वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी और जीवीए वृद्धि के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान क्रमश: 7.4 और 7.3 प्रतिशत
वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी और जीवीए वृद्धि के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान क्रमश: 7.4 और 7.3 प्रतिशत
भारत की प्रमुख वृद्धि का अनुमान लगभग 7 प्रतिशत, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत का अनुमान
वित्त वर्ष 2025 में केन्द्र की राजस्व प्राप्ति जीडीपी के 11.6 प्रतिशत तक बढ़ी
एनपीए में बहु-दशकीय गिरावट 2.2 प्रतिशत तक हुई
पीएमजेडीवाई के अंतर्गत मार्च 2025 तक 55 करोड़ 2 लाख बैंक खाते खोले गए,
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र में 36 करोड़ 63 लाख खाते खुले
सितम्बर 2025 में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 12 करोड़ से अधिक हुई, इनमें लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं शामिल
वर्ष 2005 से 2024 के दौरान भारत का वैश्विक व्यापार निर्यात एक प्रतिशत से लगभग दोगुना होकर 1.8 प्रतिशत हुआ
वित्त वर्ष 2025 में सेवा निर्यात अब तक का सर्वाधिक 387.6 बिलियन अमरीकी डॉलर हुआ, 13.6 प्रतिशत की वृद्धि
वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत विश्व में सबसे बड़ा जमा प्राप्ति वाला देश बना, 135.4 बिलियन अमरीकी डॉलर का आंकड़ा छुआ
16 जनवरी, 2026 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन अमरीकी डॉलर हुआ, इसमें 11 महीने का आयात और विदेशी कर्ज का 94 प्रतिशत शामिल
अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत घरेलू मुद्रास्फीति 1.7 प्रतिशत रही
कृषि वर्ष (एवाई) 2024-25 के दौरान भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) पर पहुंचा, पिछले वर्ष के मुकाबले 254.3 एलएमटी की वृद्धि
पीएम किसान योजना के शुरू होने से अब तक पात्र किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई
वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए मनरेगा के स्थान पर ग्रामीण रोजगार को संरेखित करते हुए विकसित भारत-जी राम जी की स्थापना
वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण वृद्धि क्रमश: 7.72 प्रतिशत और 9.13 प्रतिशत रही, यह ढांचागत बहाली को प्रदर्शित करता है
14 क्षेत्रों में उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंतर्गत 2 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ, सितम्बर 2025 तक उत्पादन/बिक्री 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुई और 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए
भारत सेमीकंडक्टर मिशन से घरेलू क्षमता बढ़ी, 10 परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये का निवेश
रेलवे के हाईस्पीड कॉरिडोर में वित्त वर्ष 2014 में 550 किलोमीटर की तुलना में (वित्त वर्ष 2026, दिसंबर 2025 तक) 5,364 किलोमीटर हुआ, वित्त वर्ष 2026 में 3500 किलोमीटर की वृद्धि
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू उड़ान बाजार, हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 से 2025 में 164 हुई
डिस्कॉम के लिए ऐतिहासिक परिवर्तन वित्त वर्ष 2025 में पहली बार 20,701 करोड़ रुपये का सकारात्मक पीएटी दर्ज किया गया
ओवरऑल नवीकरणीय ऊर्जा और स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत की विश्व स्तर पर तीसरी रैंक
भारत स्वायत्त सैटेलाइट डॉकिंग (स्पेडैक्स) क्षमता प्राप्त करने वाला चौथा देश बना
प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक चरण में कुल नामांकन अनुपात (जीईआर) क्रमश: 90.9, 90.3 और 78.7 रहा
भारत में इस समय 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स मौजूद, जंजीबार और अबूधाबी में दो अंतर्राष्ट्रीय आईआईटी कैम्पस स्थापित
