Monday, January 19, 2026
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के कलियाबोर में ₹6,950 करोड़ से अधिक की लागत वाले ‘काजीरंगा एलीवेटेड कॉरिडोर’ परियोजना का भूमि पूजन किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के कलियाबोर में ₹6,950 करोड़ से अधिक की लागत वाले ‘काजीरंगा एलीवेटेड कॉरिडोर’ परियोजना का भूमि पूजन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम के कलियाबोर में ₹6,950 करोड़ से अधिक लागत वाली काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कलियाबोरनुमालीगढ़ खंड के चार लेन निर्माण) का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोग उन्हें आशीर्वाद देने आए हैं, जिसके लिए वह हृदय से आभारी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि काजीरंगा की एक बार फिर यात्रा करने पर उन्हें अपनी पिछली यात्रा की यादें ताजा हो गईं हैं। उन्होंने अपनी पिछली यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि दो वर्ष पहले काजीरंगा में बिताए गए क्षण उनके जीवन के सबसे विशेष अनुभवों में से थे। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में रात्रि प्रवास का अवसर मिला था और अगले दिन हाथी सफारी के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बेहद करीब से महसूस किया।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष वे झुमोइर महोत्सव में शामिल हुए थे और इस बार उन्हें माघ बिहू के अवसर पर असम आने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि महज़ एक माह पहले ही वे विकास परियोजनाओं के लिए असम आए थे, जहां उन्होंने गुवाहाटी में विस्तारित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया और नामरूप में अमोनियायूरिया कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे अवसरों ने उनकी सरकार केविकास भी, विरासत भीके मंत्र को और अधिक मजबूती दी है।

प्रधानमंत्री ने असम के अतीत, वर्तमान और भविष्य में कलियाबोर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह काजीरंगा नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार और ऊपरी असम के लिए कनेक्टिविटी का केंद्र है। उन्होंने स्मरण कराते हुए कहा कि यह कलियाबोर ही था जहाँ से महान योद्धा लचित बोरफुकन ने मुगल आक्रमणकारियों को खदेड़ने की रणनीति बनाई थी, और उनके नेतृत्व में असम के लोगों ने साहस, एकता और दृढ़ संकल्प के साथ मुगल सेना को पराजित किया था। श्री मोदी ने कहा कि यह केवल एक सैन्य विजय नहीं थी, बल्कि असम के गौरव और आत्मविश्वास की घोषणा थी। उन्होंने बताया कि अहोम शासन के समय से ही कलियाबोर रणनीतिक मायने रखता है और उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी सरकार के तहत यह क्षेत्र अब कनेक्टिविटी और विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के शब्दों को याद किया, जिन्होंने काजीरंगा की सुंदरता का बड़े प्रेम से वर्णन किया था। उन्होंने कहा कि उनकी पंक्तियाँ काजीरंगा के प्रति प्रेम और प्रकृति के साथ असमिया लोगों के जुड़ाव को दर्शाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि काजीरंगा केवल एक नेशनल पार्क नहीं है, बल्कि असम की आत्मा और भारत की जैव विविधता का एक अनमोल रत्न है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।  उन्होंने दोहराया कि काजीरंगा और इसके वन्यजीवों की रक्षा करना केवल पर्यावरण की रक्षा करना नहीं है, बल्कि असम के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक जिम्मेदारी भी है। श्री मोदी ने असम की धरती से नई परियोजनाओं के शुभारंभ की घोषणा की और उन पहलों के लिए लोगों को बधाई दी जिनका व्यापक प्रभाव होगा।

काजीरंगा में एकसींग वाले गैंडे का आवास होने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि बाढ़ के दौरान वन्यजीव ऊंचे स्थानों की तलाश में राष्ट्रीय राजमार्ग पार करते हैं, जहां वे अक्सर फंस जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि यातायात सुचारु रहे और जंगल भी सुरक्षित रहे। उन्होंने जानकारी दी कि इसी विजन के तहत, कलियाबोर से नुमालीगढ़ तक लगभग ₹7,000 करोड़ की लागत से 90 किलोमीटर का कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, जिसमें 35 किलोमीटर का एलीवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर शामिल है। वाहन ऊपर से गुजरेंगे जबकि नीचे वन्यजीवों की आवाजाही निर्बाध बनी रहेगी; इस डिजाइन को गैंडों, हाथियों और बाघों के पारंपरिक आवाजाही मार्गों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि यह कॉरिडोर ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी में भी सुधार करेगा, और नई रेल सेवाओं के साथ, लोगों के लिए नए अवसर खोलेगा। उन्होंने इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए असम और देश की जनता को बधाई दी।

