Monday, January 5, 2026
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पहल एवं उपलब्धियां-2025

पहल एवं उपलब्धियां-2025

आयुष्मान भारत में चार घटक शामिल हैं:

अ – आयुष्मान आरोग्य मंदिर

पहला घटक 1,50,000 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एबी-एचडब्ल्यूसी) की स्थापना से सम्‍बंधित है। इनका नाम अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर रखा गया है। स्वास्थ्य सेवा समुदाय सुलभ बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और ग्रामीण एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) का उन्नयन किया जाएगा। इन केंद्रों का उद्देश्य व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा (सीपीएचसी) प्रदान करना है। इसके लिए प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) और संक्रामक रोग सेवाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही गैर-संक्रामक रोगों (सामान्य गैर-संक्रामक रोग जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मुख, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के तीन सामान्य कैंसर) से सम्‍बंधित सेवाओं को शामिल किया जाएगा। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र विज्ञान, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था और प्रशामक देखभाल और आघात देखभाल के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को धीरे-धीरे जोड़ा जाएगा। योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन और कल्याणकारी गतिविधियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा (सीपीएचसी) – आयुष्मान भारत का उद्देश्य स्वास्थ्य सम्‍बंधी समग्र आवश्यकताओं (निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वास और उपशामक देखभाल सहित) को प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर पर पूरा करना है। इसके लिए देखभाल की निरंतरता का दृष्टिकोण अपनाया गया है। किसी भी व्यक्ति के जीवनकाल में, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं जनसंख्या के बेहतर स्वास्थ्य परिणामों और जीवन की गुणवत्ता के लिए 80-90 प्रतिशत स्वास्थ्य सम्‍बंधी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीम उनके कार्यक्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों के लिए सामुदायिक संपर्क और जनसंख्या गणना करना, संक्रामक तथा गैर-संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान करने के साथ ही सटीक निदान के लिए समय पर रेफरल हेतु उनकी जांच करना सुनिश्चित करती है। टीम समुदाय में रोगियों को उपचार का पालन और अनुवर्ती देखभाल प्रदान करना भी सुनिश्चित करती है। इन केंद्रों के माध्यम से आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं, आवश्यक दवाओं और निदान उपकरणों की उपलब्धता समुदाय के करीब ही सुनिश्चित की जाती है। यह जनसंख्या की स्वास्थ्य सम्‍बंधी आवश्यकताओं को पूरा करने वाली मजबूत और लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के निर्माण की दिशा में एक कदम है।

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आयुष्मान आरोग्य मंदिर में उपलब्धियां और सेवा वितरण:

ब – आयुष्मान भारत पीएमजन आरोग्य योजना:

स – प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम):

तीसरा स्तंभ प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम- एबीएचआईएम) है। इसका परिव्यय लगभग 64,180 करोड़ रुपये है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा 25 अक्टूबर, 2021 को प्रारंभ किया गया था और वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 की योजना अवधि के दौरान लागू किया जाना है। यह देश भर में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने की सबसे बड़ी अखिल भारतीय योजना है। इस योजना के अंतर्गत उपाय प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तरों पर स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता में स्वास्थ्य प्रणालियों और संस्थानों की क्षमताओं को विकसित करने और वर्तमान और भविष्य की महामारियों/आपदाओं का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को तैयार करने पर केंद्रित हैं।

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन का लक्ष्य महानगरों में ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क विकसित करके स्वास्थ्य इकाइयों को मजबूत करके एक आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली का निर्माण करना है। इसका उद्देश्‍य सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों और रोग प्रकोपों का प्रभावी ढंग से पता लगाना, उनकी जांच करना, उन्हें रोकना और उनसे निपटने का समुचित प्रबंध करना  है।

कोविड-19 और अन्य संक्रामक रोगों के शोध का समर्थन करने के लिए निवेश में वृद्धि की जा रही है। इसमें जैव चिकित्सा अनुसंधान भी शामिल है ताकि कोविड-19 जैसी महामारियों के लिए अल्पकालिक और मध्यम अवधि की प्रतिक्रिया के लिए तैयारी की जा सकें। इसके साथ ही जानवरों और मनुष्यों में संक्रामक रोग के प्रकोप को रोकने, पता लगाने और प्रतिक्रिया देने के लिए वन हेल्थ अप्रोच को लागू करने की मुख्य क्षमता विकसित करना भी इसका हिस्‍सा है।

