नीति आयोग द्वारा जयपुर में “भारत में एंड-ऑफ-लाइफ वाहन (ईएलवी), बेकार टायरों और ई-अपशिष्ट तथा लिथियम-आयन बैटरी में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना” संबंधी विषय पर तीन महत्वपूर्ण रिपोर्ट लॉन्च की गई
नीति आयोग द्वारा जयपुर में “भारत में एंड-ऑफ-लाइफ वाहन (ईएलवी), बेकार टायरों और ई-अपशिष्ट तथा लिथियम-आयन बैटरी में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना” संबंधी विषय पर तीन महत्वपूर्ण रिपोर्ट लॉन्च की गई
नीति आयोग ने 22 जनवरी, 2026 को जयपुर में मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) के इंटरनेशनल मटेरियल रिसाइक्लिंग कॉन्फ्रेंस (आईएमआरसी) में “भारत में एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों (ईएलवी), बेकार टायरों और ई-अपशिष्ट तथा लिथियम-आयन बैटरी में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने” संबंधी विषय पर तीन रिपोर्ट लॉन्च कीं। इन रिपोर्टों में भारत में सर्कुलर इकोनॉमी इकोसिस्टम की चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है और बुनियादी ढांचे के विकास, क्षेत्र के औपचारिककरण, एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) फ्रेमवर्क को मजबूत करने और रेवेन्यू जेनरेशन के लिए आर्थिक क्षमता बढ़ाने हेतु सुझाव दिए गए।
माननीय प्रधानमंत्री का 2047 तक विकसित भारत का विजन अनिवार्य रूप से कम कार्बन वाले और संसाधन-कुशल विकास मार्ग पर आधारित है, जिसके लिए स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के व्यापक कार्यान्वयन की आवश्यकता है। इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरण, लिथियम-आयन बैटरी और ऑटोमोटिव वाहन, डिजिटलीकरण को सशक्त बनाने, मोबिलिटी में सुधार करने और एनर्जी ट्रांजिशन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री 2016 के 50,000 से बढ़कर 2024 में 2.08 मिलियन हो गई है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुँचाना है। परिणामस्वरूप, लिथियम-आयन बैटरी की मांग 2025 के 29 जीडब्ल्यूएच से बढ़कर 2035 तक 248 जीडब्ल्यूएच होने का अनुमान है। इसके साथ ही, भारत में एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों (ईएलवी) की संख्या 2025 के 23 मिलियन से बढ़कर 2030 तक 50 मिलियन होने की उम्मीद है। ई-अपशिष्ट भी 2024 के 6.19 एमएमटी से बढ़कर 2030 तक 14 एमएमटी तक पहुँचने का अनुमान है। इन परिस्थितियों में पुराने वाहनों (ईएलवी), बेकार टायरों, ई-अपशिष्ट और लिथियम-आयन बैटरी का सतत प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। अतः इन क्षेत्रों में सर्कुलर इकोनॉमी को अपनाना न केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकता है, बल्कि एक रणनीतिक अनिवार्यता भी है, जो सतत और समावेशी विकास के माध्यम से विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इन रिपोर्टों को संबंधित मंत्रालयों, नियामकों, उद्योग जगत और नॉलेज पार्टनर सहित प्रमुख हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के माध्यम से विकसित किया गया है। ये रिपोर्ट वर्तमान चुनौतियों की सामयिक और विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करती हैं, साथ ही सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में परिवर्तन को तेज करने के लिए व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव भी प्रदान करती हैं। ये पहल भारत में संसाधन दक्षता में सुधार करेंगी, सामग्री सुरक्षा को मजबूत करेंगी और स्थिरता को बढ़ावा देंगी।
इन रिपोर्ट को यहाँ देखा जा सकता है:

- भारत में एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों (ईएलवी) की सर्कुलर इकोनॉमी को बेहतर बनाना