त बिजली की निकासी के लिए अत्यंत आवश्यक है।

23. विद्युत (संशोधन) नियम, 2025 : उपभोक्ता स्वामित्व वाले ऊर्जा भंडारण की अनुमति देने के लिए विद्युत नियम, 2005 में संशोधन किया गया है। ये संशोधन भारत की विद्युत प्रणाली में ऊर्जा भंडारण के एकीकरण को सुगम बनाने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करते हैं, जिससे विश्वसनीयता, लचीलापन और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में वृद्धि होती है।

24. भारत सरकार ने दिनांक 01.08.2025 की अधिसूचना के माध्यम से जल विद्युत उत्पादन केंद्रों की स्थापना से संबंधित योजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय सीमा को संशोधित करके 3,000 करोड़ रुपये कर दिया है, जिसके लिए केंद्रीय ऊर्जा आयोग (सीईए) की सहमति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने पूंजीगत व्यय की मात्रा की परवाह किए बिना, ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप्ड स्टोरेज योजनाओं को सीईए की सहमति की आवश्यकता से छूट दी है।

25. ऊर्जा परिवर्तन और एनडीसी की उपलब्धि: भारत ने निर्धारित समय से लगभग पांच वर्ष पहले ही 50 प्रतिशत संचयी गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (एनडीसी) लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है। गैर-जीवाश्म क्षमता की हिस्सेदारी 2014 में 32 प्रतिशत से बढ़कर अक्टूबर 2025 तक 51 प्रतिशत हो गई है, जो स्वच्छ ऊर्जा की ओर भारत के तीव्र परिवर्तन और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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