Thursday, January 8, 2026
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(वार्षिकी 2025 – सहकारिता मंत्रालय) : “सहकार से समृद्धि”

(वार्षिकी 2025 – सहकारिता मंत्रालय) : “सहकार से समृद्धि”

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की “सहकार से समृद्धि” की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से 6 जुलाई, 2021 को एक अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई। देश के प्रथम सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और मार्गदर्शन में मंत्रालय ने सहकारिता क्षेत्र को सशक्त और जीवंत बनाने के लिए विभिन्न पहल और ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। सहकारिता मंत्रालय ने पिछले 4 साल में 114 प्रमुख पहलों को क्रियान्वित किया है, जिससे देश भर में सहकारी समितियों के आर्थिक विकास और विस्तार के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। इन पहलों पर विवरण एवं इन पर अब तक हुई प्रगति का विवरण निम्नानुसार हैं:

(क)प्राथमिक सहकारी समितियों का आर्थिक सुदृढ़ीकरण

1.       पैक्स को बहु-उद्देशीय बनाने के लिए आदर्श उपविधियां

माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी का मानना है कि पैक्स जब बहु-उद्देशीय होंगी तभी वो और अधिक सशक्त और आर्थिक रूप से व्यवहार्य होंगी l इसके लिए उनके नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय द्वारा पैक्स के लिए आदर्श उपविधियां सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय संघो एवं अन्य हितधारकों से परामर्श के पश्चात तैयार की गई एवं 05 जनवरी 2023 को परिचालित की गई l

2.पैक्स के सशक्तिकरण हेतु उनका कम्प्यूटरीकरण

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे 29 जून 2022 को अनुमोदित किया गया, जिसका उद्देश्य 31 मार्च 2027 तक PACS को डिजिटल रूप से सक्षम संस्थानों में परिवर्तित करना है।

प्रारंभ में 63,000 PACS के लिए ₹2,516 करोड़ की लागत के साथ स्वीकृत इस परियोजना का विस्तार 79,630 PACS तक किया गया है, और कुल बजट को संशोधित कर ₹2,925.39 करोड़ कर दिया गया है।

यह परियोजना भारत सरकार, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और नाबार्ड द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित है:

वर्तमान तिथि तक, भारत सरकार ने ₹1,067.50 करोड़ जारी किए हैं, जिनमें से ₹901.58 करोड़ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को हार्डवेयर की खरीद, डिजिटाइजेशन और सहायक प्रणालियों के लिए जारी किए गए हैं, तथा ₹165.92 करोड़ नाबार्ड को दिए गए हैं, जो कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में सॉफ्टवेयर विकास, क्लाउड डेटा भंडारण, साइबर सुरक्षा, प्रशिक्षण और परियोजना प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।

माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने इस बात पर बल दिया है कि यह परियोजना पैक्स के कार्यकरण में पारदर्शिता बढ़ाएगी और सहकारी प्रणाली में सार्वजनिक विश्वास को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगी।

प्रगति के संदर्भ में, वर्तमान स्थिति के अनुसार 59,261 पैक्स सक्रिय रूप से सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं, जबकि 2 जनवरी 2025 तक यह संख्या 47,155 पैक्स थी। हार्डवेयर 65,151 पैक्स तक पहुंचाया जा चुका है, जो 79,630 पैक्स के विस्तारित लक्ष्य का लगभग 82% है (जबकि जनवरी 2025 तक 57,578 पैक्स कवर किए गए थे)। 2025 से कुछ नए मानकों को ट्रैक किया जा रहा है, जैसे कि प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन ऑडिट, जो 42,730 पैक्स में पूरे किए जा चुके हैं।

नए ई-पैक्स पैरामीटर के अंतर्गत, मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में सेवा पर्व के दौरान 17,168 पैक्स में ई-पैक्स सक्षम करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जो 10,000 के लक्ष्य से कहीं अधिक है। वर्तमान तिथि तक, 32,119 पैक्स ने ई-पैक्स का दर्जा प्राप्त कर लिया है। ईआरपी सॉफ्टवेयर में 22 कार्यात्मक मॉड्यूल शामिल हैं, जिनके माध्यम से 34.94 करोड़ लेन-देन संसाधित किए जा चुके हैं। यह सॉफ्टवेयर वर्तमान में 14 भाषाओं में उपलब्ध है, और 8 अतिरिक्त संवैधानिक भाषाओं पर कार्य प्रगति पर है।

परियोजना का कार्यान्वयन वित्त वर्ष 2022–23 में प्रारंभ हुआ, और इसकी समाप्ति तिथि 31 मार्च 2027 निर्धारित है।

3. प्रत्येक पंचायत / गांव में बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी, मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 15 फरवरी, 2023 को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस योजना में अगले 5 वर्षों में सभी पंचायतों/ गावों को कवर करने हेतु नई बहु-उद्देशीय पैक्स, डेयरी, मत्स्य सहकारी समितियां गठित किये जाने का लक्ष्य है l यह योजना नाबार्ड, NDDB, NFDB व राज्य सरकारों के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही है, जिसमें इन प्राथमिक सहकारी समितियों के स्तर पर भारत सरकार की विभिन्न मौजूदा योजनाओं का अभिसरण करना शामिल है I योजना के क्रियान्वयन हेतु विभिन्न स्तरों पर समितियां गठित की गई हैं, जैसे कि अंतर-मंत्रालयी समिति, राष्ट्रीय स्तरीय समन्वय समिति, राज्य स्तरीय सहकारी विकास समिति एवं जिला स्तरीय सहकारी विकास समिति l योजना का समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु 19.9.2024 को एक मानक संचालन प्रक्रिया (मार्गदर्शिका) भी जारी की गई है, जिसमें संबंधित हितधारकों के लक्ष्य, समयसीमा, भूमिका और जिम्मेदारियां दर्शाई गई हैं। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार, राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 32,009 नए पैक्स, डेयरी और मत्स्य पालन सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं।

4. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भण्डारण योजना

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, मंत्रिमंडल ने 31 मई, 2023 को सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को पायलट परियोजना के रूप में लागू करने की स्वीकृति प्रदान की। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न कृषि अवसंरचनाओं जैसे गोदाम, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्रसंस्करण इकाइयाँ, उचित मूल्य दुकानें आदि का निर्माण प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के स्तर पर भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से किया जाना है।

माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह इस परियोजना पर विशेष जोर दे रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी, खाद्यान्न की बर्बादी में कमी आएगी, किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा तथा PACS स्तर पर ही विभिन्न कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति संभव हो सकेगी।

पायलट परियोजना के अंतर्गत 11 राज्यों की 11 PACS में गोदामों का उद्घाटन किया गया है तथा 500 अतिरिक्त PACS में गोदाम निर्माण के लिए शिलान्यास माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 24 फरवरी, 2024 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया गया।

प्रगति की स्थिति

परियोजना के अंतर्गत, दिनांक 30.12.2025 तक देश भर में 112 PACS में गोदामों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है (पायलट चरण-I – 11, राजस्थान – 82, महाराष्ट्र – 15, गुजरात – 4), जिससे कुल 68,702 मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है।

कार्यान्वयन क्षमता को व्यापक बनाने और परियोजना के विस्तार के उद्देश्य से, योजना का विस्तार PACS से आगे बढ़ाते हुए सभी सहकारी समितियों, सहकारी संघों तथा बहु-राज्य सहकारी समितियों (MSCS) को भी सम्मिलित किया गया है।

