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प्रधानमंत्री सहकार से समृद्धि योजना के अंतर्गत सहकारी समितियों का सशक्तिकरण

प्रधानमंत्री सहकार से समृद्धि योजना के अंतर्गत सहकारी समितियों का सशक्तिकरण

 ‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्‍पना को साकार करने के लिए मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए अनेक पहलें की हैं । आगामी पांच वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों को आच्‍छादित करने के लिए नए बहुउद्देशीय पैक्‍स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्‍थापना की योजना का अनुमोदन ऐसी ही एक पहल है । राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार देश भर में दिनांक 15.11.2025 तक कुल 30,083 नए पैक्‍स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं और 15,793 डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को सशक्‍त किया गया है । इन नव-पंजीकृत प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्‍स)/डेयरी सहकारी समितियों(DCS)/मात्स्यिकी सहकारी समितियों (FCS) को निम्‍नलिखित विभिन्‍न सहयोगात्‍मक उपाय प्रदान किए गए हैं:

मंत्रालय ने देश में डिजिटल सहकारी सिस्‍टम के निर्माण के अनेक उपाय किए हैं । पारदर्शिता और लेखांकन में सुधार के लक्ष्‍य से पैक्‍स कंप्‍यूटरीकरण परियोजना के माध्‍यम से सभी कार्यशील प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) को एकरूप ERP-आधारित कॉमन राष्‍ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाना ऐसी ही एक पहल है । यह प्‍लेटफॉर्म क्रेडिट और गैर-क्रेडिट, दोनों कार्यों के एंड-टू-एंड डेटा को कैप्‍चर करता है और रियल-टाइम अभिलेखीकरण और प्रचालन सटीकता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करता है ।

ERP (एंटरप्राइज रिसोर्स प्‍लानिंग) आधारित कॉमन राष्‍ट्रीय सॉफ्टवेयर, कॉमन एकाउंटिंग सिस्‍टम (CAS) और मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्‍टम (MIS)  के माध्‍यम से पैक्‍स प्रदर्शन में सुधार लाता है । इसके अलावा, पैक्‍स के शासन और पारदर्शिता में सुधार आता है जिससे ऋणों का त्‍वरित संवितरण होता है, लेनदेन लागत घटती है, भुगतान असंतुलनों में कमी आती है और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों एवं राज्‍य सहकारी बैंकों के साथ निर्बाध लेखांकन सुनिश्चित होता है । इसका लक्ष्‍य किसानों के बीच पैक्‍स के प्रति विश्‍वसनीयता को बढ़ाना है । इस परियोजना के अधीन नाबार्ड और सिस्‍टम इंटिग्रेटर द्वारा ERP सॉफ्टवेयर पर काम करने के लिए पैक्‍स को एंटरप्राइज रिसोर्स प्‍लानिंग (ERP) सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की गई है । सॉफ्टवेयर में 22 मॉड्यूल्‍स दिए गए हैं जिसमें सदस्‍यता, ऋण, थ्रिफ्ट जमा, बचत, सावधि जमा, पिग्‍मी जमा, लॉकर, क्रय-विक्रय, भांडागारण, प्रापण, PDS, निवेश, उधार, आस्तियां, FAS, ऑडिट, शासन, रिपोर्ट निर्माता, सांख्यिकी, BDP, CSC, लीगेसी दस्‍तावेज शामिल हैं ।

डिजिटल सहकारी परितंत्र को पैक्‍स के अलावा व्‍यापक सहकारी तंत्र में विस्‍तारित किया जा रहा है ।  कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (ARDBs) का कंप्‍यूटरीकरण, बहुराज्‍य सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक कार्यालय और राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों के RCS कार्यालयों के कंप्‍यूटरीकरण की केंद्रीय प्रायोजित योजना कागज़रहित, पारदर्शी और समयबद्ध विनियामक अंत:क्रियाएं सक्षम बनाती हैं । आरबीआई द्वारा ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए अनुमोदित एक साझा सेवा इकाई-  सहकार सारथी की स्‍थापना, आधुनिक प्रौद्योगिकी सेवाओं के माध्‍यम से वित्तीय और ऑडिट प्रबंधन को सशक्‍त करती है । RBI एकीकृत ऑम्‍बड्समैन योजना के अधीन सहकारी बैंकों की ऑनबोर्डिंग जवाबदेही और शिकायत निवारण में वृद्धि लाती है ।  इसके अतिरिक्‍त, दिनांक 24 जुलाई, 2025 को लॉन्‍च की गई सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क, डिजिटल मानदंडों जैसे ऑडिट अनुपालन, प्रचालनात्‍मक प्रदर्शन और वित्तीय शक्ति का उपयोग करके सहकारी समितियों का उद्देश्‍यपूर्ण आकलन कर पारदर्शिता और प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता को बढ़ावा देता है ।

राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) के माध्यम से डिजिटल डेटा पारदर्शिता को उल्‍लेखनीय रूप से सशक्‍त किया गया है, जो 8.4 लाख सहकारी समितियों के अद्यतन संग्रह के रूप में कार्य करता है । मंत्रालय द्वारा विकसित मानक APIs राज्य आरसीएस पोर्टलों और एनसीडी के बीच वास्तविक समय में दो-तरफा एकीकरण को सक्षम करते हैं और सिंक्रनाइज़ेशन, सटीक रिपोर्टिंग और नीति दृश्यता सुनिश्चित करते हैं । इन सुधारों की अनुपूर्ति करते हुए बैंक मित्र सहकारी समितियों (डेयरी और मात्स्यिकी) को नाबार्ड के सहयोग से माइक्रो– ATMs प्रदान करने से, डिजिटल वित्तीय समावेशन बढ़ता है और पारदर्शी, पता लगाने योग्य, डोर-स्टेप वित्तीय सेवाएं सुनिश्चित होती हैं । इसके अतिरिक्त, बैंक मित्र और लेनदेन पाइंट के रूप में कार्य करने वाले पैक्स के माध्यम से आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) का एकीकरण ग्रामीण सदस्यों के लिए सुरक्षित, पता लगाने योग्य वित्तीय लेनदेन, डोरस्टेप बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय समावेशन को सक्षम बना रहा है ।  

