भारत में बौद्धिक संपदा (आईपी) फाइलिंग में पांच वर्षों में 44% की बढोतरी, नीतिगत सुधार और डिजिटलीकरण प्रमुख कारण रहे
भारत में बौद्धिक संपदा (आईपी) फाइलिंग में पांच वर्षों में 44% की बढोतरी, नीतिगत सुधार और डिजिटलीकरण प्रमुख कारण रहे
भारतीय नागरिकों द्वारा पिछले पांच वर्षों में भारत में दायर किए गए आईपी आवेदनों की कुल संख्या का ब्योरा निम्नानुसार तालिका में दिया गया है:-
आईपी/वित्त वर्ष
पेटेंट
डिजाइन
ट्रेड मार्क्स
कॉपीराइट
जीआई
एसआईसीएलडी
2020-21
24,326
10,594
4,18,594
23,957
57
5
2021-22
29,508
19,245
4,34,084
30,748
116
2
2022-23
43,301
18,170
4,53,325
29,439
210
8
2023-24
51,574
26,536
4,63,108
36,710
134
2
2024-25
68,176
38,804
5,38,665
44,066
274
6
पिछले पांच वर्षों में आईपी दायर करने में 44% की वृद्धि हुई है। इनकी संख्या वर्ष 2020-21 के 4,77,533 से बढ़ते हुए वर्ष 2024-25 में 6,89,991 हो गई है। सबसे अधिक वृद्धि भौगोलिक संकेतकों (जीआई) में देखी गई, जिसमें 380% की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद डिज़ाइन (266%), पेटेंट (180%), कॉपीराइट (83%), व्यापार चिन्ह (28%), और सेमीकंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट लेआउट-डिज़ाइन (एसआईसीएलडी) में 20% की वृद्धि हुई।
(ग): सरकार ने भारत में बौद्धिक संपदा (आईपी) गतिविधियों को बढ़ाने, नवप्रयोग को प्रोत्साहन देने और आईपी दायर करने को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:
1- आईपी आवेदनों पर कार्रवाई को सुचारू करने और सरल बनाने, अनियमितताओं व बाधाओं को दूर करने, आईटी और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ाने के लिए आईपी कानूनों और नियमों में संशोधन किए गए हैं।
पेटेंट
व्यापार चिह्नः
डिज़ाइन
डिज़ाइन आवेदनों पर कार्यवाही की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है।
लोकार्नो करार के तहत अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण व्यवस्था को अपनाया गया।
कॉपीराइट:
भौगोलिक संकेतक:
2- स्टार्टअप्स, एमएसएमई और शैक्षणिक संस्थानों को शुल्क में व्यापक रियायतें दी गई हैं।
3- जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रावधान शुरू किए गए हैं
4- पेटेंट प्राप्त आविष्कारों में आविष्कारकों के योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देने और नवप्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए पेटेंट में ‘आविष्कार प्रमाण-पत्र‘ की शुरुआत की गई है।
5- आईपी कार्यालयों का आधुनिकीकरण
क– आईपी कार्यालयों को डिजिटाइज किया गया है और उन्हें ऑनलाइन बनाया गया है ताकि प्रणाली को अधिक सुगठित, समयबद्ध, पारदर्शी और आवेदकों के साथ-साथ परीक्षकों तथा रजिस्ट्रार/नियंत्रकों के लिए उपयोग लाए जाने हेतु आसान बनाया जा सके। पेटेंट, डिजाइन और व्यापार चिह्न आवेदनों व दस्तावेजों की ऑनलाइन फाइलिंग और प्रस्तुतीकरण के लिए व्यापक ई- फाइलिंग प्रणाली शुरू की गई है। आवेदकों को अब अपने पेटेंट और ट्रेडमार्क आवेदनों को दायर करने और उन पर कार्यवाही के लिए आईपी कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं है। 95% से अधिक पेटेंट और व्यापार चिह्न आवेदन अब ऑनलाइन दायर किए जाते हैं।
ऑनलाइन फाइलिंग और प्रोसेसिंग प्रणाली की सामान्य विशेषताएं:
ख. आईपी कार्यालय के वेबसाइट को पुनः डिजाइन किया गया है ताकि इसकी विषय-वस्तु में सुधार और एक्सेस में आसानी हो तथा इसे और अधिक इंटरेक्टिव, सूचनापरक व नैविगेट करने में आसान बनाया जा सके। आईपी आवेदनों की फाइलिंग और उस पर कार्यवाही के संबंध में आईपी डाटा को वेबसाइट पर रीयल टाइम आधार पर उपलब्ध कराया गया है। यह वेबसाइट, हितधारकों को आईपी की जानकारी के निर्बाध प्रचार-प्रसार के लिए लॉगिन-फ्री सर्च की सुविधा प्रदान करती है।
