राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2020 का क्रियान्वयन
राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2020 का क्रियान्वयन
राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति – 2020 केवल एक ड्राफ़्ट दस्तावेज था, इसलिए, इसके तहत कोई बजट आवंटन या व्यय नहीं किया गया था। हालांकि, इस मसौदे के बाद, सरकार ने देश के अनुसंधान और विकास इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई नई पहल, योजनाएं और मिशन शुरू किए हैं। इनमें शामिल हैं: अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना, छह वर्षों में एक लाख करोड़ रुपए के वित्तीय पूल के साथ; केंद्र सरकार से 14,000 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की स्थापना और गैर-सरकारी स्रोतों से अतिरिक्त धन का पता लगाया जाएगा; राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (बजट परिव्यय: 6,003.65 करोड़ रुपए )आदि।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा प्रकाशित अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, 2025 की निर्देशिका के अनुसार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि, चिकित्सा, रक्षा, अंतरिक्ष आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में 622 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं और अनुसंधान संस्थान हैं। भारत की राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं और अनुसंधान संस्थान विशुद्ध रूप से ज्ञान जनरेटर से नवाचार आधारित आर्थिक विकास में सक्रिय योगदानकर्ता बनने के लिए लगातार विकसित हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों से नवाचारों के वाणिज्यीकरण के लिए तंत्र को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यालयों (टीटीओ), इनक्यूबेशन केंद्रों, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और संरचित लाइसेंसिंग मॉडल के माध्यम से सक्रिय रूप से मजबूत किया गया है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय द्वारा नवाचार उत्कृष्टता संकेतकों के मूल्यांकन पर हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में कुछ उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं:
राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं/संस्थानों के अनुसंधान स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण, परिवहन और बुनियादी ढांचे, पशुधन और खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा आदि जैसे उद्योगों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देते हैं
सार्वजनिक अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाएं/संस्थान डीप ओशन एक्सप्लोरेशन मिशन, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मिशन, नेशनल क्वांटम मिशन आदि जैसे राष्ट्रीय मिशनों का नेतृत्व कर रहे हैं।
2021-22 से 2022-23 के दौरान 233 संस्थानों से 1622 पेटेंट दाखिल किए गए हैं, जबकि 232 संस्थानों को 1356 पेटेंट प्रदान किए गए हैं। दूसरी ओर, दो साल की अवधि में 1839 प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित किया गया, 1014 नए उत्पाद और 1746 नई सेवाएं शुरू की गईं।
सूचना के आदान-प्रदान, नए ज्ञान का सृजन, विशेषज्ञता साझा करने, संसाधनों का प्रभावी उपयोग आदि जैसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग सहित सरकार द्वारा किए गए प्रयासों ने वैश्विक वैज्ञानिक स्थिति में भारत की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।आज भारत कुल शोध प्रकाशनों की संख्या के मामले में तीसरे स्थान पर है; कुल स्टार्टअप्स की संख्या में तीसरे स्थान पर; प्रदान की गई पीएचडी उपाधियों की संख्या के आधार पर चौथे स्थान पर; तथा पेटेंट दाखिल करने की गतिविधियों में छठे स्थान पर है। इसके अतिरिक्त, भारत की वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index – GII) रैंकिंग में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है, जो वर्ष 2015 में 81वें स्थान से बढ़कर वर्ष 2025 में विश्व की 139 अर्थव्यवस्थाओं में 38वें स्थान पर पहुँच गई है।
आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी तकनीकी विकास और नवाचार को प्रोत्साहित करने की रणनीति के हिस्से के रूप में, सरकार अपनी नई पहलों, मिशनों और कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अपनी अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को उन्मुख कर रही है: 1.0 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष का शुभारंभ; अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की स्थापना; राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम); अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएम-आईसीपीएस); राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन; आदि। इसके अलावा, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम लागू किए गए हैं, जैसे कि नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन (एनआईडीएचआई), बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) कार्यक्रम, इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स), टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ), और टीआईडीई 2.0 (टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन एंड डेवलपमेंट ऑफ एंटरप्रेन्योर्स)। इन सभी पहलों को अपने नागरिकों के लिए तकनीकी कौशल, तकनीकी समाधान, स्वदेशीकरण, आजीविका और रोजगार उत्पन्न करने और वैश्विक समकक्षों की तुलना में भारत को प्रतिस्पर्धी स्तर पर स्थापित करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा गया है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।