5. ई-सेवाओं की बेहतर पहुंच के लिए कॉमन सेवा केन्द्र (सीएससी) के रूप में पैक्स

सहकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नाबार्ड और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज़ इंडिया लिमिटेड के बीच माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी की उपस्थिति में दिनांक 02.02.2023 को समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ, जिससे पैक्स अब CSC द्वारा दी जाने वाली 300 से भी अधिक ई-सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हो गई हैं l ऑनबोर्ड हुए पैक्स को एनसीसीटी द्वारा CSC-SPV एवं नाबार्ड के समन्वय से प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है l अब तक, 51,836 पैक्स CSC के रूप में कार्य करना शुरु कर चुकी हैं और इन पैक्स द्वारा ₹60 करोड़ से अधिक का लेन-देन किया जा चुका है l इस पहल का उद्घाटन माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी द्वारा 21 जुलाई, 2023 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली से किया गया l देश में कम्प्यूटरीकृत की जा रही सभी क्रियाशील पैक्स/ लैम्प्स के माध्यम से CSC सुविधाएं प्रदान करने की योजना है l

6.पैक्स के द्वारा नए किसान उत्पादक संगठन (FPOs)का गठन

एफपीओ योजना के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को सहकारिता के क्षेत्र में 1100 अतिरिक्त एफपीओ के आवंटन का निर्णय लिया गया है I अब पैक्स FPO के रूप में कृषि सम्बंधित अन्य आर्थिक कार्यकलाप करने में सक्षम होंगी l यह पहल सहकारी समितियों के सदस्यों को आवश्यक बाजार लिंकेज प्रदान कर उनकी उपज के उचित मूल्य दिलाने में भी सहायक होगी। इस परियोजना का उद्घाटन माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी द्वारा 14 जुलाई, 2023 को IECC, प्रगति मैदान, नई दिल्ली से किया गया l NCDC द्वारा सहकारी क्षेत्र में अब तक कुल 1863 FPO का गठन किया जा चुका है, जिसमें से 1117 FPO का गठन पैक्स के सुदृढ़ीकरण द्वारा किया गया है। यह किसानों को आवश्यक बाजार संपर्क प्रदान  करने और उनकी उपज के लिए उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने में सहायक होगा। योजना के तहत एफ.पी.ओ./सी.बी.बी.ओ. को ₹206 करोड़ संवितरित किए हैं।

7. पैक्स की LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए पात्रता

पैक्स की व्यावसायिक गतिविधियाँ बढाने हेतु माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में सहकारिता  मंत्रालय संकल्पित भाव से कार्य कर रहा है l पैक्स को LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए पात्र बनाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है l पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए पैक्स को पात्र बनाने के लिए नियमों में बदलाव किए गए हैं, जिससे अब पैक्स LPG का वितरण भी कर सकेंगी l

8. पैक्स द्वारा संचालित बल्क कंज्यूमर पेट्रोल पम्प को रिटेल आउटलेट में बदलने की अनुमति

सहकारिता मंत्रालय की पहल पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मौजूदा थोक उपभोक्ता लाइसेंसधारी पैक्स को रिटेल आउटलेट में बदलने के लिए सहमति दी है I इस पहल के तहत, बल्क कंज्यूमर पेट्रोल पम्प लाइसेंसधारी पैक्स को रिटेल आउटलेट में बदलने हेतु एकमुश्त विकल्प दिया गया है l अब तक 5 राज्यों के 117 थोक उपभोक्ता लाइसेंसधारी पैक्स ने खुदरा दुकानों में रूपांतरण के लिए सहमति दी है, जिनमें से 59 पैक्स को ओएमसी से आशय पत्र (एलओआई) प्राप्त हो चुके हैं इस प्रावधान से पैक्स के मुनाफे में वृद्धि होगी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे l

9. पैक्स को नये पेट्रोल/डीज़ल पंप डीलरशिप में प्राथमिकता

पेट्रोल/डीज़ल रिटेल डीलरशिप के लिए भी पैक्स को प्राथमिकता दी जा रही है l तेल विपणन कंपनियों (OMC)/ पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा पैक्स को OMC द्वारा जारी विज्ञापनों के आधार पर Combined Category 2 (CC-2) श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करने हेतु गाइडलाइन्स जारी किये चुके हैं l अब तक 28 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 394 से अधिक पैक्स/ लैंप्स ने ऑनलाइन आवेदन किया है l इस पहल से पैक्स के मुनाफे में वृद्धि होगी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे l

10. ग्रामीण स्तर पर जेनरिक दवाइयों की पहुंच के लिए जन औषधि केंद्र के रूप में पैक्स

6 जून, 2023 को माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी की अध्यक्षता में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के साथ आयोजित बैठक में पैक्स द्वारा प्रधान मंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के संचालन का निर्णय लिया गया l इससे ग्रामीण/ ब्लॉक स्तर पर सस्ती जेनरिक दवाइयाँ आम लोगों को उपलब्ध हो सकेंगी और पैक्स को आय के अतिरिक्त स्त्रोत मिलेंगे l इच्छुक पैक्स को चिन्हित कर राज्य सरकार द्वारा उन्हें ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया गया है। जन औषधि केंद्र हेतु 34 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के 4,192 पैक्स/सहकारी समितियों द्वारा आवेदन किया जा चुका है, जिनमें से 4,177 पैक्स को PMBI द्वारा प्राथमिक अनुमोदन भी दिया जा चुका है l  इनमें से 866 पैक्स को राज्य औषधि नियंत्रकों से दवा लाइसेंस प्राप्त हो गए हैं, जिसमें से 812 पैक्स को PMBI से स्टोर कोड प्राप्त हो चुके हैं और वे जन औषधि केंद्रों के रूप में कार्य करने के लिए तैयार हैं।

11. पैक्स का प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) के रूप में उन्नयन    

6 जून, 2023 को माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी की अध्यक्षता में माननीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री के साथ आयोजित बैठक में, पहले से उर्वरक वितरण केंद्र के रूप में कार्यरत पैक्स को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) के रूप में उन्नयन (Upgradation) करने का निर्णय लिया गया l पैक्स को उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन उद्यमियों के रूप में भी कार्य करने का निर्णय लिया गया I इससे पैक्स के लिए व्यवसाय के नये अवसर सृजित होंगे तथा उनके मुनाफे में वृद्धि होगी l भारत सरकार के उर्वरक विभाग तथा राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 38,190 पैक्स को PMKSK में अपग्रेड किया जा चुका है; शेष में कार्य प्रक्रिया जारी है।

12. नाबार्ड की सहायता से बैंक मित्र सहकारी समितियों को माइक्रो-एटीएम

डेयरी तथा अन्य सहकारी समितियों को जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों एवं राज्य सहकारी बैंकों का बैंक मित्र भी बनाया गया है। उनके व्यापार करने में सुगमता, पारदर्शिता तथा वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए, नाबार्ड के सहयोग से इन बैंक मित्र सहकारी समितियों को ‘डोर स्टेप वित्तीय सेवाएँ’ प्रदान करने हेतु माइक्रो-एटीएम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इस उद्देश्य से 21 मई, 2023 को एक पायलट परियोजना प्रारंभ की गई तथा 12 जुलाई, 2023 को माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा पंचमहल और बनासकांठा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के खाताधारकों को कार्ड वितरण के साथ इसका उद्घाटन किया गया।

पायलट परियोजना से प्राप्त अनुभवों के आधार पर “कोऑपरेशन अमंग्स्ट कोऑपरेटिव्स” नामक राज्यव्यापी अभियान 15 जनवरी को बनासकांठा स्थित सनादर डेयरी कॉम्प्लेक्स से प्रारंभ किया गया।

गुजरात राज्य में कुल 12,219 बैंक मित्र नियुक्त किए गए हैं तथा 12,624 माइक्रो-एटीएम जारी किए गए हैं, जिससे राज्य की सभी 14,330 ग्राम पंचायतें आच्छादित हो गई हैं।

इस योजना से डेयरी सहकारी समितियों और PACS के लिए एक अतिरिक्त राजस्व स्रोत सृजित हुआ है तथा 15,000 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हुए हैं।

योजना से प्राप्त अनुभवों के आधार पर, मंत्रालय की मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की योजना है।

