भारत प्रौद्योगिकी अपनाने से प्रौद्योगिकी नेतृत्व की ओर अग्रसर: डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईएम अहमदाबाद में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) द्वारा वित्त पोषित 40 करोड़ रुपये की निधि से निर्मित निधि उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया
भारत प्रौद्योगिकी अपनाने से प्रौद्योगिकी नेतृत्व की ओर अग्रसर: डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईएम अहमदाबाद में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) द्वारा वित्त पोषित 40 करोड़ रुपये की निधि से निर्मित निधि उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया
आज भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएम–ए) में डीएसटी–निधी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के शुभारंभ के साथ प्रौद्योगिकी को अपनाने से लेकर प्रौद्योगिकी नेतृत्व तक भारत की यात्रा को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित और वित्त पोषित इस उत्कृष्टता केंद्र को लगभग 40 करोड़ रुपये के निवेश से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया।
नव स्थापित उत्कृष्टता केंद्र आईआईएम अहमदाबाद परिसर के भीतर एक समर्पित नए भवन और ब्लॉक में स्थित है, जिसे डीप–टेक उद्यमिता, प्रौद्योगिकी रूपांतरण और उद्यम सृजन के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। इस केंद्र का उद्देश्य स्टार्टअप्स और उद्यमियों को एक अद्वितीय अंतःविषयक लाभ प्रदान करना है, जिससे एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के तहत प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, प्रबंधन पेशेवरों और उद्योग हितधारकों के बीच घनिष्ठ सहयोग संभव हो सके।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने पिछले एक दशक में क्रमिक, प्रौद्योगिकी–आधारित विकास से हटकर डीप–टेक–आधारित, प्रौद्योगिकी–संचालित विकास की ओर निर्णायक रूप से कदम बढ़ाया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश अब डीप–टेक–संचालित विकास पर केंद्रित है, जहां मौलिक अनुसंधान पर आधारित नवाचार को व्यापक, बाजार के लिए तैयार समाधानों में परिवर्तित किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “डीप–टेक कोई क्षणिक प्रवृत्ति नहीं है; यह एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है। भारत का भविष्य का विकास, रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा इस बात पर निर्भर करेगी कि हम विज्ञान को समाधानों में कितनी प्रभावी ढंग से परिवर्तित करते हैं,”।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईआईएम अहमदाबाद जैसे संस्थान, जो प्रबंधन उत्कृष्टता और राष्ट्रीय मूल्यों में दृढ़ विश्वास रखते हैं, वैज्ञानिक नवाचार को सशक्त व्यावसायीकरण रणनीतियों द्वारा समर्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रबंधन के बिना प्रौद्योगिकी से सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त नहीं किए जा सकते, ठीक उसी प्रकार प्रौद्योगिकी के बिना प्रबंधन से ठहराव का खतरा रहता है, इसलिए सतत नवाचार के लिए ऐसे एकीकृत केंद्र आवश्यक हैं।
आईआईएम–ए में स्थित डीएसटी–निधि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को 59,000 वर्ग फुट के व्यापक क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसमें उद्यम निर्माण प्रयोगशालाएं, सहयोगी कार्यक्षेत्र, बैठक और बोर्ड कक्ष, प्रशिक्षण क्षेत्र और नेटवर्किंग जोन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप, डीप–टेक संस्थापकों, निवेशकों, छात्रों और संस्थागत भागीदारों को सहयोग प्रदान करेगा, जिससे प्रयोगशाला से बाजार तक की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने नवाचार के लोकतंत्रीकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत के लगभग आधे स्टार्टअप अब दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों से उभरते हैं, जिससे यह मिथक दूर हो जाता है कि नवाचार केवल महानगरों तक ही सीमित है। किफायती डिजिटल पहुंच, बढ़ते इनक्यूबेशन नेटवर्क और सहायक नीतिगत ढांचों ने देश भर की प्रतिभाओं को भारत के नवाचार के सफर में योगदान देने में सक्षम बनाया है।
भारत की वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पेटेंट दाखिल करने, वैज्ञानिक प्रकाशनों और स्थानीय नवाचार में मजबूत वृद्धि के साथ, देश आज वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में शुमार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये उपलब्धियां वैज्ञानिक क्षमता निर्माण और इकोसिस्टम विकास में वर्षों के निरंतर निवेश का परिणाम हैं।
इस शुभारंभ के अवसर पर “ट्रांसलेशन एंडेवर्स” का भी अनावरण किया गया, जो एक बहु–संस्थागत सहयोगात्मक मंच है और इसमें अग्रणी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाकर डीप–टेक डोमेन में प्रौद्योगिकी अनुवाद की महत्वपूर्ण चुनौती का समाधान किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य साझा बुनियादी ढांचे, समन्वित इनक्यूबेशन और उद्योग–अनुकूल नवाचार मार्गों के माध्यम से शिक्षा जगत, उद्योग, सरकार और निवेशकों के बीच की बाधाओं को दूर करना है।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि अनुसंधान, विकास और नवाचार निधि (आरडीआईएफ) तथा अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) जैसी सरकारी सहायता प्रणालियाँ डीप–टेक उपक्रमों, विशेषकर प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स, को दीर्घकालिक और जोखिम–सहिष्णु समर्थन प्रदान करने के लिए बनाई गई हैं, ताकि वे जिम्मेदारीपूर्ण और सतत रूप से विस्तार कर सकें।
अपने संबोधन के समापन में केंद्रीय मंत्री ने शोधकर्ताओं, छात्रों, उद्योग जगत, निवेशकों और संस्थानों से घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि भारत का नवाचार भविष्य केवल विचारों पर ही नहीं, बल्कि दृढ़ता, ईमानदारी और विज्ञान को समाज पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, “बड़े सपने देखें, लेकिन जिम्मेदारी के साथ निर्माण करें। राष्ट्र आपके विचारों को नीति, वित्त पोषण, संस्थानों और विश्वास के साथ समर्थन दे रहा है।”