पूर्वोत्तर क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग और परियोजना सुविधा
पूर्वोत्तर क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग और परियोजना सुविधा
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) ने 31 जनवरी, 2025 को आठ उच्च स्तरीय कार्य बलों का गठन किया। इनका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि और बागवानी, खेल प्रोत्साहन, पर्यटन, हथकरघा और हस्तशिल्प, आर्थिक गलियारा विकास, पशु-आधारित प्रोटीन में आत्मनिर्भरता, निवेश प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचा तथा कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतियों और सिफारिशों को तैयार करना था।
अब तक इन कार्यबलों की कुल 23 बैठकें हो चुकी हैं।
ये उच्च स्तरीय कार्य बल पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के लिए कार्य करते हैं। प्रत्येक कार्यबल का गठन उत्तर पूर्वी राज्यों में से किसी एक राज्य के मुख्यमंत्री/राज्यपाल द्वारा किया जाता है, जिसमें अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के तीन मुख्यमंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री सदस्य होते हैं। अंतर-राज्यीय समन्वय, सुव्यवस्थित परामर्शों के माध्यम से होता है, जिसमें संयोजक राज्य सभी सहभागी राज्यों से सुझाव एकत्र करता है और सहयोगात्मक निर्णय लेने में सहायता करता है।
पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय द्वारा विकसित पूर्वोत्तर विकास सेतु पोर्टल, पूर्वोत्तर क्षेत्र में परियोजनाओं के प्रस्तुतीकरण और मूल्यांकन के लिए एक व्यापक एकल-खिड़की डिजिटल प्रणाली के रूप में कार्य करता है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, राज्य सरकारें और केंद्रीय एजेंसियां अवधारणा नोट्स/डीपीआर अपलोड करती हैं जिससे परियोजना प्रस्तावों की प्रक्रिया सुव्यवस्थित हो जाती है। यह पोर्टल मैन्युअल प्रक्रियाओं को समाप्त करके और पारदर्शी कार्यप्रवाह सुनिश्चित करके त्वरित जांच, अंतर-मंत्रालयी परामर्श और त्वरित निर्णय लेने में सहायता करता है।
यह पोर्टल एकीकृत निगरानी और समन्वय के साथ-साथ स्वीकृत प्रस्तावों के लिए निधि जारी करने हेतु अनुरोधों की प्राप्ति और प्रसंस्करण के लिए एक तंत्र के रूप में भी कार्य करता है। यह मंत्रालयों, विभागों और राज्य प्राधिकरणों को अपने प्रस्तावों की स्थिति पर नज़र रखने, प्रश्नों का उत्तर देने और कार्यान्वयन प्रगति को अपडेट करने की सुविधा प्रदान करता है जिससे जवाबदेही मजबूत होती है। सभी हितधारकों को एक एकीकृत डिजिटल इंटरफेस पर लाकर, यह प्रणाली योजनाओं में समन्वय को बढ़ावा देती है, दोहराव को कम करती है और पूर्वोत्तर क्षेत्र के त्वरित विकास के लिए समयबद्ध तथा समन्वित कार्रवाई करने में सहायता प्रदान करती है।
गृह मंत्रालय ने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ गांवों को एकीकृत विकास गतिविधियों के लिए चुना है। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे का निर्माण, आजीविका सहायता और बेहतर सेवा वितरण है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में परियोजना नियोजन और कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित प्रणालियों, विशेषकर पीएम गति शक्ति पोर्टल का प्रभावी ढंग से उपयोग करके किया जा रहा है। राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत किए गए अवधारणात्मक बिंदुओं को पोर्टल के माध्यम से समन्वित किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति से बचा जा सके। इस पोर्टल के माध्यम से पूर्व-अनुमोदन जांच के साथ-साथ परियोजना पूर्ण होने के बाद की समीक्षा में भी मदद मिलती है जिससे पारदर्शिता और सटीक निगरानी में सुधार होता है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।