असम की जनता और सरकार की एक और उपलब्धि की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि एक समय गैंडे के अवैध शिकार की समस्या बेहद गंभीर थी, जब 2013 और 2014 में दर्जनों एक-सींग वाले गैंडे मारे गए थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने तय किया कि यह स्थिति आगे नहीं चल सकती और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया, वन विभाग को आधुनिक संसाधन दिए गए, निगरानी बढ़ाई गई और वन दुर्गाके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने बताया कि 2025 में गैंडे के अवैध शिकार की एक भी घटना सामने नहीं आई, जो सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और असम की जनता के प्रयासों से संभव हो सका।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि प्रकृति और प्रगति एक-दूसरे के विरोधी हैं, लेकिन आज भारत दुनिया को दिखा रहा है कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी दोनों एक साथ आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश में वन और वृक्ष आच्छादन बढ़ा है और लोग एक पेड़ मां के नामअभियान में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं, जिसके तहत अब तक 260 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से बाघ और हाथी अभयारण्यों की संख्या बढ़ी है, साथ ही संरक्षित और सामुदायिक क्षेत्रों का भी विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि जो चीते कभी भारत से विलुप्त हो चुके थे, उन्हें अब वापस लाया गया है और वे एक नया आकर्षण बन गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लगातार आर्द्रभूमि संरक्षण पर काम कर रहा है और एशिया का सबसे बड़ा रामसर नेटवर्क बन चुका है, जबकि रामसर स्थलों की संख्या के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम भी दुनिया को यह दिखा रहा है कि विकास, विरासत संरक्षण और प्रकृति की रक्षा साथ-साथ कैसे की जा सकती है।

श्री मोदी ने टिप्पणी की कि उत्तर-पूर्व का सबसे बड़ा दर्द हमेशा दूरी रही है-दिलों की दूरी और जगहों की दूरी। उन्होंने कहा कि दशकों तक, इस क्षेत्र के लोगों ने महसूस किया कि विकास कहीं और हो रहा है और उन्हें पीछे छोड़ा जा रहा है, जिसने न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि विश्वास को भी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने केंद्र और राज्य की सरकारों के माध्यम से उत्तर-पूर्व के विकास को प्राथमिकता देकर इस भावना को बदल दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि असम को सड़क मार्ग, रेल मार्ग, हवाई मार्ग और जल मार्ग के माध्यम से जोड़ने का काम एक साथ शुरू हुआ।

रेल संपर्क के विस्तार से सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर लाभ होने की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे उत्तर-पूर्व को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस पर ध्यान न देने के लिए विपक्ष की आलोचना की और बताया कि जब वे केंद्र की सत्ता में थे, तब असम को रेल बजट में केवल ₹2,000 करोड़ मिलते थे, जबकि उनकी सरकार के तहत इसे सालाना लगभग ₹10,000 करोड़ तक बढ़ा दिया गया है-जो कि पांच गुना अधिक है। श्री मोदी ने कहा कि इस बढ़े हुए निवेश से बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है, जिसमें नई रेल लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण ने रेलवे की क्षमता और यात्री सुविधाओं को बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री ने कलियाबोर से तीन नई ट्रेन सेवाओं के शुभारंभ की घोषणा की, जो असम के रेल संपर्क में एक महत्वपूर्ण विस्तार है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी को कोलकाता से जोड़ेगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक हो जाएगी, जबकि दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण स्टेशनों को कवर करेंगी, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ होगा। श्री मोदी ने रेखांकित किया कि ये ट्रेनें असम के व्यापारियों को नए बाजारों से जोड़ेंगी, छात्रों को शैक्षिक अवसरों तक आसान पहुंच प्रदान करेंगी और देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा को सरल बनाएंगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कनेक्टिविटी विस्तार से यह विश्वास पैदा होता है कि उत्तर-पूर्व अब विकास के हाशिये पर नहीं है, अब दूर नहीं है, बल्कि दिल के करीब और दिल्ली के करीब है।

