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महत्वपूर्ण खनिजों की स्वदेश में खोज और उपलब्धता

महत्वपूर्ण खनिजों की स्वदेश में खोज और उपलब्धता

परमाणु ऊर्जा विभाग की संघटक इकाई परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) का प्रमुख अधिदेश देश के संभावित भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में यूरेनियम और थोरियम खनिजों के अलावा महत्वपूर्ण तत्वों जैसे नायोबियम, टेंटलम, बेरिलियम, लिथियम, जिर्कोनियम, टाइटेनियम तथा यूरेनियम और थोरियम युक्त विरल मृदा के खनिज संसाधनों की पहचान, मूल्यांकन और संवर्द्धन करना है जो भारत की नाभिकीय ऊर्जा और सामरिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक है।

अब तक एएमडी द्वारा निम्नलिखित संसाधन खोजे गए हैं-

इसके अलावा 149.129 टन कोलंबाइट-टेंटलाइट (एनबी-टीए खनिज), 4250.059 टन बेरिल (बीई खनिज), 3296.679 टन लेपिडोलाइट (एलआई खनिज), 72.151 टन स्पोडुमिन (एलआई खनिज), 4.212 टन एंब्लिगोनाइट (एलआई खनिज) और 123.763 टन जिनोटाइम (वाई खनिज) युक्त भारी खनिज सांद्रण का भंडारण किया गया है।

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, मेघालय, राजस्थान, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में 439800 टन (टी) स्थानिक यू-ऑक्साइड संसाधन का पता लगाया गया है। देश में उत्पादित यूरेनियम का उपयोग स्वदेशीरूप से संरक्षित रिएक्टरों में किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय नाभिकीय ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा उपायों के अधीन आने वाले रिएक्टरों के माध्यम से उत्पादित भारत की नाभिकीय ऊर्जा के लिए आवश्यक यूरेनियम का आयात किया जा रहा है।

भारत के नाभिकीय ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की स्वदेश में खोज को बढ़ाने के लिए, एएमडी ने एकीकृत और बहुआयामी अन्वेषण रणनीति (हेलीबोर्न और ग्राउंड भूभौतिकीय सर्वेक्षण, ग्राउंट भूवैज्ञानिक, भूरासायनिक और रेडियोमेट्रिक सर्वेक्षण और ड्रिलिंग सहित) को अपनाया है। इससे देश में निर्धारित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रमुख और रणनीतिक खनिजों के संसाधनों का संवर्द्धन किया जा सकेगा।

परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड नाभिकीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए टाइटेनियम युक्त खनिज, जिर्कोन युक्त खनिज और विरल मृदा तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन करता है। केरल सरकार का सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (पीएसई) केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड (केएमएमएल) भी इसी तरह की गतिविधियों में संलग्न है। आईआरईएल तीन स्थानों पर काम कर रहा है जहां खनिज रेत के एकीकृत खनन और प्रसंस्करण तथा विरल मृदा के निष्कर्षण और शोधन की सुविधा है। आईआरईएल को तीन भंडारों (ओडिशा में दो और तमिलनाडु में एक) के लिए आशयपत्र प्रदान किया गया है। आंध्र प्रदेश में एक भंडार के लिए उसे संभावित पट्टेदार के रूप में नामित किया गया है ताकि इन खनिजों की प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाया जा सके। इसके लिए पूर्व परियोजना गतिविधियां चल रही हैं।

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