13. सहकारी समितियों के सदस्यों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड

ग्रामीण सहकारी बैंकों की पहुँच और क्षमता बढ़ाने तथा ग्रामीण सहकारी समितियों के सदस्यों को आवश्यक तरलता प्रदान करने के उद्देश्य से गुजरात के पंचमहल और बनासकांठा जिलों में एक पायलट परियोजना प्रारंभ की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत, सहकारी समितियों के सभी सदस्यों के बैंक खाते संबंधित जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में खोले जा रहे हैं तथा नाबार्ड के सहयोग से खाताधारकों को रुपे–किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) वितरित किए जा रहे हैं।

रुपे–किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सहकारी समितियों के सदस्यों को उचित ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा तथा सदस्य इस कार्ड का उपयोग अन्य वित्तीय लेन-देन के लिए भी कर सकेंगे।

पायलट परियोजना से प्राप्त अनुभवों के आधार पर, “कोऑपरेशन अमंग्स्ट कोऑपरेटिव्स” नामक राज्यव्यापी अभियान 15 जनवरी को गुजरात राज्य में बनासकांठा के सनादर डेयरी कॉम्प्लेक्स से प्रारंभ किया गया। अब तक 22 लाख से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण का वितरण किया गया है, जिससे उद्यमिता एवं रोजगार का सृजन हुआ है।

योजना से प्राप्त अनुभवों के आधार पर, मंत्रालय की मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की योजना है।

14. पानी समिति के रूप में पैक्स

पैक्स की ग्रामीण क्षेत्रो में गहरी पहुँच का उचित उपयोग करने हेतु सहकारिता मंत्रालय की पहल पर जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पैक्स को भी पानी समिति के रूप में पाइप्ड जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव (O&M) का कार्य करने हेतु पात्र बनाने के लिए राज्यों को पत्र लिखा गया है l इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में, जल आपूर्ति योजनाओं के O&M का कार्य सुदृढ़ होगा तथा पैक्स को रोजगार के नये अवसर भी मिलेंगे l इस पहल के तहत अब तक 10 राज्यों में 762 पैक्स चयनित/ चिह्नित किए जा चुके हैं; अन्य प्रक्रिया में हैं।

15. पैक्स स्तर पर PM-KUSUM योजना का अभिसरण

PACS की गहरी पहुँच, जिनसे 13 करोड़ से अधिक किसान बतौर सदस्य जुड़े हैं, का लाभ पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए किया जा सकता है l इससे, पैक्स से जुड़े किसान अपनी उर्जा-सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे l साथ ही, पैक्स व उनके सदस्य किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत प्राप्त होंगे l इस विषय पर सहकारिता मंत्रालय की   नवीन और नवीकरणीय उर्जा मंत्रालय के साथ चर्चा जारी है l

16. मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों का गठन (एफएफपीओ)

मछुआरों को बाजार लिंकेज तथा प्रसंस्करण सुविधाएं प्रदान करने हेतु, एनसीडीसी द्वारा प्रारम्भिक चरण में 70 एफएफपीओ का पंजीकरण किया गया है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने ₹225.50 करोड़ के अनुमोदित परिव्यय के साथ एनसीडीसी को 1000 मौजूदा मात्स्यिकी सहकारी समितियों को एफएफपीओ में बदलने का कार्य सौंपा है। साथ ही, NCDC ने अब तक 1,070 FFPO गठित किए जा चुके हैं और 2,348 FFPO के सुदृढ़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। योजना के तहत एफ.एफ.पी.ओ./सी.बी.बी.ओ. को ₹98 करोड़ संवितरित किए हैं।

(B) राष्ट्रीय स्तर पर तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियाँ

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में, सहकारिता मंत्रालय द्वारा निर्यात, प्रमाणित बीज एवं जैविक उत्पादों के लिए तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियों का गठन किया गया।

1. निर्यात के लिए नई राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समिति

सरकार ने बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (MSCS) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत एक नई शीर्ष (एपेक्स) बहु-राज्य सहकारी निर्यात समिति की स्थापना की है, जिसका नाम नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL) है। यह एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में भारतीय सहकारी क्षेत्र में उपलब्ध अधिशेष उत्पादों के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि देश की भौगोलिक सीमाओं से परे व्यापक बाजारों तक पहुँच बनाकर भारतीय सहकारी उत्पादों/सेवाओं की वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ाई जा सके और इनके लिए सर्वोत्तम संभव मूल्य प्राप्त किया जा सके।

यह समिति खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, प्रमाणन, अनुसंधान एवं विकास आदि सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा देगी तथा सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित सभी प्रकार के वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को प्रोत्साहित करेगी।

अब तक 13,890 PACS/सहकारी समितियाँ NCEL की सदस्य बन चुकी हैं। अब तक NCEL द्वारा चावल, गेहूं, मक्का, चीनी, प्याज, जीरा आदि जैसे कृषि जिंसों का लगभग 13.77 लाख मीट्रिक टन (LMT) निर्यात किया गया है, जिसका मूल्य ₹5,556.24 करोड़ है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान NCEL द्वारा अपनी सदस्य सहकारी समितियों को 20% लाभांश प्रदान किया गया।

2. प्रमाणित बीजों के लिए नई राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समिति

सरकार ने MSCS अधिनियम, 2002 के अंतर्गत एक नई शीर्ष बहु-राज्य सहकारी बीज समिति की स्थापना की है, जिसका नाम भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) है। यह एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं और नीतियों का लाभ उठाते हुए PACS के माध्यम से बीजों की दोनों पीढ़ियों, अर्थात् फाउंडेशन और प्रमाणित बीजों के उत्पादन, परीक्षण, प्रमाणन, खरीद, प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग, लेबलिंग और पैकेजिंग पर ध्यान केंद्रित करेगी।

BBSSL ने ‘भारत बीज’ ब्रांड के अंतर्गत अपने बीज लॉन्च किए हैं। अब तक 31,605 PACS/सहकारी समितियाँ BBSSL की सदस्य बन चुकी हैं।

3. जैविक खेती के लिए नई राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समिति

सरकार ने MSCS अधिनियम, 2002 के अंतर्गत एक नई शीर्ष बहु-राज्य सहकारी जैविक समिति की स्थापना की है, जिसका नाम नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) है। यह एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में जैविक उत्पादों के एकत्रीकरण, प्रमाणन, परीक्षण, खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक सुविधाओं तथा विपणन के लिए संस्थागत समर्थन प्रदान करेगा और PACS/FPOs सहित अपनी सदस्य सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक किसानों को वित्तीय सहायता की व्यवस्था कराने में सुविधा प्रदान करेगा। साथ ही, सरकार की विभिन्न योजनाओं और एजेंसियों की सहायता से जैविक उत्पादों के प्रचार एवं विकासात्मक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।

अब तक 10,035 PACS/सहकारी समितियाँ NCOL की सदस्य बन चुकी हैं। NCOL ने अपने उत्पाद ‘भारत ऑर्गेनिक्स’ ब्रांड नाम के अंतर्गत लॉन्च किए हैं। अब तक भारत ऑर्गेनिक्स ब्रांड के अंतर्गत 28 जैविक उत्पाद (अरहर दाल, ब्राउन चना, चना दाल, काबुली चना, मसूर मलका, मसूर स्प्लिट, मसूर साबुत, मूंग धुली, मूंग स्प्लिट, मूंग साबुत, राजमा चित्रा, उड़द दाल, उड़द गोटा, उड़द स्प्लिट, उड़द साबुत, गेहूं आटा, गुड़ क्यूब, गुड़ पाउडर, ब्राउन शुगर, खांडसारी शुगर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, मेथी, साबुत धनिया, एप्पल साइडर विनेगर, जैविक गोअन काजू, जैविक कश्मीरी बादाम, जैविक कश्मीरी अखरोट) दिल्ली-एनसीआर में उपलब्ध हैं। भारत ऑर्गेनिक्स के उत्पादों का 245 से अधिक कीटनाशकों के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में 100% बैच परीक्षण किया जाता है।

