Thursday, January 8, 2026
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बर्फ निर्माण के सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन से पानी की विरोधाभासी घटना के प्रमाण मिलते हैं

बर्फ निर्माण के सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन से पानी की विरोधाभासी घटना के प्रमाण मिलते हैं

वैज्ञानिकों ने पानी के उस लंबे समय से चले आ रहे विरोधाभास को समझने के लिए सुपरकंप्यूटर-संचालित पहले सिमुलेशन विकसित किया हैं, जो वैज्ञानिकों को लंबे समय से परेशान कर रहा था – गर्म पानी ठंडे पानी की तुलना में तेजी से जमता है। इसे तकनीकी रूप से एमपीईएमबीए प्रभाव कहा जाता है।

जर्नल कम्युनिकेशन फिजिक्स में प्रकाशित यह शोध, तापमान में अचानक परिवर्तन के कारण पदार्थों के शिथिलन जैसी घटनाओं में नई अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है। इसे तकनीकी रूप से गैर-संतुलन घटनाएँ कहा जाता है और साथ ही यह विभिन्न अनुप्रयोगों को जन्म दे सकता है, जैसे कि अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स में थर्मल नियंत्रण को एक नया दृष्टिकोण देना या बेहतर कूलिंग रणनीतियों को परिभाषित करना।

अरस्तू ने अपने ग्रंथ मेटरोलॉजिकलमें लिखा है, “पानी के पहले से गर्म होने के कारण वह जल्दी जम जाता है।”

समय के साथ भुला दी गई इस घटना को पिछली शताब्दी में एरास्टो मपेम्बा ने पुनः खोजा था। इनके नाम पर अब इसका नाम रखा गया है। तब से इसे समझने और यह पता लगाने में काफी रुचि रही है कि क्या यह प्रभाव केवल पानी में होने वाले चरण संक्रमणों तक ही सीमित है। यद्यपि हाल ही में यह दिखाया गया है कि यह प्रभाव कई अन्य प्रणालियों में भी चरण संक्रमणों के दौरान प्रकट होता है, फिर भी इसकी समझ काफी हद तक अस्पष्ट बनी हुई है। इसके अलावा दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में पानी का मामला प्रायोगिक स्तर पर भी विवादास्पद हो गया है। पानी सिमुलेशन की जटिल प्रकृति के कारण, इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई भी कम्प्यूटेशनल अध्ययन उपलब्ध नहीं है।

चित्र 1 : जल के टी आई पी 4 पी/आइस मॉडल, 2डी लेनार्ड जोन्स मॉडल और पॉट्स मॉडल में चरण संक्रमणों के स्नैपशॉट

 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के शोधकर्ताओं ने सुपरकंप्यूटरों का उपयोग करके बर्फ निर्माण का पहला सिमुलेशन विकसित किया है, जो पानी के म्पेंबा प्रभाव को साबित करता है और यह भी दर्शाता है कि यह पानी के अलावा अन्य प्रणालियों में तरल से ठोस संक्रमण के दौरान भी प्रकट हो सकता है।

उन्होंने समझाया है कि जब पानी ठंडा होता है, तो असली बर्फ बनने से पहले वह अल्पकालिक आणविक व्यवस्थाओं की मध्यवर्ती अवस्थाओं में फंस सकता है। अलग-अलग प्रारंभिक तापमानों पर यह अवस्थाएँ अलग-अलग समय तक बनी रहती हैं।

गर्म पानी कभी-कभी बर्फ के निर्माण की प्रक्रिया (न्यूक्लिएशन) के लिए एक तेज़ मार्ग “चुन” सकता है। इससे ठंडे पानी में होने वाली देरी से बचा जा सकता है।

इस बात की अब तक की सबसे अच्छी व्याख्या कि “गर्म ठंडी की तुलना में तेजी से क्यों जम सकता है” संतुलित भौतिकी की दुनिया में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.1038/s42005-025-02251-6 

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