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प्रसाद योजना के अंतर्गत सतत विकास

प्रसाद योजना के अंतर्गत सतत विकास

पर्यटन मंत्रालय द्वारा चिन्हित तीर्थ और विरासत स्थलों के एकीकृत विकास के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिक एवं विरासत संवर्धन अभियान’ (प्रसाद) शुरू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत, पर्यटन मंत्रालय महत्वपूर्ण तीर्थ और विरासत स्थलों पर पर्यटन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के विकास के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। योजना का उद्देश्य सुनियोजित पर्यटन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की उपलब्धता के माध्यम से पर्यटकों के तीर्थयात्रा एवं आध्यात्मिक अनुभव को पुनर्जीवित करना है, जिससे पर्यटकों को सुविधा, सुगमता, सुरक्षा, स्वच्छता और बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके। साथ ही, एकीकृत, समावेशी और सतत विकास के माध्यम से तीर्थ/विरासत नगर की आत्मा को पुनर्जीवित/संरक्षित करना है, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न हों।

योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों (मंदिर प्राधिकरण/धार्मिक ट्रस्ट, गैर-सरकारी संगठन और समितियां आदि) के साथ परामर्श करके चिन्हित परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करता है। इस परामर्श के माध्‍यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि तीर्थयात्रियों/पर्यटकों के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न सुविधाओं का विकास करते समय स्थलों की आध्यात्मिक अखंडता और मौलिकता संरक्षित और बरकरार रहे।

पर्यटन मंत्रालय “सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण” (सीबीएसपी) योजना के तहत, पर्यटन स्थलों की जरूरतों को पूरा करने और पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए, प्रसाद के अंतर्गत आने वाले स्थलों सहित देश भर में पर्यटन और आतिथ्य सेवा प्रदाताओं को शिक्षा, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करता है।

संबंधित राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत किए गए परियोजना प्रस्ताव के अंतर्गत सतत संचालन एवं रखरखाव की योजनाएं तैयार करते हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं की सततता संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की जाती है।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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