(C) सहकारी समितियों के लिए आयकर कानून में राहत

1. ₹1 करोड़ से 10 करोड़ की आय वाली सहकारी समितियों के लिए सरचार्ज 12% से घटाकर 7% किया गया: इससे सहकारी समितियों पर आयकर का बोझ कम होगा और उनके पास अपने सदस्यों के हित में कार्य करने के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध होगी।

2. सहकारी समितियों के लिए MAT 18.5% से घटाकर 15% किया गया: इस प्रावधान के साथ अब इस संबंध में सहकारी समितियों और कंपनियों के बीच समानता स्थापित हो गई है।

3. आयकर अधिनियम की धारा 269ST के अंतर्गत नकद लेन-देन में राहत: सहकारी समितियों को धारा 269ST के अंतर्गत नकद लेन-देन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि किसी सहकारी समिति द्वारा अपने वितरक के साथ एक दिन में ₹2 लाख से कम का नकद लेन-देन अलग-अलग माना जाएगा और उस पर आयकर दंड नहीं लगाया जाएगा।

4. नई बनी सहकारी समितियों के लिए कर में कटौती: सरकार ने यह निर्णय लिया है कि 31 मार्च, 2024 तक विनिर्माण गतिविधियाँ प्रारंभ करने वाली नई सहकारी समितियों पर पूर्व में लागू 30% तक कर एवं सरचार्ज के स्थान पर 15% की समान (फ्लैट) कम कर दर लागू की जाएगी। इससे विनिर्माण क्षेत्र में नई सहकारी समितियों के गठन को प्रोत्साहन मिलेगा।

5. PACS और PCARDBs द्वारा नकद जमा और भुगतान की सीमा में वृद्धि: सरकार ने PACS और प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) द्वारा नकद जमा और भुगतान की सीमा को प्रति सदस्य 20,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया है। इस प्रावधान से उनकी गतिविधियों में सुविधा होगी, उनका व्यवसाय बढ़ेगा और उनके सदस्यों को लाभ होगा।

6. नकद निकासी पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) की सीमा में वृद्धि: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, केंद्रीय सरकार ने बजट 2023-24 के माध्यम से सहकारी समितियों के लिए बिना स्रोत पर कर कटौती के नकद निकासी की सीमा को 1 करोड़ रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दिया है। इस प्रावधान से सहकारी समितियों को TDS की बचत होगी, जिसका उपयोग वे अपने सदस्यों के हित में कार्य करने के लिए कर सकेंगी।

7. सहकारी समितियों को कम या शून्य TDS प्रमाणपत्र प्राप्त करने में सक्षम बनाना: दिनांक 01.10.2024 से, धारा 194Q को धारा 197 के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिससे करदाताओं को धारा 194Q के अंतर्गत TDS अनुपालन वाली लेन-देन के संबंध में कम/शून्य कटौती प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने में सुविधा होगी।

8. वस्तुओं की बिक्री पर धारा 206C(1H) के अंतर्गत TCS को अप्रभावी किया गया:

धारा 206C(1H) में एक सनसेट क्लॉज जोड़ा गया है, जिसके परिणामस्वरूप उक्त धारा के प्रावधान 1 अप्रैल, 2025 से लागू नहीं होंगे।

(घ) सहकारी समितियों के केन्द्रीय पंजीयक कार्यालय का सुदृढ़ीकरण

1. केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय का कंप्यूटरीकरण

सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार का कार्यालय बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रशासन के लिए उत्तरदायी है। बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने हेतु केंद्रीय रजिस्ट्रार के कार्यालय का कंप्यूटरीकरण किया गया है। इससे केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय में इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ़्लो के माध्यम से आवेदन एवं सेवा अनुरोधों का समयबद्ध रूप से निपटान करने में सहायता मिलेगी। इसमें ओटीपी आधारित उपयोगकर्ता पंजीकरण, MSCS अधिनियम एवं नियमों के अनुपालन की जाँच, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई, पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करना तथा अन्य संचार को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करने की व्यवस्था है। माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 06 अगस्त, 2023 को इस डिजिटल पोर्टल का उद्घाटन किया।

2. बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2023

बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2023 का उद्देश्य बहु-राज्य सहकारी समितियों (MSCSs) में सुशासन लाना, पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाना तथा निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार करना है। बहु-राज्य सहकारी समितियाँ विधेयक को 25 जुलाई, 2023 को लोकसभा द्वारा तथा 01 अगस्त, 2023 को राज्यसभा द्वारा पारित किया गया। बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (संशोधन) अधिनियम, 2023 दिनांक 03 अगस्त, 2023 से प्रभावी हो गया है।

(ङ) सहकारी चीनी मिलों का पुनरुद्धार

1. सहकारी चीनी मिलों को आयकर से राहत

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अप्रैल 2016 से आगे, किसानों को उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) अथवा राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) तक अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान करने पर सहकारी चीनी मिलों पर अतिरिक्त आयकर नहीं लगाया जाएगा।

2. सहकारी चीनी मिलों से संबंधित आयकर के दशकों पुराने लंबित मुद्दों का समाधान

सरकार ने केंद्रीय बजट 2023-24 में यह प्रावधान किया है, जिसके अंतर्गत चीनी सहकारी समितियों को आकलन वर्ष 2016–17 से पूर्व की अवधि के लिए गन्ना किसानों को किए गए भुगतान को व्यय के रूप में दावा करने की अनुमति दी गई है, जिससे उन्हें ₹46,000 करोड़ से अधिक की राहत प्राप्त हुई है।

3. सहकारी चीनी मिलों को सशक्त बनाने के लिए एनसीडीसी के माध्यम से 10,000 करोड़ की ऋण योजना

सहकारिता मंत्रालय ने ‘सहकारी चीनी मिलों को सशक्त बनाने हेतु एनसीडीसी को अनुदान सहायता’ नामक एक नई योजना प्रारंभ की है, जिसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा एनसीडीसी को ₹1,000 करोड़ का अनुदान दो किश्तों में (प्रत्येक ₹500 करोड़) प्रदान किया जा रहा है। पहली किश्त ₹500 करोड़ वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान प्राप्त हो चुकी है तथा दूसरी किश्त ₹500 करोड़ वित्त वर्ष 2024 के दौरान प्राप्त होने की संभावना है। एनसीडीसी इस अनुदान का उपयोग सहकारी चीनी मिलों को 10,000 करोड़ रुपये तक के ऋण प्रदान करने के लिए करेगा, जिसका उपयोग वे एथेनॉल संयंत्र स्थापित करने, सह-उत्पादन (को-जनरेशन) संयंत्र स्थापित करने, कार्यशील पूंजी के रूप में अथवा इन तीनों उद्देश्यों के लिए कर सकेंगी। एनसीडीसी द्वारा 56 सहकारी चीनी मिलों के लिए 10,005 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

4. सहकारी चीनी मिलों को एथेनॉल खरीद में प्राथमिकता एवं को-जनरेशन विद्युत संयंत्रों की स्थापना

एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा एथेनॉल की खरीद के मामले में अब सहकारी चीनी मिलों को निजी कंपनियों के समान दर्जा प्रदान किया गया है।

5. सहकारी चीनी मिलों की सहायता हेतु शीरे (मोलासेस) पर जीएसटी में 28% से घटाकर 5% की कमी

सरकार ने शीरे (मोलासेस) पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% करने का निर्णय लिया है, जिससे सहकारी चीनी मिलों को डिस्टिलरी को अधिक मार्जिन के साथ शीरा बेचकर अपने सदस्यों के लिए अधिक लाभ अर्जित करने में सहायता मिलेगी।

