भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: भारत के वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र के लिए एक बदलावकारी व्यापार समझौता
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: भारत के वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र के लिए एक बदलावकारी व्यापार समझौता
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की है, जो भारत की सबसे रणनीतिक आर्थिक साझेदारियों में से एक में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नियम–आधारित व्यापार साझेदारी पर आधारित यह एफटीए समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान करते हुए विश्व की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे बाजार एकीकरण को सक्षम बनाता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद, यूरोपीय संघ भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा गंतव्य है। यूरोपीय संघ का कुल वैश्विक वस्त्र एवं परिधान आयात 2024 में 263.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो भारतीय वस्त्र निर्यातकों के लिए यूरोपीय संघ के बाजार के बड़े स्तर और दीर्घकालिक क्षमता को रेखांकित करता है। बीते 5 वर्ष में यूरोपीय संघ में भारत के वस्त्र निर्यात में भी सकारात्मक बढ़ोतरी देखी गई है। यूरोपीय संघ में भारत का वस्त्र निर्यात कई वैल्यू–एडेड और श्रम–प्रधान क्षेत्रों में फैला हुआ है। रेडीमेड कपड़े (आरएमजी) निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा (~60%) हैं, इसके बाद सूती कपड़े (17%) और मानव निर्मित फाइबर और एमएमएफ कपड़े (12%) आते हैं। हस्तशिल्प (4%), कालीन (4%), जूट उत्पाद (1.5%), ऊनी उत्पाद (0.6%), हथकरघा (0.6%) और रेशमी उत्पाद (0.2%) यूरोपीय संघ में भारत के वस्त्र निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प के श्रम–प्रधान क्षेत्रों, कारीगरी और लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के माध्यम से कार्यान्वित भारत के यूरोपीय बाजार के साथ वस्त्र व्यापार के स्वरूप को रेखांकित करते हैं।
वस्त्र और परिधानों पर सभी शुल्क श्रेणियों को कवर करते हुए शून्य शुल्क रखने और टैरिफ में 12% तक की कमी करने से यूरोपीय संघ का 22.9 लाख करोड़ रुपये (263.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आयात बाजार खुल जाएगा। भारत का मौजूदा 3.19 लाख करोड़ रुपये (36.7 अरब अमेरिकी डॉलर) का वैश्विक वस्त्र और परिधान निर्यात, जिसमें यूरोपीय संघ को 62.7 हजार करोड़ रुपये (7.2 अरब अमेरिकी डॉलर) का निर्यात शामिल है, को देखते हुए, इस प्रकार की पहुंच से मौकों में, खासकर सूती धागे, मानव निर्मित फाइबर परिधान, रेडीमेड कपड़े, पुरुषों और महिलाओं के कपड़े और घर वाले वस्त्रों के क्षेत्र में, बड़ा विस्तार होगा। इससे एमएसएमई का विस्तार करने, रोजगार निर्माण करने और एक विश्वसनीय, संपोषित और हाई–वैल्यू सोर्स वाले सहयोगी के तौर पर भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
यह मुक्त व्यापार समझौता बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले लंबे समय से चली आ रही टैरिफ संबंधी असमानता को दूर करता है। यह समझौता श्रम प्रधान उद्योगों इत्यादि को निश्चित तौर पर प्रोत्साहन देता है, जिससे मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है और दुनिया के सबसे जटिल उपभोक्ता बाजारों में से एक में बाजार पहुंच का विस्तार होता है।
भारत में वस्त्र क्षेत्र में प्रत्यक्ष तौर पर करीब 45 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करता है। यूरोपीय संघ के बाजार तक बेहतर पहुंच से पूरे श्रम–प्रधान एमएसएमई समूहों (एमएसएमई) में उत्पादन, क्षमता उपयोग और रोजगार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। यह मुक्त व्यापार समझौता निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थिरता आधारित अपग्रेडेशन को भी प्रोत्साहित करेगा, विशेष रूप से एमएमएफ, तकनीकी वस्त्रों और यूरोपीय संघ के मानकों के अनुसार ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।
घरेलू साज–सज्जा, लकड़ी के शिल्प और फर्नीचर के लिए महत्वपूर्ण बाजार पहुंच
10.5% तक शुल्क में कमी से बाजार पहुंच में सुधार हुआ है, जिससे भारतीय लकड़ी, बांस और हस्तशिल्प फर्नीचर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है। एफटीए उच्च मूल्य वाले, डिजाइन–आधारित क्षेत्रों में बढ़ोतरी को बढ़ावा देता है और वैश्विक फर्नीचर आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
जिला–स्तर और क्लस्टर प्रभाव – व्यापक भागीदारी और क्षेत्रीय समावेशिता को प्रतिबिंबित करता है।
भारत का यूरोपीय संघ को वस्त्र निर्यात एक विस्तृत और भौगोलिक रूप से फैले मैन्युफैक्चरिंग बेस से होता है, जिसमें देश भर के 342 जिले वस्त्र और परिधान उत्पादों का निर्यात करते हैं, जो व्यापक भागीदारी और क्षेत्रीय समावेशिता को प्रतिबिंबित करता है। प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करके और प्रमुख क्लस्टरों में रोजगार को बढ़ावा देकर भारत–ईयू एफटीए से टेक्सटाइल सेक्टर इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ईयू में भारत का वस्त्र निर्यात क्लस्टर–आधारित इकोसिस्टम से जुड़ा हुआ है। तिरुप्पुर, बेंगलुरु और गुरुग्राम–फरीदाबाद में रेडीमेड कपड़ों का उत्पादन होता है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, निर्माण होता है। करूर, पानीपत और अहमदाबाद से सूती वस्त्र और घरेलू साज–सज्जा का उत्पादन जुड़ा है, जबकि सूरत, दादरा और नगर हवेली व मुंबई से एमएमएफ और सिंथेटिक कपड़ों का उत्पादन जुड़ा है, जो ब्लेंडेड और मानव निर्मित फाइबर उत्पादों में भारत की उपस्थिति मजबूत करती है। मुरादाबाद, जयपुर और जोधपुर के हस्तशिल्प, कांचीपुरम, करूर और कोलकाता के हथकरघा, भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी के कालीन, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के जूट उत्पाद और बेंगलुरु, मैसूर और भागलपुर के रेशम और ऊनी वस्त्रों से पारंपरिक और वैल्यू–एडेड क्षेत्रों को मदद मिलती है।
टैरिफ उदारीकरण से परे
टैरिफ में कमी के अतिरिक्त, भारत–ईयू एफटीए मजबूत नियामक सहयोग, सीमा शुल्क सुविधा, पारदर्शिता और पूर्वानुमानित व्यापार नियमों के माध्यम से गैर–टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए व्यापक उपाय प्रदान करता है।
भारत–ईयू एफटीए, यूके और ईएफटीए के साथ भारत के मुक्त समझौतों के साथ मिलकर, भारतीय व्यवसायों, निर्यातकों और उद्यमियों के लिए यूरोपीय बाजार को प्रभावी रूप से खोलता है। ईयू के साथ एफटीए वस्त्र मंत्रालय के निर्यात विविधीकरण के प्रयासों को और मजबूत व तेज करने की उम्मीद है।
भारत के “विकसित भारत 2047″ के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत–ईयू एफटीए साझा मूल्यों को सुदृढ़ करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और भारत को एक प्रतिस्पर्धी, भरोसेमंद और दूरदर्शी वैश्विक वस्त्र और परिधान केंद्र के तौर पर स्थापित करता है, जो भारत और यूरोप दोनों के लिए समावेशी, तन्यकशील और भविष्य के लिए तैयार प्रगति की नींव रखता है।