बुलेट ट्रेन परियोजना में महाराष्ट्र के पालघर में पहले पर्वतीय सुरंग निर्माण कार्य में उल्लेखनीय सफलता मिली: श्री अश्विनी वैष्णव
बुलेट ट्रेन परियोजना में महाराष्ट्र के पालघर में पहले पर्वतीय सुरंग निर्माण कार्य में उल्लेखनीय सफलता मिली: श्री अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद तीव्र गति बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र के पालघर में पहली पर्वतीय सुरंग निर्माण में उल्लेखनीय सफलता मिलने की घोषणा की। पालघर जिले में सबसे लंबी सुरंग में से एक, लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग–एमटी-5, विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित है।
🇮🇳 Bharat Ka Garv: Bullet Train Project, achieves a major milestone with the breakthrough of Mountain Tunnel-5.
📍Saphale, Palghar pic.twitter.com/4wtQUUIAvX
एमटी-5 सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से अत्याधुनिक ड्रिल और ब्लास्ट विधि से 18 महीने में पूरा किया गया। इस विधि से खुदाई में जमीन की वास्तविक समय में निगरानी हो सकती है और वास्तविक स्थल स्थिति के आधार पर शॉटक्रेट, रॉक बोल्ट और लैटिस गर्डर जैसे सहायक प्रणालियां प्रयुक्त की जा सकती है। सुरंग निर्माण के दौरान, वायु-संचार, अग्नि सुरक्षा उपाय और उचित प्रवेश और निकास व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुरक्षा सावधानियों का पालन किया गया।

इससे पहले, ठाणे और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के बीच लगभग 5 किलोमीटर लंबी पहली भूमिगत सुरंग का निर्माण सितंबर 2025 में पूरा हुआ था। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना कुल 508 किलोमीटर लंबी है, जिसमें सुरंगों की कुल लंबाई 27 दशमलव 4 किलोमीटर है। इनमें से 21 किलोमीटर भूमिगत सुरंगें और 6 दशमलव 4 किलोमीटर सतही सुरंगें हैं। परियोजना में आठ पर्वतीय सुरंग भी शामिल हैं, जिनमें कुल 6 दशमलव 05 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाली सात महाराष्ट्र में हैं। बुलेट परियोजना में 350 मीटर लंबी एक सुरंग गुजरात में स्थित है।
श्री वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन से रोजगार सृजित हो रहे हैं और इसके परिचालन के दौरान आर्थिक गतिविधियों को बढावा मिलेगा और अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होंगे। रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर केवल 1 घंटा 58 मिनट रह जाएगा। इससे दो प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों की अर्थव्यवस्थाओं में सीधा संपर्क स्थापित होगा और वे एकीकृत हो जाएंगी।

श्री वैष्णव ने कहा कि परियोजना कॉरिडोर से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने, ज्ञान आदान-प्रदान और नए औद्योगिक और आईटी केंद्र विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ के साथ ही मध्यम वर्ग की आरामदायक और सस्ते दर पर यात्रा आकांक्षाएं पूरी होंगी।
रेल मंत्री ने बल देकर कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद, सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 95 प्रतिशत की कमी आएगी ।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र में सात पर्वतीय सुरंगों पर काम चल रहा है। 820 मीटर लंबी एमटी-1 का 15 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है, जबकि 228 मीटर लंबी एमटी-2 पर आरंभिक कार्य चल रहा है। 1,403 मीटर लंबी एमटी-3 का 35.5 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है और 1,260 मीटर लंबी एमटी-4 के निर्माण का 31 प्रतिशत काम पूर्ण हुआ है। इन सभी पर्वतीय सुरंगों में सबसे लंबी 1,480 मीटर, लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी एमटी-5 में 2 जनवरी 2026 को दोनों सिरे से खुदाई द्वारा 55 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा करने में सफलता मिली है। साथ ही 454 मीटर लंबी एमटी-6 का 35 प्रतिशत और 417 मीटर लंबी एमटी-7 का 28 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हुआ है। इस तरह महाराष्ट्र में कुल लगभग 6 किलोमीटर लंबाई में पर्वतीय सुरंगों का निर्माण हुआ है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना लगभग 508 किलोमीटर लंबी है, जिसमें से 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में तथा 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में स्थित है। यह रेल कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। भारतीय परिवहन अवसंरचना में यह परियोजना उल्लेखनीय परिवर्तनकारी उपलब्धि है।