ग- आईपी डैशबोर्ड एक्सेस और उसकी विशेषताएं
पेटेंट, डिज़ाइन, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और भौगोलिक संकेतकों सहित बौद्धिक संपदा आवेदनों की विभिन्न श्रेणियों के संबंध में रीयल टाइम आधार पर व्यापक डेटा प्रदान करने के लिए एक सार्वजनिक रूप से सुलभ आईपी डैशबोर्ड शुरू किया गया है। इस डैशबोर्ड को आधिकारिक वेबसाइट ipindia.gov.in/dashboard के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए वेबसाइट के होमपेज पर डैशबोर्ड का एक क्विक-एक्सेस लिंक भी उपलब्ध है।
घ. एआई-संचालित ट्रेडमार्क सर्च टेक्नालॉजी: आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित ट्रेडमार्क सर्च प्रौद्योगिकी भी शुरू की गई है ताकि इससे अधिक कुशल व सटीक जांच की जा सके और ट्रेडमार्क आवेदनों का तेजी से निपटान किया जा सके।
ङ.- आईपी सारथी चैटबॉटः आईपी पंजीकरण प्रक्रियाओं को नैवीगेट करने वाले उपयोगकर्ताओं को तत्काल सहायता देने और उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक डिजिटल सहायक डिजाइन किया गया है। भारत के छोटे व्यवसाय, चैटबॉट पर प्रश्नों के उत्तर पूछकर, तत्काल आईपीआर संबंधी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
च- “डब्ल्यूआईपीओ आईपी डायग्नोस्टिक्स भारत के अनुरूप अनुकूलन”, एक स्व-मूल्यांकन टूल है, जिसे छोटे व्यवसायों को अपनी बौद्धिक संपदा (आईपी) परिसंपत्तियों का स्व-मूल्यांकन करने में सक्षम बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह भारतीय आईपी कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुरूप तथा स्थानीय उदाहरणों से समृद्ध मार्गदर्शन प्रदान करता है। लक्षित प्रश्नों के उत्तर देकर, भारत के छोटे व्यवसाय अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं, जो यह जानकारी प्रदान करती है कि भारत की आईपी प्रणाली उनके रणनीतिक व्यावसायिक उद्देश्यों की दिशा में किस प्रकार सहायता प्रदान कर सकती है। व्यापक कवरेज के लिए, इस टूल को अनेक भाषाओं जैसे अंग्रेजी, बांग्ला, हिंदी, तमिल और उर्दू में उपलब्ध कराया गया है।
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता मिशन (नीपम) महानियंत्रक पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क (सीजीपीडीटीएम) कार्यालय शैक्षणिक संस्थानों में बौद्धिक संपदा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता मिशन (नीपम) का कार्यान्वयन करता है। वर्ष 2021 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य, भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत 10 लाख छात्रों को शिक्षित करना है। अब तक, सभी 28 राज्यों और 8 संघ राज्य क्षेत्रों में लगभग 9500 बौद्धिक संपदा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 25 लाख से अधिक छांत्र और शिक्षक शामिल हुए हैं।
7- राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा (आईपी) पुरस्कार प्रतिवर्ष ऐसे व्यक्तियों, संस्थानों, संगठनों और उद्यमों को, उनके द्वारा आईपी सृजन और व्यवसायीकरण के मामले में सर्वोच्च उपलब्धि प्राप्त करने को मान्यता प्रदान करने और उन्हें पुरस्कृत करने के लिए प्रदान किए जाते हैं, जिन्होंने देश में आईपी ईकोसिस्टम को सुदृढ़ करने तथा रचनात्मकता और नवप्रयोग को प्रोत्साहित करने में योगदान दिया है।
