दो तेज गति के गश्ती जहाजों के निर्माण कार्य के शुभारंभ और इस्पात कटाई तथा दो एयर कुशन व्हीकल के गर्डर बिछाने के साथ भारतीय तटरक्षक बल की महत्वपूर्ण उपलब्धि
दो तेज गति के गश्ती जहाजों के निर्माण कार्य के शुभारंभ और इस्पात कटाई तथा दो एयर कुशन व्हीकल के गर्डर बिछाने के साथ भारतीय तटरक्षक बल की महत्वपूर्ण उपलब्धि
भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए 14 तेज गति वाले गश्ती जहाजों को तैयार करने की परियोजना के तहत दूसरे फास्ट पेट्रोल वेसल (एफपीवी) के निर्माण कार्य का शुभारंभ और पांचवें एफपीवी की इस्पात कटाई का कार्य 30 अक्टूबर, 2025 को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में संपन्न हुआ। इसके साथ ही, भारतीय तटरक्षक बल के लिए दूसरे और तीसरे स्वदेशी एयर कुशन वाहनों (एसीवी) के गर्डर बिछाने का समारोह गोवा के चौगुले रसैम यार्ड में आयोजित किया गया।
60% स्वदेशी सामग्री से निर्मित 14 फास्ट पेट्रोल वेसल्स (एफपीवी) के डिजाइन और निर्माण के लिए अनुबंध 24 जनवरी, 2024 को किया गया था। प्रत्येक एफपीवी में मैसूर स्थित एम/एस त्रिवेणी द्वारा निर्मित स्वदेशी गियरबॉक्स और एम/एस एमजेपी इंडिया के वॉटर जेट लगाए गए हैं। इन वॉटर-जेट प्रोपेल्ड जहाजों का भार विस्थापन लगभग 340 टन है, और इन्हें तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) तथा कानून प्रवर्तन अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इन अत्याधुनिक जहाजों में नवीनतम तकनीक से सुसज्जित एआई-आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम और मल्टीपर्पस ड्रोन भी तैनात होंगे, जो भारत की समुद्री रक्षा क्षमताओं में उन्नत प्रौद्योगिकी के समावेशन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
छह एयर कुशन व्हीकल्स (एसीवी) के अनुबंध पर 24 अक्टूबर, 2024 को हस्ताक्षर किये गए थे। ये प्रमाणित ग्रिफॉन होवरवर्क (यूके) डिजाइन पर आधारित हैं, जिनमें 50% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। ये अत्याधुनिक एसीवी तेज गति से गश्त, निगरानी, इंटरसेप्शन, अवरोधन तथा हर मौसम में खोज एवं बचाव कार्रवाई करने में सक्षम हैं। एसीवी एक फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में कार्य करेंगे, जिससे कम गहराई वाले जलक्षेत्र, दलदली इलाकों और खुले समुद्र में त्वरित प्रतिक्रिया तथा निर्बाध गतिशीलता सुनिश्चित होगी। संचालन में आने के बाद ये सभी भारत की तटीय सुरक्षा संरचना में तकनीकी प्रगति की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होंगे।
एफपीवी और एसीवी का निर्माण देश के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप किया जा रहा है। इन अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) की क्षमता और उपस्थिति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।