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भारत ने झींगा मछली क्षेत्र के लिए सहयोग बढ़ाया; बीते पांच वर्ष से अमेरिका को सीफूड का निर्यात मजबूत बना हुआ है

भारत ने झींगा मछली क्षेत्र के लिए सहयोग बढ़ाया; बीते पांच वर्ष से अमेरिका को सीफूड का निर्यात मजबूत बना हुआ है

बीते पांच वर्ष में भारत से संयुक्त राज्य अमेरिका को झींगा मछली के निर्यात की कुल मात्रा और कीमत नीचे दी गई है:

 

वस्तु

वर्ष

2020-

21

2021-

22

2022-

23

2023-

24

2024-

25

झींगा मछली

मात्रा (मीट्रिक टन में):

272041

342572

275662

297571

311948

 

कीमत (मिलियन अमेरिकी डॉलर में):

2343.90

3146.71

2439.87

2342.58

2512.71

 

कुल मिलाकर, अप्रैल से अक्टूबर 2025 के दौरान भारत से सीफूड के निर्यात में अप्रैल से अक्टूबर 2024 की तुलना में कीमत के आधार पर 13.93% की अच्छी बढ़ोतरी हुई। इस दौरान निर्यात 4207.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 4793.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। अमेरिका को झींगा मछली के निर्यात की जानकारी नीचे दी गई सूची में दी गई हैं:

 

 

अगस्तअक्टूबर 2024

 

अगस्तअक्टूबर 2025*

 

वस्तु का नाम

मात्रा (टन में)

कीमत अमेरिकी डॉलर में (मिलियन)

मात्रा (टन में)

कीमत अमेरिकी डॉलर में (मिलियन)

झींगा मछली

83375

673.98

55282

512.81

         

अगस्तअक्टूबर 2025 के आंकड़े प्रोविजनल हैं*

 

सरकार ने बाजार में विविधता लाने और भारत के सीफूड निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं। वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक वैधानिक निकाय, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजकर, खरीदनेबेचने वालों के बीच बैठकें आयोजित करके और एशिया यूरोप में प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सीफूड मेलों में भाग लेकर सीफूड निर्यात बाजार में विविधता लाने के लिए सक्रिय तौर पर काम कर रहा है। 2025 में चेन्नई और नई दिल्ली में आयोजित रिवर्स क्रेताविक्रेता बैठकों से 100 से क्रेतानिर्यातकों की बातचीत हुई। एमपीईडीए निर्यातकों को नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद करने के लिए कई एफटीए पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। वाणिज्य विभाग बाजार पहुंच के मुद्दों को हल करने के लिए, विशेष रूप से ईयू के साथ, एफटीए वार्ताओं को तेज करने के लिए प्रयास कर रहा है। भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंडोनेशिया, जापान, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम और रूस के दूतावासों/ उच्चायोगों के साथ कई बैठकें की हैं। इन चर्चाओं में, अन्य बातों के साथ ही, व्यापार संबंधों को मजबूत करना, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता आश्वासन, जैव सुरक्षा और गुणवत्ता अनुपालन, कोल्डचेन में सुधार, प्रसंस्करण, स्वचालन, अनुसंधान और विकास सहयोग, और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे विषय शामिल थे।

 

बीते पांच वर्ष में अलगअलग योजनाओं के अंतर्गत झींगा मछली के किसानों और निर्यातकों को दी गई कुल वित्तीय मदद नीचे दी गई है:

 

 

 

 

 

झींगा मछली के किसानों को मदद करने के लिए ये कदम उठाए गए हैं:

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अनुलग्नक

 

बीमारी मुक्त उत्पादन बढ़ाने और उपज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय मदद योजनाएं

 

 

योजना का नाम

योजना का उद्देश्य/ जानकारी

वित्तीय मदद का तरीका

खेत परिसर में बीज उगाने के लिए नर्सरी की स्थापना।

झींगा पालन के लिए बायोसुरक्षित नर्सरी माहौल में लार्वा के बाद को पालना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह अच्छी गुणवत्ता के बीज सुनिश्चित करता है, बीमारियों के फैलने को कम करता है, फार्म की उत्पादकता बेहतर करता है, कल्चर पीरियड कम करता है, और श्रम बारबार होने वाले खर्चों को कम करता है।

सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए, खर्च की गई मान्य लागत का 50%, अधिकतम 6,00,000/- रुपये की वित्तीय मदद के अंतर्गत, जो भी कम हो।

एससी/ एसटी लाभार्थियों के लिए प्रस्तावित सहायता खर्च की गई मान्य लागत का 75%, अधिकतम 9,00,000/- रुपये की वित्तीय मदद के अंतर्गत, जो भी कम हो।

बेहतर खाद्य सुरक्षा के लिए खेतों में झींगा मछली संभालने के लिए सुविधाएं पूरी करना।

कटाई से लेकर स्टोरेज तक हैंडलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और खेतों में बायोटॉयलेट उपलब्ध कराने से गुणवत्ता सुधर सकती है और दूषित होने का खतरा कम हो सकता है। ये तरीके बेहतर स्वच्छता सुनिश्चित करते हैं, जिससे रोग पैदा करने वाले कीटाणुओं से दूषित होने की संभावना कम होती है और झींगा मछली की गुणवत्ता बनी रहती है।

किसान के एक्वा फार्म के प्रति हेक्टेयर वॉटर स्प्रेड एरिया पर खर्च की गई कुल लागत का 50%, अधिकतम 10,00,000/- रुपये की वित्तीय मदद के अंतर्गत, जो भी कम हो। एससी/ एसटी लाभार्थी को प्रस्तावित सहायता खर्च की गई कुल लागत का 75% होगी, जो किसान के एक्वा फार्म के प्रति हेक्टेयर वाटर स्प्रेड एरिया पर अधिकतम 15,00,000/- रुपये की वित्तीय मदद के अंतर्गत, जो भी कम हो।

 

यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 

***

  1. एमपीईडीए, मछली उत्पादों की टेस्टिंग के लिए एमपीईडीए के साथ मंजूर किए गए पंजीकृत प्रोसेसिंग प्लांट/ हैंडलिंग सेंटर में छोटी प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए एक वित्तीय मदद योजना चलाता है। इस योजना के अंतर्गत, आवेदक को कुल लागत के 50% की दर से वित्तीय मदद की जाती है, जो अधिकतम 5 लाख रुपये तक हो सकती है। यह योजना पंजीकृत सीफूड निर्यातकों को प्रभावी प्रक्रिया में क्वालिटी नियंत्रित करने में मदद करती है। एमपीईडीए ने बीते 5 वर्ष में इस योजना के अंतर्गत 8 यूनिट्स को कुल ₹24.07 लाख की वित्तीय मदद की है।

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