(च) सहकारी बैंकों को आ रही कठिनाइयों का निवारण

माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में एवं माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी की दूरदर्शिता और अथक प्रयासों से सहकारी बैंकों को उनके व्यवसाय में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए l

1. शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को व्यापार विस्तारण हेतु नई शाखाएं खोलने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंक (UCBs) अब आरबीआई की पूर्वानुमति के बिना पिछले वित्तीय वर्ष में मौजूदा शाखाओं की संख्या का 10% (अधिकतम 5) तक नई शाखाएँ खोलने हेतु पात्र हो गए हैं।

2. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को अपने ग्राहकों को डोर-स्टेप सेवाएं प्रदान करने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंकों द्वारा अब डोर-स्टेप बैंकिंग सुविधा प्रदान की जा सकती है I इन बैंकों के खाताधारक अब अपने घर पर ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाएं जैसे नकद निकासी एवं नकद जमा, केवाईसी, डिमांड ड्राफ्ट और पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र, आदि का लाभ प्राप्त कर पाने को सक्षम हैं।

3. शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को शामिल करने हेतु शेड्यूलिंग मानदंडों की अधिसूचना:  शहरी सहकारी बैंक जो ‘वित्तीय सुदृढ़ और सुप्रबंधित’ (FSWM) मानदंडों को पूरा करते हैं तथा पिछले दो वर्षों से टियर 3 (₹1000 करोड़ से ऊपर की जमा राशि) के रूप में वर्गीकरण हेतु आवश्यक न्यूनतम जमा राशि बरकरार रखे हुए हैं, अब भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम,1934 की अनुसूची II में शामिल होने के लिए पात्र हैं तथा ‘अनुसूचित’ का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

4. शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के साथ नियमित संवाद हेतु आरबीआई में एक नोडल अधिकारी नामित: सहकारिता क्षेत्र की गहन समन्वय और केंद्रित संवाद हेतु काफी समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नोडल अधिकारी अधिसूचित किया है।

5. शहरी सहकारी बैंकों के लिए पीएसएल लक्ष्य को 75% से घटाकर 60% करने से राहत: आर.बी.आई.  ने UCBs के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending, PSL)  लक्ष्य को 75% तक कर दिया था, जिससे शहरी क्षेत्रों में कार्य कर रही इन बैंकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब शहरी सहकारी बैंकों (UCB) के लक्ष्य को  75% से घटाकर 60% कर दिया गया है जिससे उन्हे काफी राहत मिल पा रही है।

6. शहरी सहकारी बैंकों के लिए आवास ऋण सीमा 10% से बढ़ाकर 25% की गई: शहरी सहकारी बैंकों के सदस्‍यों के लिए आवास ऋण सीमा को उनकी कुल परिसंपत्ति का 10% से बढ़ाकर ऋण एवं अग्रिम का 25% (₹3 करोड़ तक) कर दिया गया है।

7. महिला ऋण पुनर्भुगतान के लिए 2 लाख रुपये के लक्ष्य को हटाकर 12% (दुर्बल वर्ग) की उप-सीमा में राहत: दुर्बल वर्गों के लिए 12% की उप-सीमा के तहत महिला उधारकर्ताओं के लिए ₹2 लाख के लक्ष्य को हटाने से अब PSL का अनुपालन सरल हो गया है और यूसीबी को PSL दायित्वों को पूरा करने में अधिक प्रचालन स्वतंत्रता ‍मिल पा रही है।

8. शहरी सहकारी बैंकों को राहत देते हुए 50% ऋण सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ किया गया: शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए ऋण और अग्रिमों के 50% की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ किया गया, जिससे उन्हें उधारकर्ताओं की उच्च ऋण मांगों को पूरा करने, व्यापार वृद्धि में मदद करने और खुदरा और SME ऋण क्षेत्रों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने में सक्षमता प्राप्त हुई है।

9. स्‍वर्ण ऋण हेतु RBI द्वारा मौद्रिक सीमा दोगुनी की गई: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा PSL लक्ष्यों को पूरा करने वाले शहरी सहकारी बैंकों की मौद्रिक सीमा को 2 लाख रुपये से दोगुना कर 4 लाख रुपये कर दिया गया है।

10. शहरी सहकारी बैंकों के लिए अंब्रेला संगठन: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र के लिए एक अम्ब्रेला संगठन (UO) की स्थापना हेतु मंजूरी दी, जिससे लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों को आवश्यक सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना और प्रचालन सहायता प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

11. RBI ने सिक्‍युरिटी रीसिप्‍ट्स के लिए ग्लाइड पथ को वित्तीय वर्ष 2025-26 से वित्तीय वर्ष 2027-28 तक बढ़ा दिया है : RBI ने दिनांक 24.02.2025 के परिपत्र के माध्‍यम से शहरी सहकारी बैंकों में पूंजी और तरलता के बेहतर प्रबंधन के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (Non-performing Assets) का परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी के माध्यम से दो वर्ष के अतिरिक्त समय का प्रावधान किया है जिससे ये बैंक stressed परिसंपत्तियों के नुकसान को कम करने को अब सक्षम हैं।

12. सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों की तरह बकाया ऋणों का वन टाइम सेटलमेंट करने की अनुमति: सहकारी बैंक अब बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के माध्यम से तकनीकी राइट-ऑफ करने के साथ-साथ उधारकर्ताओं के निपटान प्रक्रिया भी प्रदान कर पा रहे हैं।

13. उच्चतर आवास ऋण सीमाएं- भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए व्यक्तिगत आवासन ऋण की सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया और उन्‍हें रियल एस्टेट को कुल एक्‍सपोज़र के 5% तक ऋण देने के लिए सक्षम किया है।

14. सहकारी बैंकों में आधार सक्षम भुगतान प्रणाली‘ (AePS) के लिए लाइसेंस शुल्क घटाया गया: सहकारी बैंकों को ‘आधार सक्षम भुगतान प्रणाली’ (AePS) में ऑनबोर्ड करने के लाइसेंस शुल्क को लेनदेन की संख्या से लिंक करके घटा दिया गया है। सहकारी वित्तीय संस्थानों को भी उत्‍पादन-पूर्व चरण में यह सुविधा  पहले तीन महीनों में निःशुल्क प्राप्त है। इससे अब ऑनबोर्डेड बैंकों के सदस्य किसानों को बायोमेट्रिक्‍स द्वारा घर बैठे ही बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त हो पा रही हैं।

UIDAI ने 01.08.2025 को सहकारी बैंकों के AePS पर ऑनबोर्डिंग हेतु नया framework जारी  किया है। अब केवल राज्य सहकारी बैंकों को ही AUA/KUA के रूप में ऑनबोर्डिंग करना होगा, DCCB को राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से Sub-AUA/KUA के रूप में इसका उपयोग करने की अनुमति होगी।

15. ऋण वितरण में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों (UCBs),राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को CGTMSE योजना में सदस्य ऋण संस्थान (MLI) के रूप में अधिसूचित किया गया: सहकारी बैंक अब दिए जाने वाले ऋणों पर 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ उठा पाने को सक्षम हैं। इसके साथ ही सहकारी क्षेत्र के उद्यमों को भी अब सहकारी बैंकों से कोलैटरल- मुक्त ऋण मिल सकेगा। क्रेडिट गारंटी योजना (CGS) के अधीन सदस्‍य ऋण संस्‍थानों (MLIs) के रूप में सहकारी बैंकों के पंजीकरण के लिए CGTMSE ने 5% सकल NPA या उससे कम को 7% सकल NPA या उससे कम पर रैशनलाइज किया है।

16. सहकारी बैंकों के निदेशक मंडल का कार्यकाल: संविधान के अनुरूप (अधिकतम 10 लगातार वर्ष) करने के लिये बैंककारी विनियमन अधिनियम (Banking regulation Act) में संशोधन किया गया है।