इस मिशन के अंतर्गत आवंटित बजट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अतिरिक्त है।

योजना के सीएसएस घटकों के अंतर्गत निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:

इस योजना के तहत 2021-22 से 2025-26 की अवधि के दौरान 17,788 भवन रहित उप-केंद्रों का निर्माण आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में और शहरी क्षेत्रों में, विशेष रूप से झुग्गी-झोपड़ी और झुग्गी-झोपड़ी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए। 11,024 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों की स्थापना की परिकल्पना की गई है। इसके अलावा, ब्लॉक स्तर पर 3382 ब्लॉक जन स्वास्थ्य इकाइयां (बीपीएचयू) और देश भर में 730 जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की स्थापना की जाएगी, इसमें प्रत्येक जिले में एक ऐसी प्रयोगशाला होगी। 5 लाख से अधिक आबादी वाले सभी जिलों में 50 से 100 बिस्तरों वाले गहन चिकित्सा अस्पताल ब्लॉक होंगे और शेष जिलों में रेफरल लिंक की व्यवस्था होगी।

केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) घटक की वर्तमान स्थिति: योजना के अंतर्गत (15वीं-वित्तीय आयोग के हिस्से को छोड़कर), योजना अवधि (2021-2026) के दौरान राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कुल वित्तीय आवंटन 34,932.27 करोड़ रुपये है। पीएम-एबीएचआईएम के केंद्रीय प्रायोजित योजना (सीएसएस) घटक के तहत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र (एएएम), 5456 शहरी एएएम, 2151 ब्लॉक जन स्वास्थ्य इकाइयां, जिला स्तर पर 744 एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं और 621 गहन चिकित्सा ब्लॉक (सीसीबी) के निर्माण/सुदृढ़ीकरण के लिए 32,928.82 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

पीएम-एबीएचआईएम के तहत 12 केंद्रीय अस्पतालों में 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक (सीसीएचबी) की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है।

1. एम्स – भोपाल (मध्य प्रदेश),

2. भुवनेश्वर (ओडिशा),

3. जोधपुर (राजस्थान),

4. पटना (बिहार),

5. ऋषिकेश (उत्तराखंड),

6. रायपुर (छत्तीसगढ़),

7. आईएमएस-बीएचयू,

8. एम्स नई दिल्ली,

9. पीजीआई चंडीगढ़,

प्रस्तावित 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक (सीसीएचबी) में आपातकालीन परिसर, इंटरमीडिएट केयर और एचडीयू, एकांत (आइसोलेशन)-विशेष श्रेणी वार्ड, गहन चिकित्सा इकाई, आइसोलेशन रूम-बर्न आईसीयू और एचडीयू, ऑपरेशन थिएटर परिसर आदि शामिल हैं। इसका कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में चल रहा है। पीएम-एबीएचआईएम के तहत 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक (सीसीएचबी) के लिए मानक उपकरण सूची तैयार कर ली गई है।

द – आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन-एबीडीएम:

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) सितंबर 2021 में शुरू किया गया था। ये भारत सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, परस्पर उपयोग योग्य डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण करना है। एबीडीएम के माध्यम से, नागरिक अपने चिकित्सा रिकॉर्ड (जैसे, नुस्खे, निदान रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश) को सुरक्षित रूप से संग्रहीत और एक्सेस कर सकते हैं और सहमति के बाद उन्हें स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ साझा कर सकते हैं। इससे एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य इतिहास तैयार करना संभव होता है। इससे निरंतर देखभाल सुनिश्चित होती है। नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवा प्रदाताओं के बारे में सटीक और सत्यापित जानकारी प्राप्त होगी। इन पहलों के माध्यम से, एबीडीएम का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ बनाना है।

एबीडीएम की तकनीकी संरचना के मुख्य घटकों में स्वास्थ्य सेवा इको-सिस्‍टम में हितधारकों के बीच विश्वसनीय पहचान प्रदान करने हेतु नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (एबीएचए), स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्टर (एचपीआर), स्वास्थ्य सुविधा रजिस्टर (एचएफआर) और औषधि रजिस्टर सहित चार रजिस्टर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य सूचना सहमति प्रबंधक (एचआईई-सीएम), राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय (एनएचसीएक्स) और एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफ़ेस (यूएचआई) तीन गेटवे निर्बाध स्वास्थ्य सूचना आदान-प्रदान को सुगम बनाते हैं और साथ ही अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित करते हैं।

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  1. आयुष्मान भारत:

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