1990 के बाद भारत में मातृ और शिशु मृत्यु दर में गिरावट, वैश्विक औसत से कम हुई
जनवरी 2026 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार पंजीकृत, 54 प्रतिशत महिलाएं शामिल
वित्त वर्ष 2025 में राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल पर रिक्तियों की संख्या 2.8 करोड़ से अधिक हुई और वित्त वर्ष 2026 में सितंबर तक 2.3 करोड़ की संख्या पार की
नीति आयोग द्वारा मापित बहु-आयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) 2005-06 में 55.3 प्रतिशत से 2022-23 में 11.28 प्रतिशत हुई
समीक्षा के अनुसार महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए अनुशासित स्वदेशी का आह्वान, महत्वपूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार, निवेश लागत मूल्य में कमी, उन्नत विनिर्माण में मजबूती और आत्मनिर्भरता से रणनीतिक अपरिहार्यता की ओर प्रगति
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश किया। आर्थिक समीक्षा के प्रमुख बिन्दु निम्न प्रकार है।
अर्थव्यवस्था की स्थिति
1 वैश्विक वातावरण के नाजुक होने के बावजूद अर्थव्यवस्था में वृद्धि अनुमान से अधिक रही है, लेकिन भू-राजनैतिक तनाव के चलते व्यापारिक और वित्तीय खतरा बना हुआ है। इस परिस्थिति का खतरा जारी है।
2. इस परिस्थिति में भी भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है। वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी और जीवीए वृद्धि के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान क्रमश: 7.4 और 7.3 प्रतिशत रहा। इससे लगातार चौथे वर्ष भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से वृद्धि कर रही है।
3. निजी अंतिम उपयोग व्यय वित्त वर्ष 2026 में 7 प्रतिशत बढ़ा और यह सकल घरेलू उत्पाद-जीडीपी का 61.5 प्रतिशत हो गया। यह 2012 से अब तक का सर्वाधिक है। वित्त वर्ष 2023 में यह 61.5 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि कम मुद्रास्फीति, स्थिर रोजगार और वास्तविक क्रय शक्ति में वृद्धि के कारण हुई। मजबूत कृषि उत्पादन से ग्रामीण उपभोग में वृद्धि हुई। इसके अलावा शहरी उपभोग में भी सुधार हुआ। इसके साथ टैक्स रेशनेलाइजेशन के कारण बड़े पैमाने पर मांग में वृद्धि हुई।
4. वित्त वर्ष 2026 में निवेश गतिविधियां मजबूत हुई। इसके साथ ही ग्रोस फिक्स्ड कैपिटल फोरमेशन में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और इसका हिस्सा जीडीपी का 30 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस गति को सतत सार्वजनिक पूँजीगत व्यय तथा निजी निवेश गतिविधि में पुनरुद्धार से बल मिला, जिसका संकेत कॉरपोरेट घोषणाओं से मिलता है।
5. आपूर्ति पक्ष पर, सेवाएं वृद्धि की प्रमुख चालक बनी हुई हैं। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सेवाओं के सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पूरे राजकोषीय वर्ष के लिए इसकी वृद्धि 9.1 प्रतिशत अनुमानित है। यह रुझान इस क्षेत्र में व्यापक आधार पर विस्तार को दर्शाता है।
राजकोषीय घटनाक्रम: विश्वसनीय समेकन के माध्यम से स्थिरता सुनिश्चित करना
मौद्रिक प्रबंधन और वित्तीय अंतर-मध्यस्थता : विनियामक प्रदर्शन में सुधार
मौद्रिक प्रारूप
बैंकिंग क्षेत्र में प्रदर्शन
वित्तीय समावेशन
वित्तीय क्षेत्र के अन्य पहलू
क्षेत्रीय परिदृश्य
बाहरी क्षेत्र : दूरगामी लक्ष्य की तैयारी
महंगाई: नियंत्रित और स्थिर
कृषि और खाद्य प्रबंधन
सेवाएं : स्थिरता से नए आयामों की ओर
उद्योग की नई उड़ान : संरचनात्मक रूपान्तरण और वैश्विक एकीकरण
निवेश और अवसंरचना : संपर्क सूत्र, क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन : सशक्त, प्रतिस्पर्धी और विकासशील भारत
शिक्षा और स्वास्थ्य – उपलब्धियाँ और भविष्य की रूपरेखा
उच्च शिक्षा
स्वास्थ्य
रोजगार और कौशल विकास — उन्नत कौशल की ओर