सहकारिता मंत्रालय कृषि और ग्रामीण आजीविका में शामिल सहकारी समितियों को प्रोत्साहन और सहायता उपायों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान कर रहा है जिसमें मुख्‍य तौर पर निम्नलिखित शामिल हैं:

नीतिसंबंधी पहलजैसे कि पैक्स के लिए आदर्श उपविधियां, राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025, और बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम में संशोधन, जो सहकारी समितियों को बहुउद्देशीय बनाते हैं, शासन और पारदर्शिता में सुधार करते हैं, और महिलाओं एवं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति सदस्यों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व के साथ अधिक समावेशी, व्यापक सदस्यता को अनिवार्य करते हैं

बैंकिंग और ऋण से संबंधित पहलसहकारी बैंकों (UCBs, StCBs, DCCBs) के लिए शाखा नेटवर्क का विस्तार करने, डोरस्टेप बैंकिंग का विस्तार करने, उच्च आवास और स्वर्ण ऋण सीमा का लाभ उठाने और CGTMSE जैसी योजनाओं में भाग लेने के लिए विनियामक छूट और सक्षम उपायों सहित कृषि और ग्रामीण आजीविका सहकारी समितियों के लिए ऋण प्रवाह में सुधार करना शामिल है ।

वित्तीय प्रोत्साहनइनमें ₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच आय वाली सहकारी समितियों के लिए अधिभार को 12% से घटाकर 7% करना, न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को 18.5% से घटाकर 15% करना और 31 मार्च, 2024 से पहले स्थापित नई विनिर्माण सहकारी समितियों के लिए रियायती 15% कर की दर शुरू करने जैसी प्रमुख कर राहत उपाय शामिल हैं । प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्‍स) और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) के लिए नकद जमा, भुगतान, ऋण और ऋण चुकौती की अनुमत सीमा को प्रति सदस्य 20,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे उनका प्रचालन लचीलापन सुगम हुआ है ।

अवसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिसमें कार्यशील पैक्स के कंप्‍यूटरीकरण के लिए 2,925.39 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय शामिल है । कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) योजना के अधीन, पैक्स गोदामों के लिए मार्जिन धनराशि की आवश्यकताओं को 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है, सब्सिडी दरों को 25% से बढ़ाकर 33.33% कर दिया गया है, और आंतरिक सड़कों और तौल पुलों जैसी सहायक सुविधाओं के लिए कुल स्वीकार्य सब्सिडी के एक तिहाई के बराबर अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जाती है ।  मंत्रालय ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को 190 करोड़ रुपये और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) को 98 करोड़ रुपये के संवितरण की सुविधा प्रदान की है । एनसीडीसी को चार वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये का कैबिनेट द्वारा अनुमोदित अनुदान इसे सहकारी क्षेत्रों में दीर्घकालिक और कार्यशील पूंजी ऋण के लिए अतिरिक्त 20,000 करोड़ रुपये जुटाने में सक्षम बनाता है ।  

चीनी सहकारी समितियों के लिए एथेनॉल संयंत्रों, सह-उत्पादन इकाइयों की स्थापना और कार्यशील पूंजी के लिए एनसीडीसी के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये की एक समर्पित ऋण योजना शुरू की गई है, साथ ही एथेनॉल विविधीकरण का समर्थन करने हेतु पांच वर्ष के लिए 6% प्रति वर्ष (या वास्तविक ब्याज का 50%) की ब्याज छूट भी दी गई है । सहकारी बैंकों को सूक्ष्म और लघु उद्यमों क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) योजना के तहत सदस्य ऋणदाता संस्थानों के रूप में शामिल करने के माध्यम से वित्तीय सुविधा प्रदान की गई है, जिससे कोलेटरल-मुक्त ऋणों पर 85% तक जोखिम कवरेज संभव हो गया है। सहकारी बैंकों को आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) में शामिल करने के लिए लाइसेंस शुल्क को भी युक्तिसंगत बनाया गया है और प्रारंभिक पूर्व-उत्पादन चरण के लिए मुफ्त कर दिया गया है, जबकि डेयरी सहकारी समितियों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) की सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है ।

चीनी सहकारी समितियों के लिए अतिरिक्त आयकर राहत में मिलों को वर्ष 2016-17 के आकलन वर्ष से पहले किसानों को किए गए भुगतान को व्यय के रूप में मानने की अनुमति देना; 46,000 करोड़ रुपये से अधिक की राहत प्रदान करना, अप्रैल 2016 से FRP/SAP तक गन्ने की कीमतों का भुगतान करने के लिए उन्हें अतिरिक्त कर से छूट देना और शीरे पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% करना शामिल है। सामूहिक रूप से, ये वित्तीय प्रोत्साहन सहकारी समितियों को अधिक व्यवहार्य, प्रतिस्पर्धी और ग्रामीण भारत में बढ़ी हुई आजीविका प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं ।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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