8- आईपीआर इंटर्नशिप कार्यक्रम- राष्ट्रीय आईपीआर नीति में उल्लिखित उद्देश्यों की पूर्ति में योगदान देने के उद्देश्य से, महानियंत्रक पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क कार्यालय (सीजीपीडीटीएम) ने हाल ही में छात्रों, शोधार्थियों और प्रोफेशनल्स के लिए चार सप्ताह का आईपीआर इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया है।
9- एसआईपीपी स्कीम: पेटेंट, ट्रेडमार्क और डिजाइन आवेदनों की फाइलिंग और उस पर कार्यवाही करने के लिए स्टार्टअप्स को निःशुल्क सुविधा प्रदान करने हेतु वर्ष 2016 में स्टार्टअप्स बौद्धिक संपदा संरक्षण (एसआईपीपी) स्कीम शुरू की गई थी। इस स्कीम के तहत, महानियंत्रक, पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क (सीजीपीडीटीएम) कार्यालय सुविधाप्रदाताओं को देय पेशेवर सेवा शुल्क का वहन करता है। टीआईएससी सेवाओं का उपयोग करने वाले भारतीय शैक्षणिक संस्थानों को लाभ प्रदान के लिए इसका दायरा भी बढ़ाया गया है। इसके अतिरिक्त, अब इसमें भारत में दायर किए गए अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट आवेदनों की फाइलिंग भी शामिल है।
10- जनशक्ति वृद्धि
हितधारकों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करना सुनिश्चित करने के लिए आईपी कार्यालय में जनशक्ति में कई गुना वृद्धि की गई है।
आज तक पंजीकृत कुल भौगोलिक संकेत: 697
आज तक जारी किए गए जीआई टैग की राज्यवार संख्या: सूची अनुलग्नक के रूप में संलग्न है।
यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
22 जुलाई , 2025 को उत्तर दिए जाने हेतु लोक सभा अतारांकित प्रश्न संख्या 293 के उत्तर भाग (घ) में उल्लिखित अनुलग्नक।
अनुलग्नक
आज की तिथि के अनुसार वर्षवार पंजीकृत जीआई आवेदन
वित्तीय
वर्ष
भारतीय
अनुप्रयोग
विदेश
अनुप्रयोग
की संख्या
अनुप्रयोग
2004 – 2005
03
00
03
2005 – 2006
24
00
24
2006 – 2007
03
00
03
2007 – 2008
31
00
31
2008 – 2009
45
00
45
2009 – 2010
13
01
14
2010 – 2011
25
04
29
2011 – 2012
20
03
23
2012 – 2013
20
01
21
2013 – 2014
22
00
22
2014 – 2015
20
00
20
2015 – 2016
26
00
26
2016 – 2017
31
02
33
2017 – 2018
24
02
26
2018 – 2019
22
01
23
2019 – 2020
21
01
22
2020 – 2021
05
00
05
2021 – 2022
36
14
50
2022 – 2023
50
05
55
2023 – 2024
157
03
160
2024 – 2025
60
02
62
योग
658
39
697
आज की तिथि के अनुसार वस्तुवार पंजीकृत जीआई आवेदन
क्रम संख्या
वस्तु
आवेदनों की संख्या
1
हस्तशिल्प
366
2
कृषि
218
3
निर्मित
54
4
खाद्य सामग्री
56
5
प्राकृतिक
03
योग
697
अद्यतन स्थिति के अनुसार भारतीय और विदेशी वस्तुवार पंजीकृत जीआई आवेदन
क्रम संख्या
वस्तु
भारतीय
आवेदन
विदेशी आवेदन
आवेदनों की कुल संख्या
1
हस्तशिल्प
365
01
366
2
कृषि
218
00
218
3
निर्मित
22
32
54
4
खाद्य सामग्री
50
06
56
5
प्राकृतिक
03
00
03
योग
658
39
697
अद्यतन स्थिति के अनुसार पंजीकृत जीआई आवेदनों का राज्यवार विवरण
क्रम संख्या
राज्य
पंजीकृच
1
अंडमान और निकोबार (यूटी)
7
2
आंध्र प्रदेश
19
3
अरुणाचल प्रदेश
19
4
असम
40
5
बिहार
16
6
चंडीगढ़
0
7
छत्तीसगढ़
7
8
गोवा
10
9
गुजरात
28
10
हरियाणा
0
11
हिमाचल प्रदेश
10
12
जम्मू और कश्मीर
24
13
झारखंड
1
14
कर्नाटक
45
15
केरल
37
16
लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश)
4
17
लक्षद्वीप (यूटी)
0
18
मध्य प्रदेश
21
19
महाराष्ट्र
52
20
मणिपुर
6
21
मेघालय
8
22
मिजोरम
7
23
नगालैंड
4
24
ओडिशा
26
25
पुदुचेरी
2
26
पंजाब
0
27
राजस्थान
20
28
सिक्किम
1
29
तमिलनाडु
69
30
तेलंगाना
18
31
त्रिपुरा
4
32
उत्तर प्रदेश
76
33
उत्तराखंड
26
34
पश्चिम बंगाल
34
35
दादरा और नगर हवेली
0
36
भारत (एकाधिक राज्यों में)
17
37
विदेश
39
कुल
697