प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों का विस्तार
प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों का विस्तार
सरकार ने 15.2.2023 को देश में सहकारिता आंदोलन को मज़बूत करने और ज़मीनी स्तर तक इसकी पहुंच बढ़ाने की योजना को स्वीकृति दी। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और राज्य सरकारों के सहयोग से डेयरी अवसंरचना विकास निधि (डीआईडीएफ), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) इत्यादि सहित भारत सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को शामिल करते हुए उनके माध्यम से पांच वर्षों की अवधि में देश के सभी पंचायतों/गांवों में 2 लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स (एम-पैक्स), डेयरी, मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की जाएगी।
पैक्स की आर्थिक गतिविधियों में विविधता लाकर उन्हें बहुउद्देशीय आर्थिक इकाई बनाने के लिए मंत्रालय की ओर से आदर्श उपनियम तैयार किए गए हैं। उनसे पैक्स को 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सक्षम बनाया जा सकेगा जिनमें डेयरी, मत्स्य पालन, गोदामों की स्थापना, खाद्यान्न, उर्वरक, बीज की खरीद, एलपीजी/सीएनजी/पेट्रोल/डीजल का वितरण, अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण, कस्टम हायरिंग केंद्र, उचित मूल्य की दुकानें (एफपीएस), सामुदायिक सिंचाई, सामान्य सेवा केंद्र इत्यादि शामिल हैं।
भारत सरकार ने उपरोक्त के अतिरिक्त कई और महत्वपूर्ण पहल भी की हैं, जिनमें शामिल हैं:
सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण योजना: सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ), कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई), कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (एसएमएएम), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण (पीएमएफएमई) इत्यादि सहित भारत सरकार की विभिन्न मौजूदा योजनाओं को जोड़कर उनके माध्यम से पैक्स स्तर पर अनाज भंडारण के लिए गोदाम, कस्टम हायरिंग केंद्र, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां और अन्य कृषि अवसंरचना बनाने की योजना को स्वीकृति दी है। इस योजना की पायलट परियोजना के तहत, 11 राज्यों के 11 पैक्स में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है।
इन पहलों को भारत सरकार की उन मौजूदा योजनाओं के स्वीकृत परिव्यय का उपयोग करके कार्यान्वित किया जा रहा है, जिन्हें पैक्स स्तर पर आपस में जोड़ा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र राज्य के पालघर जिले सहित देश भर में पैक्स की ओर से प्रदान की जा रही सेवाओं के कुशल वितरण के लिए संबंधित एजेंसियों से उन्हें विशिष्ट प्रशिक्षण भी प्रदान किए जा रहे हैं।
पैक्स के कम्प्यूटरीकरण के लिए केन्द्र की ओर से प्रायोजित परियोजना में सभी चालू पैक्स को ईआरपी (उद्यम संसाधन योजना) आधारित सामान्य राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाना, उन्हें राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के माध्यम से नाबार्ड से जोड़ना शामिल है। इसका उद्देश्य पैक्स के कामकाज में पारदर्शिता लाना और उन्हें प्रभावशाली बनाना है ताकि पैक्स के संचालन को पेशेवर बनाया जा सके।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की ओर से सहकारी क्षेत्र में युवा उद्यमियों/महिला स्वयं सहायता समूहों/एफपीओ को प्रोत्साहित और सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं:
सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।