कौशल प्रणाली
ग्रामीण विकास और सामाजिक प्रगति – भागीदारी से साझेदारी तक
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति
भारत में एआई (एआई) पारिस्थिति की तंत्र का विकास: आगे की राह”
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) को प्रतिष्ठा-आधारित प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा के बजाय ऐसे आर्थिक रणनीति के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका संकेन्द्र भारत की संरचनात्मक वास्तविकताओं जैसे पूँजी की उपलब्धता, ऊर्जा की सीमित आपूर्ति, संस्थागत क्षमता और बाज़ार की गहराई के अनुरूप ए.आई को अपनाने पर है, ताकि प्रौद्योगिकी के चयन, दीर्घकालिक विकास को सुदृढ़ करें और कमजोर निर्भरताएं उत्पन्न न हों।
शहरीकरण: भारत के शहरी तंत्र को नागरिकोन्मुख बनाना
आयात प्रतिस्थापन से सामरिक लचीलेपन और सामरिक अपरिहार्यता तक
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- सरकार की संतुलित वित्तीय रणनीति ने मैक्रो इकोनॉमिक स्थिरता को मजबूत किया। इससे 2025 में मॉर्निंग स्टार डीबीआरएस, एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग और रेटिंग एंड इंवेस्टमेंट (आरएंडआई), इन्क्लु जैसी तीन संप्रभु रेटिंग उन्नयन में योगदान मिला।
- केंद्र की राजस्व प्राप्तियाँ वित्त वर्ष 16–वित्तवर्ष 20 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 8.5 प्रतिशत थीं, जो वित्त वर्ष 22–वित्त वर्ष 25 में लगभग 9.1 प्रतिशत तक बढ़ गईं। इस सुधार का मुख्य कारण गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह में वृद्धि थी, जो महामारी से पहले जीडीपी का लगभग 2.4 प्रतिशत थी और महामारी के बाद लगभग 3.3 प्रतिशत पहुँच गई।
- प्रत्यक्ष कर आधार में लगातार वृद्धि हुई, जिसमें आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या वित्त वर्ष 22 में 6.9 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 9.2 करोड़ हो गई। रिटर्न दाखिल करने वालों की बढ़ी हुई संख्या बेहतर अनुपालन, कर प्रशासन में तकनीक के अधिक उपयोग और आय बढ़ने के साथ कर दायरे में शामिल होने वाले व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि को दर्शाती है।
- अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 17.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 6.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। जीएसटी राजस्व की वृद्धि मौजूदा नाममात्र जीडीपी वृद्धि की स्थिति के साथ मोटे तौर पर मेल खाती है। समानांतर रूप से, उच्च-आवृत्ति वाले संकेतक मजबूत लेन-देन वॉल्यूम का सुझाव देते हैं, जिसमें अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान संचयी ई-वेबिल वॉल्यूम साल-दर-साल 21 प्रतिशत बढ़ा।
- केंद्रीय सरकार का प्रभावी पूँजीगत व्यय महामारी पूर्व अवधि में जीडीपी के औसतन 2.7 प्रतिशत से बढ़कर पोस्ट-पैंडेमिक अवधि में लगभग 3.9 प्रतिशत हो गया और वित्तीय वर्ष 2025 में यह जीडीपी के 4 प्रतिशत तक पहुंच गया।
- राज्यों को पूँजीगत व्यय के लिए विशेष सहायता (SASCI) के माध्यम से केंद्र ने राज्यों को वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी के लगभग 2.4 प्रतिशत तक पूँजीगत व्यय बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया है।
- राज्य सरकारों का संयुक्त राजकोषीय घाटा महामारी के बाद की अवधि में जीडीपी के लगभग 2.8 प्रतिशत के स्तर पर व्यापक रूप से स्थिर रहा, जो महामारी पूर्व स्तर के समान है, लेकिन हाल के वर्षों में यह बढ़कर वित्तवर्ष 2025 में 3.2 प्रतिशत हो गया है, जो राज्य वित्त पर उभरते दबावों को दर्शाता है।
- भारत ने 2020 से सामान्य सरकारी कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को लगभग 7.1 प्रतिशत अंक कम किया, जबकि उच्च सार्वजनिक निवेश को बनाए रखा।