प्रधानमंत्री ने असम के सामने एक बड़ी चुनौती-अपनी पहचान और संस्कृति की रक्षा की आवश्यकता को भी संबोधित किया। उन्होंने घुसपैठ से प्रभावी ढंग से निपटने, जंगलों, ऐतिहासिक सांस्कृतिक स्थलों और लोगों की जमीन को अवैध अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए असम की अपनी सरकार की प्रशंसा की, जिसकी व्यापक रूप से सराहना की जा रही है। पीएम मोदी ने इसकी तुलना विपक्ष से करते हुए कहा कि दशकों तक उन्होंने केवल वोटों और सरकार बनाने के लिए असम की मिट्टी घुसपैठियों को सौंप दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के शासन के दौरान घुसपैठ बढ़ती रही, और इन घुसपैठियों ने, जिन्हें असम के इतिहास, संस्कृति या विश्वास की कोई चिंता नहीं थी, बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया। उन्होंने आगे कहा कि घुसपैठ के कारण पशु गलियारों (एनिमल कॉरिडोर) में अतिक्रमण हुआ, अवैध शिकार को बढ़ावा मिला और तस्करी तथा अन्य अपराधों में वृद्धि हुई।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए हुए, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री और डिब्रूगढ़ लोगसभा सीट से सांसद, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “काजीरंगा एलीवेटेड कॉरिडोर एक ऐतिहासिक परियोजना है जो पर्यावरण के प्रति अत्यंत जिम्मेदारी के साथ सतत विकास के लिए हमारे प्रगतिशील प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ₹6,950 करोड़ की यह परियोजना विशेष रूप से डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया सहित पूरे ऊपरी असम की कनेक्टिविटी को सुव्यवस्थित और बेहतर बनाएगी, जबकि एक समर्पित एलीवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के माध्यम से काजीरंगा की अद्वितीय जैव विविधता की रक्षा भी करेगी। उत्तर-पूर्व को उत्तर भारत से जोड़ने वाली नई अमृत भारत एक्सप्रेससेवाओं के साथ, ये पहल असम में आवाजाही (मोबिलिटी) में सुधार करेंगी, सुरक्षा बढ़ाएंगी, यात्रा का समय कम करेंगी और आर्थिक विकास के नए रास्ते खोलेंगी।

इस कार्यक्रम में असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने ₹6,950 करोड़ से अधिक लागत वाली काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कलियाबोरनुमालीगढ़ खंड के चार लेन निर्माण) का भूमि पूजन किया। 86 किलोमीटर लंबी यह काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना एक पर्यावरणसंवेदनशील राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना है। इसमें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरने वाला 35 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर, 21 किलोमीटर का बाईपास खंड तथा एनएच-715 के मौजूदा दो लेन मार्ग को चार लेन में चौड़ा करने का 30 किलोमीटर का कार्य शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है, साथ ही पार्क की समृद्ध जैवविविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

यह परियोजना नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी और ऊपरी असम, विशेषकर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया के लिए कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार करेगी। एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर से पशुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी और मानववन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी। इससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, यात्रा समय और दुर्घटनाओं में कमी आएगी तथा बढ़ते यात्री और माल यातायात को भी समर्थन मिलेगा। परियोजना के तहत जाखलाबंधा और बोकाखाट में बाईपास विकसित किए जाएंगे, जिससे कस्बों में यातायात का दबाव घटेगा, शहरी आवागमन सुधरेगा और स्थानीय निवासियों की जीवनगुणवत्ता बेहतर होगी।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनोंगुवाहाटी (कामाख्या)-रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस और डिब्रूगढ़लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेसको भी हरी झंडी दिखाई। ये नई ट्रेन सेवाएं पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी और लोगों के लिए सुरक्षित अधिक सुविधाजनक यात्रा संभव बनाएंगी।

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