Wednesday, January 21, 2026
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 दावोस में भारत की दमदार शुरुआत

 दावोस में भारत की दमदार शुरुआत

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने अश्विनी वैष्णव ने “एआई पावर प्ले” शीर्षक एक उच्चस्तरीय वैश्विक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी उभरती भू-राजनीतिक परिस्थितियों, इसके आर्थिक प्रभावों, शासन से संबंधित चुनौतियों और इसके समावेशी प्रसार के उपायों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस चर्चा में प्रमुख वैश्विक नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और बहुपक्षीय संस्थाओं ने हिस्सा लिया जहां एआई के माध्यम से विभिन्न देशों में शक्ति संतुलन, उत्पादकता वृद्धि और नीतिगत ढांचे के बदलावों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

पैनल का संचालन यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष श्री इयान ब्रेमर ने किया। इसमें अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक सुश्री क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष श्री ब्रैड स्मिथ, सऊदी अरब के निवेश मंत्री श्री खालिद अल-फलीह और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव सहित कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया।

श्री अश्विनी वैष्णव ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारत स्पष्ट रूप से एआई को अपनाने और विकसित करने वाले देशों के अग्रणी समूह में शामिल है जिसने एआई आर्किटेक्चर के सभी पांच स्तरों यानी अनुप्रयोगों, मॉडल, चिप्स, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा में व्यवस्थित प्रगति की है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की एआई रणनीति का मुख्य उद्देश्य बड़े मॉडलों पर अत्यधिक केंद्रित होने के बजाय इसे वास्तविक दुनिया में लागू करना और निवेश पर लाभ (आरओआई) सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निवेश पर लाभ सबसे बड़े मॉडल बनाने से नहीं मिलता। वास्तविक दुनिया में उपयोग होने वाले लगभग 95 प्रतिशत मामलों को 20-50 अरब पैरामीटर रेंज वाले मॉडलों का उपयोग करके हल किया जा सकता है। उन्होंने यह बताया कि भारत ने पहले ही कुशल और सस्ती प्रौद्योगिकी मॉडल विकसित कर लिए हैं, जिन्हें उत्पादकता, दक्षता और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग को बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के साथ लागू किए जा रहे हैं। कम लागत पर अधिकतम लाभ प्रदान करने पर केंद्रित इस दृष्टिकोण से आर्थिक रूप से टिकाऊ एआई लागू करने की भारत की नीति स्पष्ट होती है। वैश्विक मानकों का उल्लेख करते हुए, श्री वैष्णव ने आईएमएफ की रैंकिंग पर सवाल खड़े किये और कहा कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत एआई पैठ और तैयारी में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर और एआई प्रतिभा में दूसरे स्थान पर है।

#Watch | Union Minister @AshwiniVaishnaw says nearly 95% of AI work can be done using the 20–50 billion parameter models, which India is already deploying across sectors to boost productivity and efficiency. He added that Stanford ranks India third globally in AI penetration,… pic.twitter.com/i2dc27PaEc

श्री वैष्णव ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक प्रसार और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर बल देते हुए, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से जीपीयू की उपलब्धता की गंभीर बाधा को दूर करने के लिए सरकार के निर्णय का विस्तार से उल्लेख किया। इस पहल के तहत, 38,000 जीपीयू को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है जिसे सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाती है और छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को वैश्विक लागत के लगभग एक तिहाई पर उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने भारत के राष्ट्रव्यापी एआई कौशल कार्यक्रम पर भी प्रकाश डाला जिसका उद्देश्य एक करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करना है ताकि भारत का आईटी उद्योग और स्टार्टअप घरेलू और वैश्विक सेवा वितरण के लिए एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।

Union Minister @AshwiniVaishnaw says India is democratizing AI by offering government-subsidised GPU access at one-third of the global cost, free AI models for common needs, training 10 million people in AI skills, and steering the IT industry toward scalable AI services for… pic.twitter.com/drOXcMfK97

नियमन और शासन पर श्री वैष्णव ने एआई के लिए तकनीकी-कानूनी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई शासन केवल कानून पर निर्भर नहीं रह सकता, हमें पूर्वाग्रह का पता लगाने, अदालत में स्वीकार्य सटीकता के साथ डीपफेक को प्रमाणित करने और अनलर्निंग जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से सुरक्षित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी उपकरण विकसित करने होंगे। उन्होंने आगे कहा कि भारत इस तरह के स्वदेशी तकनीकी सुरक्षा उपायों को सक्रिय रूप से विकसित कर रहा है।

#WATCH| Union Minister @AshwiniVaishnaw says AI regulation must follow a techno-legal approach, not just standalone laws. He stressed the need for robust technical tools to address risks such as bias and deepfakes, including detection systems accurate enough to stand judicial… pic.twitter.com/PE6fYSUQ0s

चर्चा के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी वैश्विक एआई परिदृश्य में भारत की बढ़ती अहमियत को सराहा। श्री इयान ब्रेमर ने उल्लेख किया कि भारत पिछले एक दशक में एक प्रमुख भू-राजनीतिक और तकनीकी शक्ति के रूप में उभरा है। इसके साथ ही, वैश्विक संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मिसाल के रूप में भारत के प्रसार, पहुंच और संप्रभु क्षमता पर दिए गए महत्व को रेखांकित किया।

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