17. प्राथमिकता क्षेत्र दिशानिर्देशों के तहत कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) के लिए सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ की गई: आरबीआई ने दिनांक 24.03.2025 के मास्टर निर्देश के द्वारा कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण सीमा को ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ किया। इस कदम से बैंक, कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) को अधिक ऋण सहायता प्रदान कर सकेंगे जिससे कृषि अवसंरचना मजबूत होने को सक्षम है और ग्रामीण ऋण प्रवाह को बढ़ावा मिल रहा है।

18. सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय): ग्रामीण सहकारी बैंकों को तकनीकी सेवाएं प्रदान करने और उनके सशक्‍तीकरण के लिए आरबीआई ने सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय) की स्थापना हेतु नाबार्ड को सैद्धांतिक अनुमोदन दी है।

19. ग्रामीण सहकारी बैंक आर.बी.आई. की एकीकृत लोकपाल योजना में शामिल: आर.बी.आई ने दिनांक 07.10.2025 की अधिसूचना द्वारा ₹50 करोड़ से अधिक जमा राशि वाले ग्रामीण सहकारी बैंको अपनी एकीकृत लोकपाल योजना में शामिल कर लिया है। इससे ग्रामीण सहकारी बैंकों के कार्यों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।

20. RCBs को ऑटोमैटिक रूट से नई ब्रांच खोलने की अनुमति: RBI ने, दिनांक 04.12.2025 के मास्‍टर निर्देश द्वारा राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को ऑटोमैटिक रूट से नई ब्रांच (अधिकतम 10) खोलने की अनुमति दी है।

21. सहकारी बैंकों द्वारा आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्तीय मापदंडों में राहत: RBI ने दिनांक 28.11.2025 के मास्‍टर निर्देश द्वारा ग्रॉस और नेट NPA और नेट प्रॉफिट की शर्तों को हटाकर आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्तीय मापदंडों में राहत दी है।

22. FSWM फ्रेमवर्क के तहत पेनल्टी क्लॉज से राहत: RBI ने दिनांक 04.12.2025 के मास्‍टर निर्देश द्वारा FSWM फ्रेमवर्क को ECBA मानदंडों से बदल दिया है और पिछले दो सालों में पेनल्टी न होने की शर्त को हटा दिया है, जिससे सहकारी बैंकों को अपने व्‍यवसाय का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

(छ) राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) का विस्तार

1. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा सहकारी समितियों के लिए नई योजनाओं की शुरुआत

सहकारिता मंत्रालय (MoC) के अंतर्गत “राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को अनुदान सहायता” योजना को NCDC के माध्यम से लागू किया गया है, जिसकी कुल लागत 2,000 करोड़ रुपये है और यह योजना 2025-26 से 2028-29 की चार वर्षों की अवधि के लिए है। इस योजना के अंतर्गत NCDC को कुल 2,000 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया जाएगा (वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2028-29 तक प्रत्येक वर्ष 500 करोड़ रुपये)। चालू वित्त वर्ष में 375 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न क्षेत्रों में कई नई योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं, जैसे—स्वयं सहायता समूहों के लिए ‘स्वयंशक्ति सहकार’; दीर्घकालीन कृषि ऋण के लिए ‘दीर्घावधि कृषक सहकार’; डेयरी क्षेत्र के लिए ‘डेयरी सहकार’ तथा महिला सहकारी संस्थाओं के लिए ‘नंदिनी सहकार’ आदि।

वित्त वर्ष 2024-25 में, NCDC द्वारा कुल 95,183 करोड़ रुपये का वितरण किया गया तथा वित्तीय सहायता के वितरण में 60% की वृद्धि हासिल की गई। अगले तीन वर्षों में लगभग 1,50,000 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक NCDC द्वारा 95,000 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है। सभी राज्य एवं राज्य सहकारी समितियाँ NCDC की ऋण योजनाओं का लाभ उठा सकती हैं। भारत सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को निर्धारित शर्तों एवं नियमों के अनुपालन के अधीन सरकार की गारंटी के साथ 2,000 करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड जारी करने की अनुमति भी प्रदान की है।

2. सहकार टैक्सी (SAHKAR TAXI)

ओला/उबर की तर्ज पर एक सहकारी टैक्सी सेवा ऐप पंजीकृत किया गया है, जिसमें बाइक/टैक्सी चालक सीधे सहकारी समिति के सदस्य होते हैं। इस सेवा का उद्देश्य न्यूनतम कमीशन कटौती के साथ चालकों को अधिक पारिश्रमिक प्रदान करना है, साथ ही किफायती लागत पर ग्राहकों को सर्वोत्तम अनुभव उपलब्ध कराना है।

इस सहकारी संस्था को अमूल, NAFED, NABARD, IFFCO, KRIBHCO, NDDB एवं NCEL द्वारा प्रोत्साहित किया गया है, जिसका अधिकृत शेयर पूंजी 300 करोड़ रुपये है। NCR और गुजरात में ट्रायल रन के दौरान ऐप पर 1,50,000 से अधिक चालक और 2,00,000 ग्राहक पहले ही पंजीकृत हो चुके हैं। प्रस्तावित आधिकारिक शुभारंभ (जनवरी) से पूर्व ट्रायल रन में प्रतिदिन 5,000 से अधिक यात्राएँ की गई हैं। इस योजना के 2029 तक देशव्यापी उपस्थिति प्राप्त करने की संभावना है।

3. एनसीडीसी द्वारा गहरे समुद्री ट्रौलरों हेतु वित्तीय सहायता

एनसीडीसी ने गहरे समुद्र में ट्रॉलरों के वित्तपोषण का कार्य शुरू किया है। इसके लिए एनसीडीसी द्वारा विभिन्न वित्तीय सहायताएँ स्वीकृत की गई हैं जैसे; 20.30 करोड़ रुपये की ब्लॉक लागत पर महाराष्ट्र में 14 गहरे समुद्री ट्रॉलरों की खरीद के लिए 11.55 करोड़ रुपये, राजमाता विकास मच्छीमार सहकारी संस्था लिमिटेड, मुंबई को 46.74 करोड़ रुपये की ब्लॉक लागत पर समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए 37.39 करोड़ रुपये, केरल सरकार की एकीकृत मत्स्य पालन विकास परियोजना (आईएफडीपी) के लिए 32.69 करोड़ रुपये एवं एनसीडीसी ने 36.00 करोड़ रुपये की ब्लॉक लागत के साथ 30 गहरे समुद्री ट्रॉलर खरीदने के लिए श्री महावीर मच्छीमार सहकारी मंडली लिमिटेड, गुजरात के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

(ज) जेम पोर्टल पर सहकारी समितियां बतौर क्रेताके रूप में शामिल

1. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 1 जून, 2022 को कैबिनेट द्वारा सहकारी समितियों को गवर्मेंट ई-मार्केटप्‍लेस (जेम) पर बतौर ‘क्रेता’ पंजीकृत होने का अनुमोदन प्रदान किया है I माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 09 अगस्त 2022 को नई दिल्ली में GeM पोर्टल पर सहकारी समितियों की ऑनबोर्डिंग का ई-लॉन्च किया। सहकारी समितियां जेम के एकल प्लेटफॉर्म से देश भर में उपलब्ध लगभग 67 लाख प्रामाणिक विक्रेताओं/सेवा प्रदाताओं से खरीद कर सकेंगीI अब तक 721 सहकारी समितियों को जेम पोर्टल पर क्रेता के रूप में ऑनबोर्ड कर लिया गया है l इसके साथ ही सहकारी समितियों को जेम पर विक्रेता के रूप में भी पंजीकरण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है l इन सहकारी समितियों द्वारा अब तक, 3,285 लेन-देन हुआ हैं, जिनकी राशि 396.77 करोड़ रुपये है।

(झ) नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति एवं नया राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस

1.नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का निर्माण

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ‘सहकार से समृद्धि’की परिकल्पना को साकार करने हेतु माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी ने देश में नई सहकारिता नीति बनाने का निर्णय लिया l इसके लिए राष्ट्रीय स्तर की समिति का गठन किया गया l पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुरेश प्रभु के नेतृत्व में विभिन्न राज्यों तथा देश भर से लिए गए विशेषज्ञों व हितधारकों सहित  48 सदस्यों को इस समिति में शामिल किया गया है। विशेषज्ञ समिति की अब तक 17 बैठकें हो चुकी हैं, जिनके दौरान हितधारकों से विस्तृत विचार-विमर्श हुए हैं और नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का कार्य शीघ्र ही पूर्ण होने की आशा है l

(ञ) नए राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) का निर्माण

1. प्रामाणिक और अद्यतन डेटा भंडार के लिए नया राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस: देश भर में सहकारी समितियों से संबंधित कार्यक्रमों/योजनाओं के नीति निर्माण और कार्यान्वयन में हितधारकों की सुविधा के लिए राज्य सरकारों के सहयोग से सहकारी समितियों का एक व्यापक डेटाबेस विकसित किया गया है। अब तक, डेटाबेस में 30 विभिन्न क्षेत्रों की लगभग 8.4 लाख सहकारी समितियों का डेटा शामिल है, जिनमें लगभग 32 करोड़ सदस्य हैं।

2. सहकारी रैंकिंग रूपरेखा: सरकार ने सहकारी समितियों का राज्यवार और क्षेत्रवार मूल्यांकन और रैंकिंग करने के लिए 24 जनवरी 2025 को सहकारी रैंकिंग रूपरेखा का शुभारंभ किया। यह रैंकिंग रूपरेखा राज्य सहकारी समितियों को लेखापरीक्षा अनुपालन, परिचालन गतिविधियों, वित्तीय प्रदर्शन, बुनियादी ढांचे और बुनियादी पहचान संबंधी जानकारी सहित प्रमुख मापदंडों के आधार पर सहकारी समितियों के प्रदर्शन का आकलन करने में सक्षम बनाता है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, एनसीडी पोर्टल के माध्यम से राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर सहकारी समितियों की रैंकिंग तैयार कर सकते हैं, जिनमें प्रारंभ में 12 प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं: पैक्स, डेयरी, मत्स्य पालन, शहरी सहकारी बैंक, आवास, ऋण और बचत, खादी और ग्राम उद्योग, कृषि प्रसंस्करण/औद्योगिक, हस्तशिल्प, हथकरघा, वस्त्र और बुनकर, बहुउद्देशीय और चीनी। इस रैंकिंग प्रणाली का उद्देश्य सहकारी समितियों के बीच पारदर्शिता, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है, जिससे अंततः उनके विकास को बढ़ावा मिलेगा।

3. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एपीआई के माध्यम से राज्य आरसीएस पोर्टल को एनसीडी पोर्टल से एकीकृत करने की सुविधा: सहकारिता मंत्रालय (MoC) ने राज्यों के लिए एनसीडी पोर्टल से राज्य की सहकारी समितियों का संपूर्ण डेटा अपने संबंधित आरसीएस पोर्टलों में लाने के लिए एक मानक एपीआई विकसित किया और 27.05.2025 को राज्यों के साथ मानक एपीआई विनिर्देश दस्तावेज़ और डेटाबेस स्कीमा साझा किया। इसके बाद, मंत्रालय ने 22.09.2025 को आरसीएस पोर्टलों से एनसीडी पोर्टल पर लाइव, इवेंट-ड्रिवन डेटा पुश करने के लिए पुश एपीआई (एंड पॉइंट एपीआई) पर दस्तावेज़ साझा किया, जिससे वास्तविक समय में अपडेट और नए पंजीकरण डेटा प्राप्त हो सके। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार राज्यों ने एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण पूरा कर लिया है। अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के आरसीएस पोर्टलों को एनसीडी पोर्टल के साथ सुगम एकीकरण की सुविधा प्रदान करने के लिए, 14.11.2025 को सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श के साथ एक व्यापक चेकलिस्ट जारी की गई।  एकीकरण योजना के अनुसार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने स्तर पर रिवर्स/पुल एपीआई विकसित करें और एनसीडी पोर्टल के साथ सफल एकीकरण के लिए चेकलिस्ट के अनुसार आरसीएस का पूर्ण कम्प्यूटरीकरण करें। यह दोतरफा एकीकरण सभी प्लेटफार्मों पर सहकारी डेटा के सिंक्रनाइज़ेशन को सुनिश्चित करेगा।

(ट) सहकारिता क्षेत्र में शिक्षण एवं प्रशिक्षण

1. सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना

माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी का विचार है कि प्रशिक्षित श्रमबल से ही सहकारिता क्षेत्र का सुनियोजित विकास और सशक्तिकरण हो सकता है और इसके लिए राष्ट्रीय त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की कल्पना की गयी l सहकारी शिक्षण, प्रशिक्षण, परामर्श, अनुसंधान एवं विकास के लिए राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की योजना भी तैयार की जा रही है। यह विश्वविद्यालय प्रशिक्षित श्रमबल की स्थायी, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ मौजूदा कार्मिकों की क्षमता निर्माण भी करेगा। यह विश्वविद्यालय सहकारिता के क्षेत्र में अपनी तरह का पहला विशेषीकृत विश्वविद्यालय होगाl

2. एनसीसीटी के माध्यम से प्रशिक्षण एवं जागरूकता को प्रोत्साहन

राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (NCCT), सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है जो राज्यों/ केंद्र शासित राज्यों के सहकारी विभागों के कर्मियों सहित देश भर के सहकारी समितियों के कार्मिकों, सदस्यों एवं बोर्ड के सदस्यों के लिए सहकारी शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों का संचालन यह देश भर में फैले अपने 20 घटक प्रशिक्षण संस्थानों (1 राष्ट्रीय स्तर-वैमनिकॉम, 14 राज्य स्तर एवं 5 क्षेत्रीय स्तर) के माध्यम से करता है। NCCT ने वर्ष 2023-24 में  देश में निर्धारित लक्ष्य 1,740 प्रशिक्षण कार्यक्रम की तुलना में 3,619 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये। इसके अलावा इस अवधि में परिषद ने निर्धारित 43,500 प्रतिभागियों से पांच गुना अधिक यानी लगभग 2,21,478 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया l 

  अप्रैल से नवंबर 2024 तक, NCCT द्वारा 2,694 कार्यक्रम आयोजित किए गए है और 2,14,742 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त, एनसीसीटी और इसके संस्थान अनेक पुस्तक समीक्षाएं, केस अध्ययन, प्रबंधन मामले और लेख तैयार करते हैं, जिनमें सहकारी क्षेत्र में ज्ञान विकास और अकादमिक योगदान के प्रति उनकी सतत प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला जाता है।

(ठ) अन्य पहलें

1. सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDBs) का कम्प्यूटरीकरण

दीर्घावधि सहकारी ऋण संरचना के सुदृढ़ीकरण हेतु सहकारिता मंत्रालय ने कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDBs) की 1,422 इकाइयों के कंप्यूटरीकरण की केंद्र प्रायोजित परियोजना को मंजूरी दी है। इसमें विभिन्न घटक होंगे जैसे कि हार्डवेयर खरीद, व्यापक उद्यम संसाधन योजना (ईआरपी) समाधान, डिजिटलीकरण, प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करना, और सॉफ्टवेयर का रखरखाव, आदि। इस योजना में आने वाले खर्च का 25 प्रतिशत ARDBs द्वारा एवं शेष 75 प्रतिशत केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाएगा l कंप्यूटरीकरण से ARDBs को विभिन्न लाभ प्राप्त होंगे, जैसे कार्यकुशलता में वृद्धि, त्वरित ऋण संवितरण, लेनदेन दरों में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि और भुगतानों के असंतुलनों में कमी इत्यादिI परियोजना के तहत अब तक  10 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों को स्वीकृति दी जा चुकी है I इसके अलावा, हार्डवेयर की खरीद, डिजिटलीकरण और समर्थन प्रणाली की स्थापना के लिए वित्त वर्ष 2023-24, 2024-25 और वित्त वर्ष 2025-26 में 8 राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों को ₹10.11 करोड़ की भारत सरकार की हिस्सेदारी जारी की गई है। माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री जी श्री अमित शाह जी द्वारा 30 जनवरी, 2024 को पूसा, नई दिल्ली में इस योजना का शुभारंभ किया गया l

2. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के कंप्यूटरीकरण की योजना

सहकारी समितियों के लिए व्यापार करने में सुगमता बढ़ाने तथा सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पारदर्शी और कागज-रहित विनियमन हेतु एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने के उद्देश्य से, सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण के लिए एक केंद्रीय प्रायोजित योजना को स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के अंतर्गत विकसित किया जाने वाला सॉफ्टवेयर संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी अधिनियम पर आधारित होगा।

माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 30 जनवरी, 2024 को ‘सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण’ परियोजना का शुभारंभ किया। अब तक 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने मंत्रालय को अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं तथा हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर की खरीद के लिए प्रथम किश्त के रूप में लगभग 15.20 करोड़ रुपये की राशि 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वितरित की जा चुकी है।

3. श्वेत क्रांति 2.0

सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी नेतृत्व वाली “श्वेत क्रांति 2.0” को आगे बढ़ाने के लिए एक पहल प्रारंभ की है, जिसका उद्देश्य सहकारी कवरेज का विस्तार करना, रोजगार सृजन करना तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इस पहल का उद्देश्य है—“अगले पाँच वर्षों में, अपवंचित/अपर्याप्त रूप से आच्छादित क्षेत्रों में दुग्ध किसानों को बाजार तक पहुँच प्रदान करके तथा संगठित क्षेत्र में डेयरी सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाकर, वर्तमान स्तर की तुलना में डेयरी सहकारी समितियों द्वारा दूध की खरीद में 50% की वृद्धि करना।”

श्वेत क्रांति 2.0 के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) का शुभारंभ 19.09.2024 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा, माननीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री की उपस्थिति में किया गया। 25.12.2024 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने, माननीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री की उपस्थिति में, 6,600 नवस्थापित डेयरी सहकारी समितियों का उद्घाटन किया। अब तक 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 20,070 डेयरी सहकारी समितियाँ (DCSs) पंजीकृत की जा चुकी हैं।

4. आत्मनिर्भरता अभियान

सहकारिता मंत्रालय ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दालों (तुअर, मसूर एवं उड़द) के उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु एथेनॉल उत्पादन में उपयोग के लिए मक्का के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक पहल प्रारंभ की है। इस पहल के अंतर्गत नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन (NCCF) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) को केंद्रीय नोडल एजेंसियाँ नामित किया गया है, जिन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों के पंजीकरण हेतु क्रमशः ई-सम्युक्ति (NCCF) और ई-समृद्धि (NAFED) पोर्टल विकसित किए हैं।

तुअर, उड़द और मसूर दालों के पूर्व-पंजीकृत किसानों के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 100% उपज की खरीद की गारंटी दी है। हालांकि, यदि बाजार मूल्य MSP से अधिक होता है, तो किसान अधिक लाभ के लिए अपनी उपज खुले बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसी प्रकार, दोनों एजेंसियाँ तीनों मौसमों—खरीफ, जायद एवं रबी—के दौरान पूर्व-पंजीकृत किसानों से मक्का की 100% खरीद की गारंटी देती हैं, जिससे एथेनॉल डिस्टिलरियों को मक्का की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होती है और साथ ही किसानों को मक्का की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

वर्तमान में, कुल 56,673 PACS/FPOs तथा 54,74,499 किसानों ने उपरोक्त पोर्टलों पर स्वयं को पंजीकृत कराया है, तथा दोनों एजेंसियों द्वारा अब तक 9,08,332 मीट्रिक टन दालों (तुअर, मसूर एवं उड़द) और 45,105 मीट्रिक टन मक्का की खरीद की जा चुकी है।

5 .सहारा समूह की सहकारी समितियों के निवेशकों को रिफंड

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में, सहकारिता मंत्रालय ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की।

सहकारिता मंत्रालय की याचिका पर, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 29.03.2023 के आदेश द्वारा सहारा–सेबी रिफंड खाते से 5,000 करोड़ रुपये की राशि चार सहारा समूह की सहकारी समितियों (सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव लिमिटेड, सहारायण यूनिवर्सल मल्टीपर्पस सोसाइटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड एवं स्टार्स मल्टीपर्पस कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड) के जमाकर्ताओं के वैध बकाया के वितरण हेतु सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया।

माननीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 18 जुलाई, 2023 को नई दिल्ली में ‘केंद्रीय रजिस्ट्रार – सहारा रिफंड पोर्टल’ (https://mocrefund.crcs.gov.in) का शुभारंभ किया।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा वितरण हेतु, पूर्व न्यायाधीश की निगरानी एवं पर्यवेक्षण में एक पारदर्शी डिजिटल प्रणाली (पोर्टल) विकसित करने के लिए स्टॉकहोल्डिंग डॉक्यूमेंट्स मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड (SDMSL) को नियुक्त किया गया है।

उपरोक्त प्रत्येक सहकारी समिति के लिए धनवापसी प्रक्रिया की निगरानी हेतु केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा विशेष कार्य अधिकारी (OSD) भी नियुक्त किए गए हैं। जमाकर्ताओं को भुगतान की प्रक्रिया 04 अगस्त, 2023 से प्रारंभ हो चुकी है।

मंत्रालय द्वारा दायर एक अंतरिम आवेदन (IA) पर, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 12.09.2025 के आदेश द्वारा सहारा–सेबी रिफंड खाते से अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपये की राशि चार सहारा समूह की सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं के वैध बकाया के वितरण हेतु सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया। 22.12.2025 तक, ‘CRCS–सहारा रिफंड पोर्टल’ पर लगभग 1.42 करोड़ आवेदन (96,555 करोड़ रुपये के दावे) प्राप्त हुए हैं। सहारा समूह की सहकारी समितियों के 37,48,190 जमाकर्ताओं को लगभग 7,562.33 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।

क्रियान्वयन प्रक्रिया

1. माननीय सहकारिता गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मंत्रालय की पहलों के सफल क्रियान्वन हेतु पत्र लिखे गए हैं l सचिव सहकारिता द्वारा भी समय समय पर योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव एवं अन्य सम्बंधित अधिकारियों को पत्र लिखे गए हैं l

2. राष्ट्रीय स्तर पर सचिव सहकारिता मंत्रालय की अध्यक्षता में सभी सम्बन्धित विभागों, एजेंसीज़ एवं राज्य सरकारों के साथ विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से नियमित रूप से समीक्षा बैठकें की जा रही हैं l अब तक सभी राज्यों के साथ 22 समीक्षा बैठके हो चुकी हैं l

3. राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नियमित समीक्षा हेतु राज्य सहकारी विकास समितियां (एससीडीसी) गठित की गईं हैं, जिनमें प्रमुख सचिव (सहकारिता), रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (आरसीएस), नाबार्ड/एनसीडीसी आदि के प्रतिनिधि और सम्बंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। l अब तक राज्य स्तरीय सहकारी विकास समितियों की 86 बैठकें सम्पन्न हो चुकी है l

4. जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में नियमित समीक्षा हेतु जिला सहकारी विकास समितियों (डीसीडीसी) गठित की गई हैं, जिनमें डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव रजिस्ट्रार्स (डीआरसीएस) और सम्बंधित विभागों के जिला स्तर के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। अब तक जिला स्तरीय सहकारी विकास समितियों की 2,735 बैठकें सम्पन्न हो चुकी हैं l

 

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